Reported By: Avinash Pathak
,Raigarh IPL Betting Case/Image Credit: IBC24
Raigarh IPL Betting Case: रायगढ़ पुलिस ने जिले में ऑनलाइन क्रिकेट सट्टे पर कार्रवाई करते हुए एक बड़े सिंडिकेट का खुलासा किया है। पुलिस ने मामले में तीन आरोपियों को गिरफ्तार किया है। आरोपियों के पास से एक करोड़ 3 लाख 86 हजार 300 रुपए, नोट गिनने की मशीन और चार मोबाइल फोन बरामद किए गए हैं। पुलिस जांच में खुलासा हुआ है कि आरोपी आईपीएल सट्टे से कमाई गई ब्लैक मनी को हवाला नेटवर्क के जरिए व्हाइट करते थे। साइबर सेल, कोतवाली और घरघोड़ा पुलिस ने ये संयुक्त कार्रवाई की है।
पकड़े गए आरोपियों (Raigarh IPL Betting Case) में सट्टा का बड़ा खाईवाल करन चौधरी, पुष्कर अग्रवाल और सुनील अग्रवाल शामिल है। दरअसल पुलिस ने 26 अप्रैल को रायगढ़ और घरघोड़ा क्षेत्र में ऑनलाइन आईपीएल सट्टा नेटवर्क पर बड़ी कार्रवाई करते हुए छह आरोपियों को गिरफ्तार किया था। आरोपियों के पास से मोबाइल फोन, डिजिटल ट्रांजेक्शन रिकॉर्ड और नगदी बरामद हुई थी। पूछताछ में आरोपियों ने रायगढ़ के खाईवाल करन चौधरी और जसमीत सिंह बग्गा उर्फ गुड्डा सरदार के इशारे पर पूरे नेटवर्क के संचालन की जानकारी दी थी।
सूचना पर पुलिस ने (Raigarh IPL Betting Case) टेक्निकल इनपुट, कॉल डिटेल, चैट रिकॉर्ड और फाइनेंशियल एनालिसिस के जरिए पूरे नेटवर्क की जांच शुरू की। जांच में सामने आया कि करन चौधरी रायगढ़, सक्ती, रायपुर, बिलासपुर से लेकर दिल्ली तक फैले नेटवर्क के जरिए ऑनलाइन क्रिकेट सट्टा संचालित कर रहा था। पुलिस जांच में यह भी सामने आई कि सट्टे से प्राप्त रकम को सीधे अपने पास रखने के बजाय पेट्रोल पंप, मेडिकल स्टोर और अन्य कारोबारी चैनलों के माध्यम से कैश डंप किया जाता था, जिसे बाद में हवाला नेटवर्क के जरिए आगे ट्रांसफर किया जाता था।
करन चौधरी से मिली जानकारी के आधार पर पुलिस (Raigarh IPL Betting Case) ने कृष्ण प्राइड टावर स्थित फ्लैट में छापा मारा, जहां से सुनील अग्रवाल के कब्जे से 50 लाख रुपये नकद, नोट गिनने की मशीन और मोबाइल फोन बरामद किए गए। वहीं पुष्कर अग्रवाल के पास से 52 लाख 60 हजार रुपये नकद और दो मोबाइल फोन जब्त किए गए। इलेक्ट्रॉनिक डेटा, यूपीआई ट्रांजेक्शन और चैट रिकॉर्ड की जांच से से यह बात सामने आई कि आरोपी सिंडिकेट के रूप में काम कर रहे थे और सट्टे की रकम को हवाला के लिए यूज किया जाता था। पुलिस ने आरोपियों पर जुआ प्रतिषेध अधिनियम के साथ बीएनएस की धारा 111 के तहत भी कार्रवाई की है।