न्यायालय ने तेजाब हमला पीड़ितों के लिए रियायती रेल टिकट संबंधी याचिका पर केंद्र से राय मांगी

न्यायालय ने तेजाब हमला पीड़ितों के लिए रियायती रेल टिकट संबंधी याचिका पर केंद्र से राय मांगी

न्यायालय ने तेजाब हमला पीड़ितों के लिए रियायती रेल टिकट संबंधी याचिका पर केंद्र से राय मांगी
Modified Date: July 16, 2026 / 05:02 pm IST
Published Date: July 16, 2026 5:02 pm IST

नयी दिल्ली, 16 जुलाई (भाषा) उच्चतम न्यायालय ने बृहस्पतिवार को केंद्र सरकार से उस याचिका पर राय मांगी, जिसमें तेजाब हमला पीड़ितों को वातानुकूलित श्रेणी में रेल किराए में रियायत दिए जाने का आग्रह किया गया है ताकि वे समय-समय पर इलाज के लिए शहरों के बेहतर सुविधाओं वाले अस्पतालों तक यात्रा कर सकें।

प्रधान न्यायाधीश सूर्यकांत, न्यायमूर्ति जॉयमाल्या बागची और न्यायमूर्ति वी. मोहना की पीठ ने अतिरिक्त सॉलिसिटर जनरल अर्चना पाठक दवे से कहा कि वे इस मामले पर रेल मंत्रालय से जरूरी निर्देश लें।

शुरुआत में, दवे ने कहा कि दिव्यांग लोगों की 21 श्रेणियां हैं और रेलवे उन्हें पहले से ही यात्रा में छूट दे रहा है। उन्होंने कहा कि रेलवे दिव्यांग लोगों की सभी श्रेणियों के लिए आपातकालीन यात्रा कोटा देने पर भी विचार कर रहा है।

तेजाब हमला पीड़ितों के लिए ‘रिजर्वेशन’ का अनुरोध करने वाली जनहित याचिकाकर्ता संस्था ‘अति जीवन सोसाइटी’ की ओर से पेश वकील ने कहा कि ऐसे पीड़ितों को इलाज के लिए लगभग चार से पांच साल तक सुपर-स्पेशलिटी अस्पतालों के कई चक्कर लगाने पड़ते हैं।

उन्होंने कहा कि जिन व्यक्तियों को जबरन तेजाब पिलाया गया होता है, उन्हें रेलवे आरक्षण प्राप्त करने के लिए चिकित्सीय प्रमाणपत्र बनवाने में काफी दिक्कतों का सामना करना पड़ता है।

दवे ने कहा कि इसके अलावा, रिजर्वेशन के लिए उन्हें इलाज करने वाले अस्पतालों से ऐसे प्रमाणपत्र लेने के लिए कहा जाता है, जो मुश्किल काम है।

पीठ ने विधि अधिकारी से कहा कि वह देखें कि क्या तेजाब हमला पीड़ितों को थैलेसीमिया और कैंसर जैसे मरीजों की श्रेणी में शामिल किया जा सकता है ताकि इलाज के लिए रेल टिकट में उन्हें भी छूट मिल सके।

पीठ ने विधि अधिकारी से निर्देश लेने को कहा और याचिका को विचार के लिए सूचीबद्ध कर दिया।

इससे पहले, पीठ ने तेजाब हमला पीड़ितों के लिए अलग आरक्षण कोटा और रियायती रेल किराए का अनुरोध करने वाली जनहित याचिकर पर केंद्र को नोटिस जारी किया था।

याचिका में कहा गया, ‘‘जलने से उत्पन्न घावों और लगातार खुजली की समस्या के कारण, तथा खासकर सर्जरी के बाद, तेजाब हमले से बचे लोगों को अक्सर ट्रेन के वातानुकूलित कोच में सफर करने की जरूरत पड़ती है। हालाँकि, वे बार-बार सफ़र के लिए एसी टिकट का ज़्यादा खर्च नहीं उठा सकते और मौजूदा नियमों की वजह से, न तो वे दिव्यांगों के लिए तय कोटे का फ़ायदा उठा सकते हैं और न ही उन्हें रेलवे किराए में छूट की सुविधा मिलती है।’’

इसमें कहा गया कि उनके पुनर्वास के लिए कई बार सर्जरी, आंखों के इलाज की आधुनिक प्रक्रियाओं और सर्जरी के बाद लंबे समय तक देखभाल जैसी सुविधाओं आवश्यकता होती है, जो दिल्ली, चेन्नई और हैदराबाद जैसे बड़े शहरों के कुछ चुनिंदा बड़े अस्पतालों में ही उपलब्ध हैं।

याचिका में अनुरोध किया गया कि तेजाब हमले से बचे लोगों को दिव्यांगजन श्रेणी में शामिल किया जाए, ताकि उन्हें रेल किराए में छूट मिल सके।

भाषा नेत्रपाल नरेश

नरेश


लेखक के बारे में