Gujarat High Court Husband Wife Divorce/Image Source: Generated by AI
अहमदाबाद: Gujarat High Court: गुजरात हाईकोर्ट ने एक अहम फैसले में कहा है कि किसी व्यक्ति की निजी स्वतंत्रता में लगातार हस्तक्षेप करना और उसे मानसिक तनाव देना मानसिक क्रूरता की श्रेणी में आता है। इसी टिप्पणी के साथ हाईकोर्ट ने एक दंपती के तलाक को मंजूरी दे दी।
Gujarat High Court: मामला गुजरात के एक दंपती से जुड़ा है जहां पत्नी द्वारा घर में प्याज और लहसुन के इस्तेमाल पर पूर्ण प्रतिबंध लगाने और अपनी धार्मिक मान्यताओं को पति पर थोपने के कारण वैवाहिक संबंध टूट गए। पति ने कोर्ट में बताया कि पत्नी ने शर्त रखी थी कि घर में कभी भी प्याज और लहसुन नहीं पकाया जाएगा। इसके साथ-साथ वह उसे भी अपनी धार्मिक प्रथाओं के अनुसार जीवन जीने के लिए मजबूर करने लगी।
पति का कहना था कि शुरुआत में यह विवाद केवल भोजन तक सीमित था, लेकिन धीरे-धीरे इसका असर उसके सामाजिक जीवन और मानसिक शांति पर पड़ने लगा। पत्नी के व्यवहार के कारण वह न तो समाज में घुल-मिल पा रहा था और न ही सामान्य जीवन जी पा रहा था, जिससे वह मानसिक तनाव का शिकार हो गया।
Gujarat High Court: निचली अदालत ने पति की दलीलों को स्वीकार करते हुए पत्नी के व्यवहार को क्रूरता मानते हुए तलाक मंजूर कर दिया था। इसके बाद पत्नी ने इस फैसले को गुजरात हाईकोर्ट में चुनौती दी। मामले की सुनवाई करते हुए हाईकोर्ट ने पत्नी के अत्यधिक हठधर्मी और कट्टर रवैये की कड़ी आलोचना की। कोर्ट ने स्पष्ट शब्दों में कहा कि किसी व्यक्ति की निजी स्वतंत्रता में लगातार हस्तक्षेप करना और मानसिक तनाव देना मानसिक क्रूरता के अंतर्गत आता है।