नयी दिल्ली, 30 जनवरी (भाषा) ऑल इंडिया मुस्लिम पर्सनल लॉ बोर्ड ने असम के मुख्यमंत्री हिमंत विश्व शर्मा की ‘मियां’ वाली टिप्पणी को ‘मुस्लिम विरोधी’ और ‘असंवैधानिक करार देते हुए शुक्रवार को कहा कि उच्चतम न्यायालय को इस मामले का स्वत: संज्ञान लेना चाहिए।
शर्मा हाल ही में एक बयान में कहा था कि राज्य में मतदाता सूची के विशेष पुनरीक्षण के दौरान ‘मियां’ समुदाय के लोगों को ‘परेशान’ किया जा रहा है, क्योंकि उन्हें असम में मतदान करने की अनुमति नहीं दी जा सकती।
शर्मा ने बांग्लाभाषी मुसलमानों के लिए ‘मियां’ शब्द का इस्तेमाल किया था।
मुस्लिम पर्सनल लॉ बोर्ड के प्रवक्ता सैयद कासिम रसूल इलियास ने एक बयान में कहा कि शर्मा का बयान मुस्लिम-विरोधी और अत्यंत विभाजनकारी है, जिसका उच्चतम न्यायालय को स्वतः संज्ञान लेना चाहिए।
इलियास ने दावा किया, ‘‘मुसलमानों के खिलाफ नफरत भरी भाषा और खुला उकसावा अब सत्तारूढ़ दल के राजनीतिक विमर्श में सामान्य होता जा रहा है। अब सर्वोच्च संवैधानिक पदों पर बैठे लोगों द्वारा इस तरह की बातें दोहराई जा रही हैं। उत्तराखंड, उत्तर प्रदेश और अब असम के मुख्यमंत्री लगातार मुसलमानों को निशाना बनाते हुए भड़काऊ और असंवैधानिक बयान दे रहे हैं।’’
उन्होंने कहा कि शर्मा का बयान अस्वीकार्य हैं क्योंकि मुख्यमंत्री के रूप में उन्होंने संविधान की रक्षा की शपथ ली है और वह खुलेआम किसी विशेष समुदाय के खिलाफ भेदभाव, उत्पीड़न और मताधिकार से वंचित करने की वकालत करते दिखाई रहे रहे हैं।
इलियास का कहना है कि बोर्ड राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू से भी असम के मुख्यमंत्री के इन खतरनाक और असंवैधानिक बयानों पर उचित संवैधानिक कार्रवाई करने का आग्रह करता है।
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