नयी दिल्ली, छह मई (भाषा) उच्चतम न्यायालय ने जम्मू और कश्मीर एवं लद्दाख उच्च न्यायालय के पूर्व कार्यवाहक मुख्य न्यायाधीश विजय कुमार झांजी को श्रद्धांजलि अर्पित करने के लिए बुधवार को एक विशेष बैठक आयोजित की।
न्यायमूर्ति झांजी का इस वर्ष 23 फरवरी को निधन हो गया था।
भारत के प्रधान न्यायाधीश सूर्यकांत ने न्यायमूर्ति झांजी के बारे में कहा कि उन्होंने हमेशा इस सिद्धांत का पालन किया कि संस्थाएं व्यक्तियों से ऊपर होनी चाहिए।
उच्चतम न्यायालय ने दिवंगत वरिष्ठ अधिवक्ताओं एडीएन राव, मुकुल गुप्ता और एस बालकृष्णन को भी श्रद्धांजलि अर्पित की।
अटॉर्नी जनरल आर वेंकटरमणी और सुप्रीम कोर्ट बार एसोसिएशन के अध्यक्ष विकास सिंह ने भी श्रद्धांजलि अर्पित की।
झांजी अपने उस अहम फैसले के लिए जाने जाते हैं जिसमें कहा गया था कि ‘‘जम्मू और कश्मीर राज्य के स्थायी निवासी की बेटी का विवाह किसी ऐसे व्यक्ति से होने पर, जो जम्मू और कश्मीर राज्य का स्थायी निवासी नहीं है, उसका जम्मू और कश्मीर राज्य के स्थायी निवासी का दर्जा नहीं जाएगा।’’
उच्चतम न्यायालय के बार एसोसिएशन के अनुसार वरिष्ठ अधिवक्ता एडीएन राव ने पर्यावरण से संबंधित कई जनहित याचिकाओं के निपटारे में उच्चतम न्यायालय के लिए न्याय मित्र की भूमिका निभाई। उनका 25 फरवरी को निधन हो गया था।
राव को 2021 में उच्चतम न्यायालय ने वरिष्ठ अधिवक्ता के रूप में नामित किया था। उन्होंने बार में तीन दशक से अधिक समय तक वकालत की और उन्हें पर्यावरण से जुड़ी जनहित याचिकाओं, विशेष रूप से 1980 के दशक में प्रख्यात पर्यावरणविद् एम सी मेहता द्वारा दायर की गई याचिकाओं से निपटने में शीर्ष न्यायालय की सहायता के लिए जाना जाता है।
राव के बेटे अन्नाम वेंकटेश, उच्चतम न्यायालय में अधिवक्ता हैं।
वरिष्ठ अधिवक्ता मुकुल गुप्ता का सात अप्रैल को निधन हो गया था।
भाषा शोभना मनीषा
मनीषा