महिला सशक्तीकरण की दिशा में मील का पत्थर साबित होगा उच्चतम न्यायालय का फैसला : अशोक गहलोत

Ads

महिला सशक्तीकरण की दिशा में मील का पत्थर साबित होगा उच्चतम न्यायालय का फैसला : अशोक गहलोत

  •  
  • Publish Date - January 30, 2026 / 07:00 PM IST,
    Updated On - January 30, 2026 / 07:00 PM IST

जयपुर, 30 जनवरी (भाषा) राजस्थान के पूर्व मुख्यमंत्री अशोक गहलोत ने मासिक धर्म स्वास्थ्य को लेकर उच्चतम न्यायालय के फैसले का स्वागत करते हुए शुक्रवार को कहा कि यह महिला सशक्तीकरण की दिशा में मील का पत्थर साबित होगा।

गहलोत ने कहा, ”माननीय उच्चतम न्यायालय द्वारा मासिक धर्म स्वास्थ्य को ‘मौलिक अधिकार’ घोषित करने एवं स्कूलों में निशुल्क सैनिटरी पैड वितरण के आदेश का स्वागत करता हूं।”

उच्चतम न्यायालय ने मासिक धर्म स्वास्थ्य को संविधान के तहत जीवन के अधिकार का हिस्सा बताते हुए शुक्रवार को सभी राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों को निर्देश दिया कि वे छात्राओं को बिना किसी शुल्क के जैविक रूप से अपघटनीय सैनिटरी पैड उपलब्ध कराएं तथा लड़के-लड़कियों के लिए अलग-अलग शौचालय सुनिश्चित करें।

पूर्व मुख्यमंत्री ने कहा, ”हमें गर्व है कि हमारी पूर्ववर्ती कांग्रेस सरकार ने प्रदेश की बेटियों के स्वास्थ्य और गरिमा को प्राथमिकता देते हुए ‘उड़ान योजना’ शुरू की थी। इस योजना के तहत राजस्थान देश का पहला ऐसा राज्य बना जिसने हर पात्र महिला और छात्रा को निशुल्क सैनिटरी नैपकिन उपलब्ध कराने का ऐतिहासिक कदम उठाया।”

उन्होंने कहा, ” आज उच्चतम न्यायालय का यह फैसला हमारी उसी सोच और दृष्टिकोण की जीत है। महिला सशक्तीकरण की दिशा में यह निर्णय मील का पत्थर साबित होगा।”

गहलोत ने कहा, ” मुझे आशा है कि केंद्र सरकार भी राजस्थान की तर्ज पर पूरे देश में सिर्फ बालिकाओं ही नहीं सभी महिलाओं को सैनिटरी नैपकिन उपलब्ध करवाने की योजना लागू करेगी।”

भाषा

पृथ्वी रवि कांत