सुप्रीम कोर्ट ने हिमाचल के सरकारी वकील से कहा- राज्य सरकार का चम्मच न बनें

Ads

सुप्रीम कोर्ट ने हिमाचल के सरकारी वकील से कहा- राज्य सरकार का चम्मच न बनें

  •  
  • Publish Date - August 9, 2018 / 12:17 PM IST,
    Updated On - November 29, 2022 / 08:07 PM IST

नई दिल्ली। सुप्रीम कोर्ट ने गुरुवार को हिमाचल प्रदेश के कसौली में होटल व रिसॉर्ट मालिकों के अतिक्रमण संबंधी सुनवाई के दौरान राज्य सरकार की ओर से वकील से कहा कि वह सरकार का चम्मचन बनें।  सरकार की ओर से पेश वकील अभिनव मुखर्जी ने कहा कि सुप्रीम कोर्ट के एक जज की पत्नी ने इसी तरह की जनहित याचिका हाईकोर्ट में दायर की है। इसलिए सुप्रीम कोर्ट को इस मसले पर सुनवाई नहीं करनी चाहिए।

इस पर न्यायमूर्ति मदन बी लोकुर की अध्यक्षता वाली तीन सदस्यीय पीठ ने राज्य सरकार के वकील मुखर्जी से कहा कि, ‘निहित स्वार्थ केलिए प्रवक्ता न बने। आप वकील होने के साथ-साथ कोर्ट के ऑफिसर भी हैं। राज्य सरकार का चम्मचन बनें आप’।

यह भी पढ़ें : केंद्रीय मंत्रिमंडल ने तीन तलाक बिल में संशोधनों को दी मंजूरी, अब ये प्रावधान

इससे पहले मुखर्जी ने अपने तर्क पेश करते हुए कहा कि न्यायमूर्ति दीपक गुप्ता की पत्नी ने इससे संबंधित जनहित याचिका हिमाचल प्रदेश हाईकोर्ट में दायर की है। इसलिए पीठ को इस याचिका पर सुनवाई नहीं करनी चाहिए। मुखर्जी ने ये तर्क सुनवाई कर रही जिस पीठ के लिए सामने दिया उसमें न्यायमूर्ति दीपक गुप्ता भी शामिल हैं।

वकील के ऐसे तर्क दिए जाने पर पीठ ने वकील से कहा, ‘क्या आपने वह जनहित याचिका पढ़ी है’। पीठ ने कहा कि वह जनहित याचिका वन भूमि पर अतिक्रमण से जुड़ा है। पीठ ने हिमाचल सरकार को कसौली में होटल व रिसॉर्ट मालिकों के किए गए अतिक्रमण को ढहाने संबंधित निर्देशों पर दो महीने में स्टेटस रिपोर्ट मांगी है।

वेब डेस्क, IBC24