लोकसभा के आठ विपक्षी सदस्यों का निलंबन तत्काल प्रभाव से रद्द
लोकसभा के आठ विपक्षी सदस्यों का निलंबन तत्काल प्रभाव से रद्द
नयी दिल्ली, 17 मार्च (भाषा) लोकसभा ने मंगलवार को उन आठ विपक्षी सदस्यों का निलंबन तत्काल प्रभाव से रद्द कर दिया जिन्हें संसद के वर्तमान बजट सत्र के पहले चरण में सदन की अवमानना के मामले में निलंबित किया गया था।
इसके साथ ही, सदन में इस बात पर जोर दिया गया कि सदन के सुचारू रूप से संचालन के लिए सदस्यों के लिए ‘लक्ष्मण रेखा’ होना जरूरी है।
सदन में कांग्रेस के मुख्य सचेतक कोडिकुनिल सुरेश ने आसन से निलंबन रद्द करने का अनुरोध किया और विपक्षी सदस्यों के आचरण पर खेद भी जताया।
संसदीय कार्य मंत्री किरेन रीजीजू ने निलंबन खत्म करने का प्रस्ताव सदन में रखा जिसे सदन ने ध्वनिमत से मंजूरी दी।
कांग्रेस नेता सुरेश ने आठ विपक्षी सदस्यों का निलंबन खत्म करने का आग्रह करते हुए कहा, ‘‘हम आसन के साथ सहयोग के लिए तैयार हैं…सत्तापक्ष की तरह हमें भी बराबर का मौका मिलना चाहिए।’’
समाजवादी पार्टी के सांसद धर्मेंद्र यादव ने कहा, ‘‘सारे सदस्यों की जिम्मेदारी बनती है कि सदन की मर्यादा का पालन करते हुए सदन को चलाएं…सत्तापक्ष के लोग संकल्प लें तभी सदन सुचारू तरीके से चलेगा।’’
उनका यह भी कहना था कि सदन के सुचारू संचालन के लिए ‘‘भाजपा सांसद निशिकांत दुबे को अपना आचरण सुधारना होगा’’।
इस पर निशिकांत दुबे ने आपत्ति जताई और कहा, ‘‘मैंने जीवन में कभी लोकतंत्र और संसद की मर्यादा का उल्लंघन नहीं किया है।’’
राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी (शप) की सांसद सुप्रिया सुले ने कहा, ‘‘देश में एक संदेश जाना चाहिए कि हम एक-दूसरे का सम्मान करते हुए सदन चला रहे हैं और हम सब देश की सेवा के लिए यहां आए हैं।’’
जनता दल (यू) के नेता और केंद्रीय मंत्री राजीव रंजन सिंह उर्फ ललन सिंह ने कहा कि ताली दोनों हाथ से बजती है तथा ऐसे में विपक्ष को भी लोकतांत्रिक परंपरा का पालन करना चाहिए।
लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला ने सोमवार को सभी दलों के नेताओं की एक बैठक बुलाई थी, जिसमें आठ विपक्षी सदस्यों का निलंबन वापस लेने पर सहमति बनी थी।
संसदीय कार्य मंत्री किरेन रीजीजू ने कहा, ‘‘कल की बातचीत में काफी स्पष्टता
आई थी और कुछ बातों पर हम सब मिलकर सहमत हुए थे..यह सदन सर्वोपरि है। सदन का निर्णय सब पर लागू होता है।’’
उनका कहना था, ‘‘हमने (भाजपा) पहले भी नियम नहीं तोड़े हैं और आगे भी नहीं तोड़ेंगे।’’
रीजीजू ने कहा कि सोमवार की बैठक में कुछ ‘लक्ष्मण रेखा’ खींचने की बात हुई थी।
उन्होंने कहा, ‘‘कोई नहीं चाहेगा कि सदस्य निलंबित होकर बाहर रहे। यहां जनता ने (सांसदों को) कागज फाड़कर फेंकने, मेजों पर चढ़ने और मारपीट के लिए नहीं भेजा है।’’
लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला ने कहा कि सभी दलों को सदन की गरिमा, प्रतिष्ठा और गौरवशाली परंपरा बनाए रखने में सहयोग करना चाहिए।
उन्होंने लोकसभा के उस बुलेटिन का भी उल्लेख किया, जिसमें नियम 124 ए(2)(3) का हवाला दिया गया है, जो संसद परिसर के क्षेत्र और मार्ग को सांसदों के लिए खुला और निर्बाध बनाए रखने के लिहाज से कुछ गतिविधियों पर रोक लगाता है।
बुलेटिन में विशेष रूप से कहा गया है कि परिसर में हथियार, झंडे, पोस्टर, लाठी, भाला, तलवार, डंडे और ईंट आदि ले जाना निषिद्ध है। इसमें कहा गया, ‘‘सांसदों को बार-बार निर्देश दिया गया है कि वे पोस्टर, तख्तियां या बैनर न लाएं और न ही उन्हें प्रदर्शित करें।’’
इसके अलावा, बुलेटिन में कहा गया है कि कुछ मामलों में पोस्टर और तख्तियों पर एआई-जनित आपत्तिजनक चित्र, तस्वीरें और नारे प्रदर्शित किए गए हैं। सांसदों को एक बार फिर निर्देश दिया गया है कि वे दिशानिर्देश 124ए(2)(3) और अन्य प्रासंगिक नियमों का कड़ाई से पालन करें ताकि अनुशासनात्मक कार्रवाई से बच सकें।
बजट सत्र के पहले चरण के दौरान तीन फरवरी को आसन की ओर कागज फेंकने के बाद, सदन की अवमानना के मामले में विपक्ष के आठ सांसदों को बजट सत्र की शेष अवधि के लिए निलंबित कर दिया गया था।
निलंबित सांसदों में कांग्रेस के मणिकम टैगोर, अमरिंदर सिंह राजा वडिंग, गुरजीत सिंह औजला, हिबी ईडन, डीन कुरियाकोस, प्रशांत पडोले, किरण कुमार रेड्डी और मार्क्सवादी कम्युनिस्ट पार्टी (माकपा) के एस. वेंकटेशन शामिल हैं।
निलंबन के बाद से ये सांसद कार्यवाही वाले दिन संसद के मकर द्वार पर धरना दे रहे थे।
भाषा हक हक वैभव
वैभव

Facebook


