पत्थर की खदानों और आवासीय क्षेत्रों में कम से कम 200 मीटर की दूरी हो: एनजीटी

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पत्थर की खदानों और आवासीय क्षेत्रों में कम से कम 200 मीटर की दूरी हो: एनजीटी

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  • Publish Date - September 16, 2020 / 11:10 AM IST,
    Updated On - November 29, 2022 / 08:39 PM IST

नयी दिल्ली, 16 सितंबर (भाषा) राष्ट्रीय हरित अधिकरण (एनजीटी) ने बुधवार को कहा कि देशभर में पत्थर की खदानों और आवासीय अथवा सार्वजनिक ढांचों के बीच कम से कम 200 मीटर की दूरी बनाकर रखी जानी चाहिए।

एनजीटी के अध्यक्ष न्यायमूर्ति आदर्श कुमार गोयल ने कहा कि जिन पत्थर की खदानों में खनन विस्फोट के जरिए नहीं होने हैं, उनके बीच की और उनके तथा आवासीय/सार्वजनिक इमारतों के बीच की दूरी कम से कम 100 मीटर होनी चाहिए।

केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड (सीपीसीबी) की ओर से पेश रिपोर्ट पर गौर करते हुए अधिकरण ने यह आदेश पारित किया। उसने कहा कि खदान सुरक्षा निदेशालय के खतरनाक क्षेत्र से संबंधित नियम (500 मीटर) का भी कड़ाई से पालन होना चाहिए और पर्यावरण पर पड़ने वाले प्रभाव को कम से कम करने के लिए आवश्यक कदम उठाने चाहिए।

अधिकरण ने सीपीसीबी को निर्देश के अनुपालन पर निगरानी रखने का निर्देश दिया और कहा कि इस मानदंड का पूरे देश में पालन किया जाए।

एनजीटी केरल की निवासी उषा ए. की याचिका पर सुनवाई कर रहा था। याचिका में आरोप लगाया गया है कि कुरुपुजा के वाझाप्पारा नानीयोडे पंचायत में अवैध खनन किया जा रहा है।

सीपीसीबी की सिफारिश के मुताबिक जिन खदानों में विस्फोट नहीं किए जाने हैं, उनकी आवासीय, सार्वजनिक इमारतों, रहवासी क्षेत्रों, संरक्षित स्मारकों, सार्वजनिक सड़कों, रेलवे लाइनों, पुलों, बांधों, जलाशयों, नदियों, झीलों आदि से कम से कम 100 मीटर की दूरी होनी चाहिए।

जहां पर खनन के लिए विस्फोट होने हैं, सीपीसीबी के मुताबिक उनके लिए न्यूनतम 200 मीटर की दूरी का पालन करना चाहिए।

भाषा मानसी नरेश

नरेश