त्यौहारों से पहले ‘चीनी घोटाला’ मोदी सरकार का नया ‘मास्टर स्ट्रोक’ : कांग्रेस

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त्यौहारों से पहले ‘चीनी घोटाला’ मोदी सरकार का नया ‘मास्टर स्ट्रोक’ : कांग्रेस

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  • Publish Date - August 27, 2026 / 02:41 PM IST,
    Updated On - August 27, 2026 / 02:41 PM IST

नयी दिल्ली, 27 अगस्त (भाषा) कांग्रेस ने त्योहारों से पहले चीनी की कीमत में ‘‘बढ़ोतरी’’ को लेकर बृहस्पतिवार को नरेन्द्र मोदी सरकार पर निशाना साधा और आरोप लगाया कि सरकार की नीतियों के कारण आम लोगों पर महंगाई का बोझ बढ़ रहा है।

पार्टी महासचिव रणदीप सुरजेवाला ने संवाददाताओं से कहा कि चीनी की कीमत करीब 45 रुपये प्रति किलोग्राम से बढ़कर अगस्त में 70-75 रुपये प्रति किलोग्राम तक पहुंच गई है।

उन्होंने दावा किया कि इससे त्योहारों के चार महीनों में देश के उपभोक्ताओं पर करीब 36,000 करोड़ रुपये का अतिरिक्त बोझ पड़ सकता है।

कांग्रेस नेता ने इसे ‘‘चीनी घोटाला’’ करार दिया और आरोप लगाया कि इसका फायदा जमाखोरों और कालाबाजारियों को हो रहा है।

उन्होंने सरकार की नीतियों पर तंज कसते हुए कहा कि ‘‘जनता को खुलेआम मुनाफाखोरों और कालाबाजारियों से लुटवाने का मोदी सरकार का यह नया मास्टर स्ट्रोक है। 12 साल से मोदी सरकार ऐसे ही मास्टर स्ट्रोक लगा रही है और महंगाई के जरिये आम जनता की मुश्किलें बढ़ाई जा रही हैं।’’

सुरजेवाला के अनुसार, 2025-26 सत्र की शुरुआत में चीनी का भंडार करीब 50 लाख टन था, जबकि पिछले सत्र में यह 80 लाख टन था।

उन्होंने ‘इंडियन शुगर मिल्स एसोसिएशन के 30 अप्रैल, 2026 के आंकड़ों का हवाला देते हुए दावा किया कि इस सत्र में चीनी उत्पादन करीब 275 लाख टन रहा, जबकि सरकार की ओर से पहले 343 लाख टन उत्पादन का अनुमान बताया गया था।

सुरजेवाला ने कहा कि अगस्त से नवंबर के बीच त्योहारों के कारण चीनी की मासिक खपत औसतन 24 लाख टन से बढ़कर करीब 30 लाख टन हो जाती है।

उन्होंने आरोप लगाया कि सरकार ने 20 अगस्त को 10 लाख टन कच्ची चीनी के शुल्क-मुक्त आयात का फैसला किया, लेकिन विदेश से चीनी आने और उसके परिष्करण में समय लगने के कारण इसका लाभ त्योहारों के मौसम में उपभोक्ताओं को नहीं मिलेगा।

उन्होंने एथेनॉल नीति को भी चीनी की कीमतों में बढ़ोतरी का एक कारण बताया।

सुरजेवाला ने दावा किया कि नवंबर 2025 से जुलाई 2026 के बीच एथेनॉल उत्पादन में गन्ने और उससे जुड़े उत्पादों का बड़े पैमाने पर इस्तेमाल हुआ, जिससे घरेलू बाजार में चीनी की उपलब्धता प्रभावित हुई।

कांग्रेस महासचिव ने 2017 में राशन की दुकानों के जरिए रियायती दर पर चीनी देने की योजना बंद किए जाने का भी मुद्दा उठाया और कहा कि इससे करोड़ों परिवारों को सस्ती चीनी मिलने की सुविधा समाप्त हो गई।

भाषा हक हक मनीषा

मनीषा