नयी दिल्ली, छह अप्रैल (भाषा) उच्चतम न्यायालय ने डेढ़ साल के एक बच्चे का ऑपरेशन करने वाले एक चिकित्सक के खिलाफ आपराधिक कार्यवाही सोमवार को रद्द करते हुए कहा कि मामले को जारी रखना न्यायालय की प्रक्रिया का दुरुपयोग होगा।
न्यायमूर्ति पी एस नरसिम्हा और न्यायमूर्ति मनोज मिश्रा की पीठ ने कहा कि आपराधिक कानून ने चिकित्सकीय पेशेवरों को हमेशा आम व्यक्तियों से अलग स्थान दिया है।
पीठ ने कहा, ‘‘इस मामले में चिकित्सक के खिलाफ किसी दुर्भावना का आरोप नहीं है और इस बात को लेकर कोई विवाद नहीं है कि चिकित्सकीय प्रक्रिया करने के लिए सहमति पत्र पर हस्ताक्षर किए गए थे। इसके अलावा, चिकित्सकीय राय यह है कि चिकित्सक ने जो तरीका अपनाया, वह ऐसी चिकित्सकीय आपात स्थिति से निपटने के लिए मान्य विकल्पों में से एक है।’’
शीर्ष अदालत ने कहा कि याचिकाकर्ता के खिलाफ आपराधिक कार्यवाही जारी रखना अदालत की प्रक्रिया का दुरुपयोग होगा और इसलिए न्याय के उद्देश्य को पूरा करने के लिए इसे रद्द किया जाना चाहिए।
मामले के अनुसार, बच्चे के पिता ने शिकायत दर्ज कराई थी कि चिकित्सक ने उसके बेटे की ‘आर्किडेक्टोमी’ (अंडकोष निकालने के लिए ऑपरेशन) प्रक्रिया के लिए उनसे अनुमति नहीं ली थी।
भाषा सिम्मी माधव
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