उच्चतम न्यायालय ने पीएमएलए के तहत गिरफ्तारी के कारणों से जुड़े मुद्दे पर चर्चा की

उच्चतम न्यायालय ने पीएमएलए के तहत गिरफ्तारी के कारणों से जुड़े मुद्दे पर चर्चा की

उच्चतम न्यायालय ने पीएमएलए के तहत गिरफ्तारी के कारणों से जुड़े मुद्दे पर चर्चा की
Modified Date: November 29, 2022 / 08:25 pm IST
Published Date: February 2, 2022 8:17 pm IST

नयी दिल्ली, दो फरवरी (भाषा) धन शोधन रोकथाम अधिनियम (पीएमएलए) के कुछ प्रावधानों की व्याख्या से जुड़ी याचिकाओं की सुनवाई कर रहे उच्चतम न्यायालय ने धन शोधन-रोधी कानून के तहत गिरफ्तारी के कारणों से जुड़े विषय पर बुधवार को चर्चा की।

न्यायमूर्ति ए. एम. खानविलकर, न्यायमूर्ति दिनेश माहेश्वरी और न्यायमूर्ति सी.टी. रविकुमार की तीन सदस्यीय पीठ ने कहा कि उसके समक्ष यह दलील दी गई कि शीर्ष न्यायालय को पीएमएलए के प्रावधानों की व्याख्या करनी होगी ताकि इसे संविधान के अनुच्छेद 21 के अनुकूल बनाया जा सके।

अनुच्छेद 21 जीवन और व्यक्तिगत स्वतंत्रता का संरक्षण करता है।

पीठ ने कहा, ‘‘मौजूदा अधिनियम के तहत हमे बताए कि इसका हल कैसे हो सकता है। किस तरह से एक सौहार्द्रपूर्ण व्यवस्था दी जाए कि यह सुनिश्चित हो सके कि आप अपनी गिरफ्तारी के कारण के बारे में जरूरी सूचना प्राप्त करें ताकि आप प्रभावी रूप से खुद का बचाव कर सकें। ’’

पीठ ने विषय में कुछ याचिकाकर्ताओं की ओर से दलील पेश कर रहे वरिष्ठ अधिवक्ता सिद्धार्थ लूथरा से कहा कि उसे इस बात पर ध्यान देना होगा कि जब किसी व्यक्ति को अधिनियम के तहत कथित अपराध के लिए गिरफ्तार किया जाए तो उसके क्या सूचना दी जानी चाहिए।

न्यायालय ने कहा, ‘‘जब आप गिरफ्तार किये जाएंगे, क्या सूचना आपको मुहैया की जानी चाहिए, उस पर हमे अवश्य ध्यान देना चाहिए। इसके साथ ही, जिस अदालत में आपको पेश किया जा रहा है, उस बारे में भी। हमें उन प्रावधानों पर अब ध्यान केंद्रित करने की जरूरत है।’’

विषय में कुछ याचिकाकर्ताओं की ओर से पेश हुए वरिष्ठ अधिवक्ता कपिल सिब्बल ने गिरफ्तारी की शक्ति से संबद्ध पीएमएलए की धारा 19 का जिक्र किया।

उन्होंने कहा कि किसी व्यक्ति को जिस कारण गिरफ्तार किया जाता है यदि उस बारे में उसे नहीं बताया गया तो वह जमानत के लिए अदालत कैसे जा सकता/सकती है।

सिब्बल ने कहा, ‘‘मैं अदालत जाकर कैसे जमानत का अनुरोध करूंगा? मेरे पास ईसीआईआर (प्रवर्तन मामला सूचना रिपोर्ट) नहीं है। ’’ उन्होंने कहा कि एक प्रक्रिया होनी चाहिए जिसके जरिए व्यक्ति को सूचित किया जाए कि वह राहत पाने का अनुरोध कर सकता है।

उन्होंने कहा कि न्यायालय को समस्या के हल के लिए कुछ तरीका निकालना चाहिए।

इस मामले में बहस बृहस्पतिवार को भी जारी रहेगी।

भाषा

सुभाष अनूप

अनूप


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