न्यायालय ने टीवीके विधायक को विश्वास मत में भाग लेने से रोकने के उच्च न्यायालय के आदेश पर रोक लगायी

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न्यायालय ने टीवीके विधायक को विश्वास मत में भाग लेने से रोकने के उच्च न्यायालय के आदेश पर रोक लगायी

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  • Publish Date - May 13, 2026 / 12:31 PM IST,
    Updated On - May 13, 2026 / 12:31 PM IST

नयी दिल्ली, 13 मई (भाषा) उच्चतम न्यायालय ने बुधवार को मद्रास उच्च न्यायालय के उस आदेश पर रोक लगा दी, जिसमें टीवीके विधायक आर. श्रीनिवास सेतुपति को तमिलनाडु विधानसभा में विश्वास मत में भाग लेने से रोका गया था।

मामले की सुनवाई करते हुए न्यायमूर्ति विक्रम नाथ, न्यायमूर्ति संदीप मेहता और न्यायमूर्ति विजय बिश्नोई की पीठ ने कहा, ‘‘कम से कम इतना तो कहा ही जा सकता है कि यह बेहद गंभीर है। उच्च न्यायालय कहता है कि इसका उपाय चुनाव याचिका है, लेकिन फिर भी अनुच्छेद 226 के तहत दायर याचिका पर सुनवाई कर रहा है।’’

संविधान का अनुच्छेद 226 उच्च न्यायालयों को कुछ प्रकार की रिट जारी करने की शक्ति से संबंधित है।

रिट जारी करने का मतलब उच्चतम न्यायालय या उच्च न्यायालय द्वारा किसी व्यक्ति, अधिकारी या संस्था को लिखित औपचारिक आदेश देना है। यह आदेश संवैधानिक अधिकारों (मौलिक अधिकारों) के उल्लंघन को रोकने या उन्हें लागू करने के लिए जारी किया जाता है।

पीठ ने इस मामले में उच्च न्यायालय में लंबित कार्यवाही पर भी रोक लगा दी।

सेतुपति ने शिवगंगई जिले की तिरुपत्तूर विधानसभा सीट संख्या-185 से द्रविड़ मुनेत्र कषगम (द्रमुक) नेता और पूर्व मंत्री के. आर. पेरियाकरुप्पन को केवल एक वोट से हराकर जीत हासिल की थी।

उच्चतम न्यायालय ने सेतुपति की याचिका पर पेरियाकरुप्पन और अन्य प्रतिवादियों को जवाबी हलफनामा दाखिल करने के लिए दो सप्ताह का समय दिया।

सेतुपति ने उच्च न्यायालय के अंतरिम आदेश को चुनौती दी है, जिसमें उन्हें अगले आदेश तक किसी भी विश्वास मत या सदन की संख्याबल की परीक्षा से जुड़ी किसी भी कार्यवाही में मतदान करने या भाग लेने से रोका गया था।

सी. जोसेफ विजय के नेतृत्व वाली तमिलगा वेत्री कषगम (टीवीके) सरकार ने बुधवार को विश्वास मत जीत लिया।

भाषा गोला मनीषा

मनीषा