लुक्सर जेल में सुरेंद्र कोली का व्यवहार सामान्य था: जेल अधीक्षक

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लुक्सर जेल में सुरेंद्र कोली का व्यवहार सामान्य था: जेल अधीक्षक

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  • Publish Date - September 19, 2026 / 08:48 PM IST,
    Updated On - September 19, 2026 / 08:48 PM IST

नोएडा (उप्र), 19 सितंबर (भाषा) निठारी हत्याकांड के मुख्य आरोपी सुरेंद्र कोली का लुक्सर जेल में व्यवहार सामान्य था, जहां वह 14 महीने तक रहा। जेल अधीक्षक ने शनिवार को यह जानकारी दी।

कोली को पिछले साल जेल से रिहा होने से पहले सभी 13 मामलों में बरी कर दिया गया था।

लुक्सर जेल के अधीक्षक ब्रजेश सिंह ने ‘पीटीआई-भाषा’ को बताया कि कोली सितंबर 2024 से 11 नवंबर 2025 तक ग्रेटर नोएडा जेल में रहा और उच्चतम न्यायालय के आदेश के बाद उसे रिहा कर दिया गया।

सिंह ने कहा, ‘‘जेल में रहने के दौरान उसका व्यवहार सामान्य था। हमें उसके व्यवहार में कोई गड़बड़ नहीं लगी।’’

इससे पहले, कोली ने अपनी कैद का अधिकांश समय पास के गाजियाबाद की डासना जेल में बिताया था। उसे कुछ समय के लिए मेरठ की जेल भी ले जाया गया था, लेकिन फिर वापस डासना और बाद में लुक्सर जेल भेज दिया गया।

कोली शुक्रवार को उत्तराखंड के हरिद्वार में चाय की दुकान पर फंदे से लटका पाया गया। वह 2006 में सामने आए सनसनीखेज निठारी हत्याकांड का मुख्य आरोपी था।

यह मामला तब प्रकाश में आया था जब नोएडा के सेक्टर 31 में व्यवसायी मोनिंदर सिंह पंढेर के बंगले के पास बच्चों और महिलाओं के कंकाल, खोपड़ियां और हड्डियां मिली थीं।

कोली की मौत से जुड़े हालात ने निठारी कांड के एक पीड़ित परिवार के मन में सवाल खड़े कर दिए हैं। निठारी कांड में अपनी 15 साल की बेटी को खोने वाले झब्बूलाल ने आरोप लगाया कि कोली ने आत्महत्या नहीं की, बल्कि उसकी हत्या की गई है।

झब्बूलाल ने कहा, ‘‘कोली की हत्या हुई है, उसने आत्महत्या नहीं की। अगर उसने जेल में आत्महत्या की होती, तो समझा जा सकता था कि वह अवसाद में था। लेकिन जेल से रिहा होने और महीनों बाहर रहने के बाद उसके आत्महत्या करने को लेकर सवाल उठते हैं।’’

उन्होंने आरोप लगाया, ‘‘शायद वह कोई अहम जानकारी उजागर करने वाला था और इसीलिए उसकी हत्या कर दी गई।’’

झब्बूलाल ने यह भी दावा किया कि निठारी हत्याकांड में मुख्य दोषी कोली नहीं, बल्कि पंढेर था, उसे फांसी पर लटकाया जाना चाहिए।

उन्होंने साथ ही परिवार की कानूनी लड़ाई जारी रखने के लिए सरकार से मदद की अपील की।

झब्बूलाल की पत्नी सुनीता देवी ने अपने पति की बात दोहराते हुए कोली की मौत की जांच की मांग की। उन्होंने कहा, ‘‘सुरेंद्र कोली को मारा गया है। वह चाय की दुकान करता था और पैसे कमाता होगा। उसकी हत्या की गई होगी और इसकी जांच होनी चाहिए।’’

अपनी बेटी के लिए 20 साल से न्याय की मांग कर रहा यह दंपति काम की तलाश में करीब चार दशक पहले उत्तर प्रदेश के उन्नाव ज़िले से निठारी आया था।

पंढेर के बंगले और उसके आस-पास कंकाल मिलने के बाद 2006 में कोली को गिरफ़्तार किया गया था। बाद में उसे कई मामलों में दोषी ठहराया गया, लेकिन निठारी से जुड़े सभी 13 मामलों में उसे बरी कर दिया गया।

नवंबर 2025 में उच्चतम न्यायालय ने आखिरी लंबित मामले में उसकी याचिका मंजूर कर ली थी।

कोली 11 नवंबर, 2025 को अपने वकीलों के साथ लुक्सर जेल से बाहर निकला था। उस समय उसने वहां इंतजार कर रहे पत्रकारों से कोई बात नहीं की थी और यह भी नहीं बताया था कि वह कहां रहेगा।

भाषा नेत्रपाल संतोष

संतोष