चेन्नई, 13 मई (भाषा) देसिया मुरपोक्कू द्रविड़ कषगम (डीएमडीके) की महासचिव और विधायक प्रेमलता विजयकांत ने बुधवार को तमिलगा वेत्री कषगम (टीवीके) नीत सरकार पर निशाना साधते हुए विधायकों की कथित खरीद-फरोख्त को राज्य के लिए बेहद शर्मनाक करार दिया।
मुख्य विपक्षी दल द्रमुक मुनेत्र कषगम (द्रमुक) के विधायकों के साथ-साथ प्रेमलता ने भी विश्वास मत के दौरान सदन से बहिर्गमन किया था।
प्रेमलता ने ‘सरकारी विशेष अधिकारी’ (रिकी राधान पंडित वेट्ट्रीवेल) की नियुक्ति की भी आलोचना की और उन्हें ‘राजगुरु’ (शाही सलाहकार) करार दिया। उन्होंने सवाल किया, ‘‘अगर वह आपके राजगुरु हैं, तो आपको उन्हें व्यक्तिगत रूप से अपने पास रखना चाहिए। लेकिन उन्हें उच्च सरकारी पद पर नियुक्त कर … आप युवाओं के लिए क्या उदाहरण पेश कर रहे हैं?’’
मुख्यमंत्री सी जोसेफ विजय ने सत्ता में आने पर सरकार में ‘अनुकरणीय’ पारदर्शिता होने का वादा किया था। प्रेमलता ने विजय के वादे पर सवाल उठाते हुए मुख्यमंत्री आवास में वाहनों में चेहरे ढक कर गए व्यक्तियों की खबरों पर स्थिति स्पष्ट करने की मांग की।
डीएमडीके महासचिव ने कहा, ‘‘मुख्यमंत्री ने कहा कि यहां किसी को भी मास्क पहनने की जरूरत नहीं है और वह एक पारदर्शी प्रशासन प्रदान करेंगे। ऐसे में, मैं अनुरोध करती हूं कि उन लोगों की जानकारी दी जाए जो उस दिन मुख्यमंत्री से मिलने के लिए वाहन में अपने चेहरे ढक कर गए थे।’’
प्रेमलता ने कहा कि ‘सेक्युलर प्रोग्रेसिव अलायंस’ ने राष्ट्रपति शासन लागू होने से बचने या फिर से चुनाव का सामना करने से बचने के लिए बिना शर्त समर्थन दिया था। उन्होंने लेकिन जोर देकर कहा कि टीटीवी दिनाकरन जैसे नेताओं को ‘खरीद-फरोख्त’ के संबंध में हाल ही में पार्टी से निकाले गए सदस्यों के बारे में स्पष्टीकरण देना चाहिए।
पट्टाली मक्कल काची (पीएमके) सदस्य सौम्या अंबुमणि ने सरकार के 700 से अधिक शराब की दुकानों को बंद करने के फैसले की सराहना करते हुए पूर्ण शराबबंदी की आवश्यकता पर बल दिया।
उन्होंने कहा, ‘‘यह न केवल मेरी इच्छा है बल्कि तमिलनाडु की सभी महिलाओं की इच्छा है कि जब मेरे पोते-पोती बड़े हों तब तक तमिलनाडु नशामुक्त और शराबमुक्त हो जाए।’’
भाषा धीरज मनीषा
मनीषा