आर्थिक तंगी से जूझ रहे सुरेंद्र कोली ने हरिद्वार में शुरू की थी चाय की दुकान

आर्थिक तंगी से जूझ रहे सुरेंद्र कोली ने हरिद्वार में शुरू की थी चाय की दुकान

आर्थिक तंगी से जूझ रहे सुरेंद्र कोली ने हरिद्वार में शुरू की थी चाय की दुकान
Modified Date: September 22, 2026 / 10:27 pm IST
Published Date: September 22, 2026 10:27 pm IST

देहरादून, 22 सितंबर (भाषा) नोएडा के निठारी कांड के सभी मामलों में पिछले साल अदालत से बरी हुए सुरेंद्र कोली ने मौत से महज तीन-चार दिन पहले हरिद्वार में किराये की एक छोटी सी दुकान में चाय बेचने का काम शुरू किया था।

पुलिस के अनुसार, आर्थिक तंगी और मानसिक तनाव से जूझ रहे कोली ने यह दुकान शुरू करने के लिए भी किसी से 5,000 रुपये उधार लिए थे।

हरिद्वार के सप्तऋषि क्षेत्र में स्थित इसी दुकान में कोली 18 सितंबर को संदिग्ध परिस्थितियों में मृत मिला था। पुलिस के अनुसार, प्रथमदृष्टया यह फांसी लगाकर आत्महत्या करने का मामला प्रतीत हो रहा है। पुलिस का कहना है कि कोली की मौत आत्महत्या थी या इसके पीछे कोई अन्य कारण था, यह पोस्टमार्टम रिपोर्ट आने के बाद ही स्पष्ट हो सकेगा।

जांच में शामिल पुलिस के एक अधिकारी ने बताया कि कोली की मौत को लेकर उसके परिवार के कुछ सदस्यों ने सवाल उठाए हैं। पुलिस को उम्मीद है कि पोस्टमार्टम रिपोर्ट एक-दो दिन में मिल जाएगी।

पुलिस अधिकारी ने कहा, ‘कोली के परिवार के सदस्यों ने उसकी मौत को लेकर कुछ सवाल उठाए हैं। लेकिन एक-दो दिन में पोस्टमार्टम रिपोर्ट आने के बाद स्थिति स्पष्ट हो जाएगी।’

पुलिस अधिकारी के अनुसार, कोली के शरीर पर चोट के कोई निशान नहीं मिले हैं। हालांकि, उसकी नाक और मुंह के पास खून के निशान दिखाई दिए थे।

उन्होंने कहा, ‘उसके शरीर पर चोट का कोई निशान नहीं था।’

पुलिस ने घटनास्थल और आसपास लगे सीसीटीवी की फुटेज भी खंगाली है, लेकिन अब तक कोई संदिग्ध गतिविधि सामने नहीं आई है।

अधिकारी ने बताया कि कोली बेहद कठिन परिस्थितियों में रह रहा था और कम समय में ही हरिद्वार में उसे चार कमरे बदलने पड़े थे।

उन्होंने कहा कि वह अपनी पहचान छिपाकर रह रहा था और आधार कार्ड तथा पुलिस सत्यापन नहीं कराने के कारण उसे बार-बार नौकरी छोड़नी पड़ी।

पुलिस के अनुसार, कोली करीब एक महीने पहले हरिद्वार आया था। ऐसी जानकारी मिली है कि हरिद्वार आने से पहले वह बेंगलुरु में कुछ वकीलों के साथ और एक चर्च में भी रह चुका था।

अधिकारी ने यह भी दावा किया कि परिवार के जिन सदस्यों ने अब उसकी मौत को लेकर सवाल उठाए हैं, उन्होंने पहले कोली को अपने साथ रखने से इनकार कर दिया था।

भाषा

दीप्ति रवि कांत


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