तमिल भाषा अपने दम पर सक्षम: उदयनिधि स्टालिन

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तमिल भाषा अपने दम पर सक्षम: उदयनिधि स्टालिन

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  • Publish Date - February 21, 2026 / 08:24 PM IST,
    Updated On - February 21, 2026 / 08:24 PM IST

चेन्नई, 21 फरवरी (भाषा) तमिलनाडु के उपमुख्यमंत्री उदयनिधि स्टालिन ने शनिवार को कहा कि तमिल भाषा में किसी अन्य भाषा के सहारे या प्रभाव के बिना स्वतंत्र रूप से कार्य करने की अनूठी क्षमता है।

ऐतिहासिक विक्टोरिया पब्लिक हॉल में ‘तमिल-इंडो-यूरोपीयन रूट वर्ड्स कमपैरेटिव डिक्शनरी’ के चौथे खंड के विमोचन पर उन्होंने राज्य की भाषाई नीति को लेकर उठ रहे सवालों का जवाब दिया।

उन्होंने कहा, “कई लोग संदेह से पूछते हैं कि जब अन्य राज्यों ने हिंदी स्वीकार कर ली है तो केवल तमिलनाडु ही इसका विरोध क्यों करता है। मेरा जवाब है कि तमिल भाषा में बिना किसी दूसरी भाषा के सहारे खुद काम करने की क्षमता है।”

उन्होंने इस बात को रेखांकित किया कि 1937-38 में पेरियार के नेतृत्व में हुए पहले भाषा आंदोलन के बाद 21 फरवरी 1940 को स्कूलों में अनिवार्य हिंदी को आधिकारिक रूप से रद्द किया गया था।

उन्होंने यह भी याद दिलाया कि एम. करुणानिधि ने 14 वर्ष की उम्र में उस आंदोलन में भाग लिया था।

राज्य की भाषाई विरासत पर बल देते हुए उन्होंने द्रविड़ मुनेत्र कषगम सरकार को दो-भाषा नीति लागू करने, तमिल को शास्त्रीय भाषा का दर्जा दिलाने और राज्य का नाम ‘तमिलनाडु’ रखने का श्रेय दिया।

यह नया खंड 12 खंडों की श्रृंखला का हिस्सा है, जिसमें तमिल मूल शब्दों की तुलना लातिन, यूनानी, जर्मन, फारसी और संस्कृत जैसी भारत-यूरोपीय भाषाओं से की गई है।

परियोजना के प्रधान संपादक के. अरसेन्द्रन हैं, जिन्हें राज्य का ‘देवनेय पवनार पुरस्कार’ मिल चुका है।

उदयनिधि ने कहा कि पहला खंड मार्च 2025 में मुख्यमंत्री एम. के. स्टालिन ने जारी किया था, जबकि दूसरा और तीसरा खंड पिछले महीने चेन्नई अंतरराष्ट्रीय पुस्तक मेले में जारी हुए।

उन्होंने कहा कि बाकी खंड भी जल्द प्रकाशित होंगे।

यह शब्दकोश परियोजना तमिलनाडु पाठ्यपुस्तक एवं शैक्षिक सेवा निगम और ऑक्सफोर्ड यूनिवर्सिटी प्रेस के सहयोग से तैयार की जा रही है, जिसका उद्देश्य तमिल और भारत-यूरोपीय भाषाओं के गहरे भाषाई संबंधों का अध्ययन करना है।

भाषा खारी माधव

माधव