ग्लेशियर झील फटने के कारण संभावित बाढ़ जैसी घटनाओं से निपटने के लिए राज्य तैयार: कविंदर गुप्ता

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ग्लेशियर झील फटने के कारण संभावित बाढ़ जैसी घटनाओं से निपटने के लिए राज्य तैयार: कविंदर गुप्ता

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  • Publish Date - August 29, 2026 / 03:22 PM IST,
    Updated On - August 29, 2026 / 03:22 PM IST

जम्मू, 29 अगस्त (भाषा) हिमाचल प्रदेश के राज्यपाल कविंदर गुप्ता ने नेपाल-तिब्बत क्षेत्र में हाल में आई अचानक बाढ़ के कारण हुई तबाही पर शनिवार को चिंता व्यक्त करते हुए जलवायु परिवर्तन को दुनिया के लिए बड़ी चुनौती बताया।

गुप्ता ने यहां ‘पीटीआई-वीडियो’ से कहा, ‘‘यह एक बेहद दुखद घटना है और पूरी दुनिया के लिए एक चुनौती बन गई है। जलवायु परिवर्तन और बढ़ते वैश्विक तापमान हम सभी के लिए बड़े मुद्दे हैं। हम ईश्वर से प्रार्थना करते हैं कि ऐसी घटना दोबारा न हो।’’

जम्मू निवासी गुप्ता ने रक्षाबंधन के अवसर पर शुक्रवार को स्थानीय श्रीवेंकटेश्वर स्वामी मंदिर के एक अनुष्ठान में हिस्सा लिया था। इस मंदिर को तिरुपति बालाजी मंदिर भी कहा जाता है।

भारतीय प्रौद्योगिकी संस्थान (आईआईटी), रोपड़ और यूनिवर्सिटी ऑफ टेक्नोलॉजी, सिडनी की हालिया संयुक्त रिपोर्ट के बारे में पूछे जाने पर राज्यपाल ने कहा कि हिमालयी क्षेत्र में ऐसी घटनाओं की आशंका चिंता का विषय है।

इस रिपोर्ट में हिमाचल प्रदेश को ग्लेशियर झील फटने के कारण संभावित बाढ़ के खतरे के प्रति आगाह किया गया है।

गुप्ता ने कहा, ‘‘हमारी चिंता यह है कि हिमालयी शृंखला में कहीं भी ऐसी घटना न हो। हमारा आपदा प्रबंधन विभाग ऐसी स्थितियों से निपटने के लिए तैयार है।’’

उन्होंने कहा कि आपदा प्रभावित परिवारों और लोगों की मदद पर भी ध्यान केंद्रित करने की आवश्यकता है।

उन्होंने कहा कि भारत सरकार ने प्रभावित क्षेत्र को तुरंत सहायता प्रदान करना शुरू कर दिया है।

राज्यपाल ने कहा, ‘‘बड़े पैमाने पर तबाही हुई है और अगर इस तरह का विनाश जारी रहा, तो दुनिया को इसका समाधान तलाशने के बारे में गंभीरता से सोचना होगा।’’

उन्होंने कहा कि लोगों को आगे आकर राहत कार्यों में भाग लेना चाहिए, ताकि प्रभावित लोगों को अपना जीवन फिर से बसाने में मदद मिल सके।

हिमाचल प्रदेश के विश्वविद्यालयों को शामिल करते हुए एक ‘टास्क फोर्स’ के गठन पर गुप्ता ने कहा कि इस पहल का उद्देश्य राज्य के युवाओं को प्रधानमंत्री के ‘विकसित भारत’ के दृष्टिकोण में योगदान देने के लिए तैयार करना है।

उन्होंने कहा, ‘‘हिमाचल प्रदेश में लगभग 24 विश्वविद्यालय हैं और मैं इनमें से कुछ विश्वविद्यालयों का कुलाधिपति हूं। स्वाभाविक रूप से, हाल के दिनों में विकसित भारत के बारे में हो रही चर्चाओं के मद्देनजर, हम इस बात पर विचार कर रहे हैं कि हम अपने युवाओं को भविष्य के लिए कैसे तैयार कर सकते हैं।’’

उन्होंने कहा, ‘‘आज हमारे सामने सबसे बड़े मुद्दों में से एक रोजगार है। हमने इस बात पर चर्चा की कि आजीविका के क्या अवसर पैदा किए जा सकते हैं और हम स्थानीय उत्पादों को कैसे आय का जरिया बना सकते हैं।’’

उन्होंने कहा कि हिमाचल प्रदेश में वानिकी, कृषि और बागवानी जैसे क्षेत्रों में अपार संभावनाएं हैं, जबकि राज्य में चिकित्सा और तकनीकी विश्वविद्यालय भी मौजूद हैं।

प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के स्वतंत्रता दिवस के भाषण, जेन-जी के उनके संदर्भ और छात्रों के लिए मुफ्त कोचिंग जैसी पहलों पर गुप्ता ने कहा कि विश्वविद्यालयों से पहले ही एक रूपरेखा तैयार करने को कहा जा चुका है।

राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (आरएसएस) के प्रमुख मोहन भागवत की अमेरिका यात्रा और अंतरराष्ट्रीय धार्मिक स्वतंत्रता पर अमेरिकी आयोग द्वारा व्यक्त किए गए विरोध से जुड़े विवाद पर गुप्ता ने संगठन का बचाव किया।

उन्होंने कहा कि अपने देश के बारे में बात करने में कुछ भी गलत नहीं है।

उन्होंने कहा, ‘‘राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ एक ऐसा संगठन है, जो राष्ट्रवाद पर केंद्रित होकर काम करता है। अपने देश के बारे में बात करने में कुछ भी गलत नहीं है।’’

भाषा खारी सुरेश

सुरेश