उच्चतम न्यायालय ने राज्यों, केंद्रशासित प्रदेशों से अतिक्रमण-मुक्त फुटपाथ पर मांगा जवाब
उच्चतम न्यायालय ने राज्यों, केंद्रशासित प्रदेशों से अतिक्रमण-मुक्त फुटपाथ पर मांगा जवाब
नयी दिल्ली, 24 अगस्त (भाषा) उच्चतम न्यायालय ने फुटपाथ के अस्तित्व को मानव जीवन का अभिन्न हिस्सा बताते हुए सोमवार को सभी राज्यों एवं केंद्रशासित प्रदेशों को पैदल यात्रियों के लिए उचित रूप से सीमांकित, अतिक्रमण-मुक्त स्थान सुनिश्चित करने संबंधी उसके आदेशों के क्रियान्वयन पर जवाब देने का निर्देश दिया।
न्यायमूर्ति पी. एस. नरसिम्हा और न्यायमूर्ति आलोक अराधे की पीठ ने जहां भी सड़क है, वहां उचित रूप से सीमांकित फुटपाथ सुनिश्चित करने से संबंधित स्वत: संज्ञान मामले में सभी राज्यों और केंद्रशासित प्रदेशों को पक्षकार बनाया।
पीठ ने केंद्र की ओर से पेश अतिरिक्त सॉलिसिटर जनरल (एएसजी) के. एम. नटराज से कहा, ‘‘पहला कदम पैदल यात्रियों के लिए जगह का उचित सीमांकन है। पैदल चलने में सुरक्षा का भरोसा होना चाहिए। जहां भी सड़क है, लोगों को सीमांकित जगह पर चलना चाहिए।’’
एएसजी ने पीठ के संज्ञान में लाया कि सड़कें राज्य का विषय हैं। उन्होंने बताया कि सड़क परिवहन एवं राजमार्ग मंत्रालय तथा आवास एवं शहरी मामलों के मंत्रालय ने अदालत के निर्देशों के अनुपालन में पैदल यात्रियों के लिए उचित रूप से सीमांकित जगह बनाने के संबंध में सभी राज्यों एवं केंद्रशासित प्रदेशों तथा भारतीय राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण को परामर्श जारी किए हैं।
पीठ ने राज्यों और केंद्रशासित प्रदेशों से इन मंत्रालयों द्वारा जारी परामर्श पर जवाब देने को कहा। साथ ही पीठ ने कहा, ‘‘फुटपाथ का अस्तित्व मानव जीवन का अभिन्न हिस्सा है।’’
गत तीन अगस्त को पीठ ने केंद्र को यह सुनिश्चित करने का निर्देश दिया था कि प्रत्येक सड़क पर पैदल यात्रियों के लिए उचित रूप से सीमांकित जगह हो। उसने केंद्र से संबंधित अधिकारियों को यह सुनिश्चित करने का निर्देश देने को कहा था कि पैदल चलने के लिए निर्धारित जगह पर अतिक्रमण ना हो और उसे मोटर वाहनों के लिए निर्धारित लेन से उचित रूप से अलग रखा जाए।
शीर्ष अदालत ने इस बात पर जोर दिया था कि पैदल यात्रियों को यह भरोसा होना चाहिए कि निर्धारित जगह उनके लिए है और वे चलते वाहनों से किसी खतरे के बिना स्वतंत्र रूप से चल सकते हैं।
गत 19 जून को एक महत्वपूर्ण फैसले में शीर्ष अदालत ने कहा था कि सीमांकित फुटपाथ पर चलने का अधिकार मौलिक अधिकार है अदालत ने कहा था कि सीमांकित मार्गों पर यह अधिकार मोटर वाहनों की आवाजाही पर प्राथमिकता रखेगा तथा यह संविधान के अनुच्छेद 19(1)(डी) के तहत प्रदत्त आवागमन के अधिकार और अनुच्छेद 21 (जीवन एवं व्यक्तिगत स्वतंत्रता का अधिकार) सहित अन्य मौलिक अधिकारों का हिस्सा है।
शीर्ष अदालत ने कहा था कि सीमांकित फुटपाथ पर चलने का नागरिक का मौलिक अधिकार प्राथमिक है और इसे मोटर वाहनों की आवाजाही पर वरीयता मिलेगी।
शीर्ष अदालत का यह फैसला एक दुर्भाग्यपूर्ण सड़क दुर्घटना मुआवजा मामले में आया था, जिसमें एक पिता ने अपने पांच वर्षीय बेटे को स्कूल ले जाते समय खो दिया था।
भाषा
अमित मनीषा
मनीषा

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