उपनेता प्रतिपक्ष के मुद्दे को राज्य नेतृत्व सुलझाएगा, हमारे हस्तक्षेप की जरूरत नहीं: माकपा महासचिव
उपनेता प्रतिपक्ष के मुद्दे को राज्य नेतृत्व सुलझाएगा, हमारे हस्तक्षेप की जरूरत नहीं: माकपा महासचिव
(फाइल फोटो के साथ)
नयी दिल्ली/तिरुवनंतपुरम, चार सितंबर (भाषा) मार्क्सवादी कम्युनिस्ट पार्टी (माकपा) के महासचिव एम ए बेबी ने शुक्रवार को कहा कि केरलम विधानसभा में उपनेता प्रतिपक्ष के पद को लेकर भाकपा के साथ जारी विवाद दोनों दलों के राज्य नेतृत्व के बीच बातचीत से सुलझा लिया जाएगा और इसमें केंद्रीय नेतृत्व के हस्तक्षेप की जरूरत नहीं है।
माकपा महासचिव ने दिल्ली में माकपा पोलित ब्यूरो की बैठक से पहले पत्रकारों से बातचीत में यह बात कही।
उन्होंने कहा, ‘‘केरलम में विपक्ष के उपनेता के पद को लेकर कुछ बातचीत चल रही है। जो जानकारी सामने आई है, उसके अनुसार केरलम में माकपा और भाकपा के नेता आपस में चर्चा करेंगे और इसका समाधान निकालेंगे।’’
यह पूछे जाने पर कि क्या दोनों दलों के राष्ट्रीय नेतृत्व इस मुद्दे पर चर्चा करेंगे, बेबी ने कहा कि भाकपा, माकपा और भाकपा (माले) के नेता विभिन्न मुद्दों पर नियमित रूप से बैठक करते हैं।
उन्होंने कहा, ‘‘लेकिन जहां तक इस विशेष मुद्दे का सवाल है, ऐसा समझा जाता है कि केरलम में माकपा और भाकपा के नेता खुद इस पर चर्चा कर इसे सुलझा सकते हैं।’’
बेबी ने कहा कि जरूरत पड़ने पर ही राष्ट्रीय नेतृत्व हस्तक्षेप करेगा। चार महीने से विवाद जारी रहने के बारे में पूछे जाने पर बेबी ने कहा कि इससे एलडीएफ की प्रभावी विपक्ष के रूप में भूमिका प्रभावित नहीं हुई है।
उन्होंने कहा, ‘‘कोई बाधा नहीं है। वास्तव में जिस तरह से यूडीएफ और मुख्यमंत्री (वी डी सतीशन) काम कर रहे हैं, ऐसा लगता है जैसे वे कह रहे हों कि विपक्ष की जरूरत के बिना ही हम खुद को सत्ता से बाहर कराने के लिए तैयार हैं। मुख्यमंत्री और यूडीएफ इसी तरह आगे बढ़ रहे हैं। लेकिन विपक्ष अपना काम करता रहेगा।’’
विपक्ष के नेता पिनराई विजयन की उन टिप्पणियों के बारे में पूछे जाने पर, जिनमें उन्होंने एलडीएफ की हार के लिए पय्यन्नूर और थलिपरंबा विधानसभा क्षेत्रों के मतदाताओं को जिम्मेदार ठहराया था, बेबी ने कहा कि यह मीडिया की व्याख्या है।
बेबी ने यह भी कहा कि माकपा और उसके छात्र संगठन एसएफआई उन सभी मुद्दों पर सहयोग करेंगे और काम करेंगे, जिन्हें ‘कॉकरोच जनता पार्टी’ ने युवाओं, छात्रों और आम लोगों से जुड़े मुद्दों के रूप में उठाया है।
उन्होंने कहा, ‘‘माकपा का भी यही रुख है। जब अभिजीत दीपके और डेमोक्रेटिक यूथ फेडरेशन ऑफ इंडिया के नेतृत्व में विरोध प्रदर्शन शुरू किया गया था, तब स्टूडेंट्स फेडरेशन ऑफ इंडिया भी अन्य छात्र और प्रगतिशील छात्र संगठनों के साथ प्रदर्शन में शामिल था।’’
भाषा शोभना वैभव
वैभव

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