नयी दिल्ली, 24 जनवरी (भाषा) उच्चतम न्यायालय ने नामांकित छात्रों की संख्या के आधार पर शिक्षक पद स्वीकृत करने के मानदंडों में संशोधन करने संबंधी मार्च 2024 के सरकारी आदेश को चुनौती देने वाली याचिका पर सुनवाई करते हुए महाराष्ट्र सरकार को नोटिस जारी किया है।
न्यायमूर्ति पीएस नरसिम्हा और न्यायमूर्ति आलोक आराधे की पीठ ने सिंधुदुर्ग जिला शिक्षण संस्था चालक मंडल की याचिका पर राज्य सरकार, शिक्षा आयुक्त और अन्य को नोटिस जारी किये। याचिका में दावा किया गया है कि सरकारी आदेश (जीआर) विद्यार्थी-शिक्षक अनुपात के संबंध में शिक्षा का अधिकार अधिनियम, 2009 की नीति और योजना के विपरीत है।
राज्य सरकार द्वारा 15 मार्च, 2024 को जारी सरकारी आदेश (जीआर) के जरिये प्राथमिक, उच्च प्राथमिक और माध्यमिक विद्यालयों में छात्रों की संख्या के आधार पर शिक्षकों के पदों को स्वीकृत करने के मानदंडों को संशोधित किया गया।
अधिवक्ता अजित प्रवीण वाघ के जरिये दाखिल याचिका में कहा गया है, ‘‘उक्त सरकारी आदेश का परिणाम यह है कि जिन विद्यालयों में छात्रों की संख्या एक निश्चित संख्या से अधिक नहीं है, वहां कई कक्षाओं के लिए केवल एक स्वीकृत शिक्षक होंगे।’’
याचिका में दावा किया गया है, ‘‘आरटीई अधिनियम, 2009 के विपरीत, दिनांक 15.03.2024 के इस सरकारी आदेश में विद्यार्थी-शिक्षक अनुपात आंकने के लिए कक्षा को इकाई के रूप में नहीं माना गया है, बल्कि एक अनुभाग यानी प्राथमिक, उच्च प्राथमिक और माध्यमिक को इकाई के रूप में माना गया है।’’
याचिका में कहा गया है कि इसके परिणामस्वरूप, कम छात्रों वाले कई स्कूल/पड़ोस के स्कूल बंद हो जाएंगे, जिससे आरटीई अधिनियम 2009 का उद्देश्य विफल हो जाएगा।
भाषा धीरज सुरेश
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