उच्चतम न्यायालय ने पैतृक संपत्ति हड़पने के मामले में हिमाचल प्रदेश उच्च न्यायालय के आदेश को रद्द किया

उच्चतम न्यायालय ने पैतृक संपत्ति हड़पने के मामले में हिमाचल प्रदेश उच्च न्यायालय के आदेश को रद्द किया

उच्चतम न्यायालय ने पैतृक संपत्ति हड़पने के मामले में हिमाचल प्रदेश उच्च न्यायालय के आदेश को रद्द किया
Modified Date: March 18, 2026 / 09:17 pm IST
Published Date: March 18, 2026 9:17 pm IST

नयी दिल्ली, 18 मार्च (भाषा) उच्चतम न्यायालय ने हिमाचल प्रदेश उच्च न्यायालय के उस आदेश को रद्द कर दिया है जिसमें शिमला जिले में करोड़ों रुपये की पैतृक संपत्ति हड़पने के लिए धोखाधड़ी, जालसाजी और आपराधिक साजिश के आरोप से जुड़ी प्राथमिकी को खारिज कर दिया गया था।

न्यायमूर्ति विक्रम नाथ और न्यायमूर्ति संदीप मेहता की पीठ ने बुधवार को सुनाए गए एक फैसले में, कथित तौर पर भूमि हड़पने से जुड़े मामले में प्राथमिकी को रद्द करने के खिलाफ शिकायतकर्ता शार्ला बजलील और हिमाचल प्रदेश सरकार द्वारा दायर अलग-अलग अपीलों को स्वीकार कर लिया।

उच्च न्यायालय के फैसले को रद्द करते हुए, उच्चतम न्यायालय ने कहा, ‘‘हम पाते हैं कि उच्च न्यायालय ने अपनी अंतर्निहित शक्तियों का इस्तेमाल करते हुए हस्तक्षेप किया और प्राथमिकी को शुरुआती चरण में ही रद्द कर दिया, जबकि जांच तेजी से जारी थी और महत्वपूर्ण सामग्री अभी एकत्र की जानी बाकी थी।’’

फैसला लिखते हुए न्यायमूर्ति मेहता ने उच्च न्यायालय द्वारा प्राथमिकी को रद्द करने को ‘‘पूरी तरह से अनुचित’’ बताया और कहा कि प्राथमिकी में जालसाजी के आरोप स्पष्ट रूप से बताए गए थे और जांच एजेंसी ने 11 विवादित दस्तावेजों की हस्तलेख विशेषज्ञ से जांच कराने की प्रक्रिया भी पूरी कर ली थी।

उच्चतम न्यायालय ने कहा, ‘‘हमारा दृढ़ मत है कि उच्च न्यायालय ने अपीलकर्ता-शिकायतकर्ता द्वारा दर्ज की गई प्राथमिकी से संबंधित कार्यवाही को समय से पहले ही रद्द कर दिया और समाप्त कर दिया, जबकि उसमें धोखाधड़ी, दस्तावेजों की जालसाजी और आपराधिक विश्वासघात के अपराधों को साबित करने वाले स्पष्ट आरोप थे…।’’

इसने जांच अधिकारी को निर्देश दिया कि वह जल्द से जल्द जांच पूरी करे और संबंधित निचली अदालत में आरोप-पत्र दाखिल करे।

पीठ ने कहा, ‘‘हालांकि, हम यह स्पष्ट करते हैं कि की गई टिप्पणियां … केवल वर्तमान अपील के निर्णय तक ही सीमित हैं और मामले के उचित चरण में पक्षकारों को उपलब्ध अधिकारों और बचावों पर इनका कोई प्रभाव नहीं पड़ेगा।’’

यह मामला उन आरोपों से संबंधित है कि बलदेव ठाकुर, दलजीत सिंह और जियनपुरी कामसुओन ने दस्तावेजों में हेराफेरी करके और धन का दुरुपयोग करके शिकायतकर्ता के पिता, दिवंगत जी बी बजलील की पैतृक संपत्ति और परिसंपत्तियों पर धोखाधड़ी से कब्जा करने की साजिश रची।

शिमला में राज्य सीआईडी ​​द्वारा अगस्त 2022 में दर्ज प्राथमिकी के अनुसार, आरोपियों ने कथित तौर पर शिकायतकर्ता के पिता की पत्नी की मृत्यु के बाद उनकी बिगड़ती मानसिक और शारीरिक स्वास्थ्य स्थिति का फायदा उठाया।

शिकायतकर्ता ने आरोप लगाया है कि आरोपियों ने उसे बहला-फुसलाकर पारिवारिक संपत्ति और बैंक निधि को अपने लाभ के लिए हस्तांतरित करवा लिया।

प्राथमिकी में यह भी आरोप लगाया गया था कि बजलील के बैंक खातों से लगभग 1.18 करोड़ रुपये की राशि बिना किसी कानूनी लेन-देन के सिंह को हस्तांतरित की गई थी।

इसके अलावा, आरोप है कि परिवार की लगभग 49 बीघा जमीन 2017 में ठाकुर को पंजीकृत बिक्री विलेख के माध्यम से 3.9 करोड़ रुपये में बेची गई थी, जो कि प्रचलित सर्किल दर से काफी कम कीमत पर थी।

भाषा देवेंद्र रंजन

रंजन


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