नयी दिल्ली, 10 अगस्त (भाषा) उच्चतम न्यायालय ने मादक पदार्थों की तस्करी के खिलाफ लड़ाई को मजबूत करने के लिए निर्देश देने के अनुरोध संबंधी एक याचिका पर सोमवार को केंद्र और अन्य से जवाब मांगा।
याचिका में, मादक पदार्थों से जुड़े मामलों की तय समय-सीमा में जांच और मुकदमे की सुनवाई, तस्करों की संपत्ति जब्त करने और समान जांच प्रोटोकॉल बनाने जैसी मांगें शामिल हैं।
प्रधान न्यायाधीश सूर्यकांत और न्यायूर्ति जॉयमाल्या बागची एवं न्यायमूर्ति वी. मोहना की पीठ ने इस समस्या को ‘‘बहुत गंभीर’’ बताते हुए कहा कि इससे निपटने के लिए विशेष एजेंसियों के समन्वित प्रयासों की जरूरत है।
याचिका दायर करने वाले वकील अश्विनी कुमार उपाध्याय ने पीठ को बताया कि इसी तरह का एक मामला पहले से ही उच्चतम न्यायालय में लंबित है।
पीठ ने कहा कि यह समस्या बहुत गंभीर है और विशिष्ट एजेंसियों को इसका कोई न कोई समाधान निकालना होगा।
उपाध्याय ने कहा कि सिंगापुर समेत कुछ देशों ने मादक पदार्थों की तस्करी की समस्या से निपटने के लिए कई ठोस कदम उठाए हैं।
वकील अश्विनी कुमार दुबे के जरिए दायर याचिका में केंद्र और राज्य सरकारों से स्वापक औषधि एवं मन:प्रभावी पदार्थ (एनडीपीएस) अधिनियम के तहत मामलों में फॉरेंसिक रिपोर्ट जमा करने के लिए अनिवार्य समय-सीमा तय करने का निर्देश देने का अनुरोध किया गया है।
याचिका में, मादक पदार्थों की तलाशी, जब्ती और नमूना एकत्र करने के लिए मानक संचालन प्रक्रिया (एसओपी) तैयार करने के वास्ते निर्देश देने का भी अनुरोध किया गया है।
इसमें केंद्र से ऐसे मामलों में समय-सीमा के भीतर जांच और मुकदमे की तेजी से सुनवाई के लिए एसओपी तैयार करने का निर्देश देने का अनुरोध किया गया है।
याचिका में शीर्ष अदालत से अनुरोध किया गया है कि देश में सक्रिय मादक पदार्थ माफिया नेटवर्क के खतरे को देखते हुए, वह इस संबंध में कोई आदेश या निर्देश जारी करे।
याचिका में कहा गया है कि 2025 में मादक पदार्थ से जुड़े मामलों में 53 प्रतिशत की बढ़ोतरी हुई और साल भर में 1,240 टन नशीले पदार्थ जब्त किए गए, जो इस समस्या के बढ़ते दायरे को दिखाता है।
इसमें पंजाब और अन्य राज्यों की घटनाओं का जिक्र करते हुए यह दलील दी गई कि मादक पदार्थ की लत परिवारों को बर्बाद कर रही है और इससे जन-स्वास्थ्य तथा कानून-व्यवस्था पर भी असर पड़ रहा है।
भाषा सुभाष दिलीप
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