Amit Shah on Naxalism: भूपेश से लेकर राहुल तक.. शाह के निशाने पर थे कांग्रेस के ये नेता, डेढ़ घंटे स्पीच में केंद्रीय गृह मंत्री ने बताई नक्सलवाद के खात्मे की पूरी कहानी, जानिए उनके भाषण की बड़ी बातें

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भूपेश से लेकर राहुल तक.. शाह के निशाने पर थे कांग्रेस के ये नेता, डेढ़ घंटे स्पीच में केंद्रीय गृह मंत्री ने बताई नक्सलवाद के खात्मे की पूरी कहानी, Home Minister Amit Shah Statement on Naxalism

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  • Publish Date - March 30, 2026 / 10:22 PM IST,
    Updated On - March 30, 2026 / 10:22 PM IST

Amit Shah on Naxalism in Parliament / Image Source : SCREENGRAB

नई दिल्लीः Amit Shah Statement on Naxalism लोकसभा में सोमवार को नियम 193 के तहत नक्सलवाद पर चर्चा हुई। इस चर्चा में गृह मंत्री अमित शाह ने हिस्सा लिया और कांग्रेस सहित अन्य विपक्षी दलों पर जमकर निशाना साधा। विपक्ष के नेता राहुल गांधी पर हमला बोलते हुए उन्होंने कहा कि राहुल गांधी अपने लंबे राजनीतिक करियर में कई बार नक्सलों और उनके हमदर्दों के साथ देखे गए। शाह ने कहा कि CPI(ML) ही आज के नक्सली हैं। इसका मकसद विकास नहीं है। इसकी विचारधारा दूसरे देश से प्रेरित हैं। इतना ही नहीं उन्होंने नक्सलवाद के खात्मे की रणनीति के साथ इस मोर्चे पर सफलता की पूरी कहानी बताई। चलिए जानते हैं अमित शाह के भाषण की बड़ी बातेंः-

Amit Shah Statement on Naxalism अपनी डेढ़ घंटे स्पीच के दौरान शाह ने कहा कि हमने 31 मार्च तक देश को नक्सल-मुक्त बनाने का लक्ष्य रखा था। मैं पूरी व्यवस्था होने के बाद देश को भी सूचित करूंगा। उन्होंने कहा कि हम कह सकते हैं कि भारत अब नक्सल मुक्त हो गया है। उन्होंने कहा कि 70 में से 60 साल कांग्रेस की सरकार रही। आपने क्यों नहीं किया विकास। आज आप हिसाब मांग रहे हो। इंदिरा गांधी माओवादी विचारधारा की गिरफ्त में थीं। उनके कार्यकाल में नक्सलवाड़ी से शुरू हुआ आंदोलन 12 राज्यों, 17 प्रतिशत भू-भाग 10 प्रतिशत से ज्यादा आबादी में फैल गया। राहुल गांधी ने नक्सल समर्थकों के साथ मंच साझा किया था और ‘प्रो-हिडमा’ नारे का समर्थन किया था।

तीन सालों में 706 नक्सली मारे गए

शाह ने कहा कि बस्तर से नक्सलवाद लगभग पूरी तरह खत्म हो चुका है। हर एक गांव में स्कूल खोलने के लिए अभियान चलाया गया। हर गांव में राशन की दुकान, हर तहसील और पंचायत में प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र (PHC) और सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र (CHC) स्थापित किए गए हैं। लोगों को आधार कार्ड और राशन कार्ड जारी किए गए हैं। उन्हें पांच किलोग्राम अनाज मिल रहा है। शाह ने बताया कि जनवरी 2024 में छत्तीसगढ़ में सरकार बदली। 24 अगस्त 2024 को मैंने कहा था कि 31 मार्च 2026 को नक्सलवाद देश से समाप्त हो जाएगा। 11 साल में 596 पुलिस स्टेशन बने, नक्सल प्रभावित जिले 2014 में 126 थे आज सिर्फ 2 है। ज्यादा प्रभावित जिले 35 थे आज शून्य हैं। नक्सल घटनाएं दर्ज करने वाले पुलिस स्टेशन 350 से 7 हो गए। पिछले तीन साल 2024-25 और 2026 में देश में 706 नक्सली मारे गए, 2218 गिरफ्तार और 4839 ने सरेंडर किया।

शाह बोले- भूपेश बघेल को पूछो प्रूफ दूं क्या

शाह ने कहा कि 20 अगस्त 2019, 24 अगस्त 2024 और 31 मार्च 2026, तीन तारीख बताना चाहता हूं। 20 अगस्त 2019 को गृह मंत्रालय में एक मीटिंग हुई। पूर्व नक्सलियों को खुफिया इनपुट में लेने का काम, ये सब उसी मीटिंग में डिजाइन किए गए। देर क्यों लगी, क्योंकि छत्तीसगढ़ में कांग्रेस की सरकार थी। छत्तीसगढ़ की कांग्रेस सरकार ने नक्सलवादियों को बचाकर रखा। इस पर विपक्ष ने हंगामा किया। शाह ने कहा- मुझे किसी व्यक्ति के सामने नहीं करना है। भूपेश बघेल को पूछो प्रूफ दूं क्या यहां पर। हां बोलें तो बोलो, वरना फंस जाओगे। 2023 में छत्तीसगढ़ में सरकार बदली और दूसरे ही महीने वहां गया था।

ये डरने वाली सरकार नहीं, न्याय करने वाली सरकार है

गृह मंत्री ने कहा कि अगर विकास, प्रति व्यक्ति आय पैमाना होता तो देश के बहुत सारे हिस्से थे जहां 70 के दशक में विकास नहीं पहुंचा था। वहां नक्सलवाद क्यों नहीं पहुंचा। कांग्रेस के इस विचार को सदन से खारिज करता हूं कि अन्याय किसी के साथ भी हो सकता है। विकास कम ज्यादा हो सकता है। हम संवैधानिक तरीके से लड़ाई लड़ेंगे या हाथ में हथियार लेकर निर्दोषों को मार डालेंगे। किस थ्योरी का यहां से समर्थन कर रहे हैं। शाह ने कहा कि किसी के भी साथ अन्याय हो तो हथियार हाथ में उठा लेना लोकतांत्रिक तरीका नहीं है। अगर आप धमकाना चाहते हैं तो ये डरने वाली सरकार नहीं है। सबके साथ न्याय करने वाली सरकार है। संविधान ने हर चीज की व्यवस्था की है। शाह ने आगे कहा- मैं इस देश को युवाओं को नक्सलवाद की टाइमलाइन बताना चाहता हूं। 1970 के दशक में नक्सलवाद की शुरुआत नक्सलवाड़ी, बंगाल से हुई। वहां 1971 में एक साल के दौरान 3620 हिंसा की घटनाएं वहां हुईं। 80 का दशक आते-आते पीपल्स वॉर ग्रुप बन गया और महाराष्ट्र, मध्य प्रदेश, छत्तीसगढ़, ओडिशा में फैले। अमित शाह ने कहा कि 1990 के दशक में दुनियाभर में जैसे वामपंथी विचारधारा सिमटती गई। यहां भी उग्रवादी गुटों और वामपंथियों पार्टियों में विलय हुआ और 2004 में 2 प्रमुख गुट मिल गए और सीपीआई माओवादी का गठन किया। 70 से 2004 तक चार साल छोड़कर पूरे साल कांग्रेस का शासन था। कब माओवादी विचारधारा फैली पनपी आपको याद रखना चाहिए।

‘नक्सलियों की तुलना भगत सिंह और बिरसा मुंडा से नहीं कर सकते’

शाह ने कहा कि नक्सलियों को लोकतंत्र पर कोई भरोसा नहीं है। यहां बहुत सारे लोग 3 घंटे से कह रहे हैं कि अन्याय है तो न्याय के खिलाफ लड़ रहे हैं लेकिन लड़ने का तरीका क्या है। हम अंग्रेजों के शासन में नहीं है। गृह मंत्री ने कहा कि कुछ लोगों ने भगत सिंह और भगवान बिरसा मुंडा से तुलना कर दी। ये क्या हिमाकत है। भगत सिंह और बिरसा मुंडा अंग्रेजों से लड़े और आप इनकी तुलना संविधान तोड़कर हथियार हाथ में लेकर निर्दोषों की हत्या करने वालों से कर रहे हैं। इनको अपनों का भी खून बहाने से परहेज नहीं है। शाह ने आगे कहा कि इनके आदर्श तिलका मांझी, बिरसा मुंडा, सुभाष बाबू या भगतसिंह नहीं हैं। इनके आदर्श माओवादी हैं। ये आदर्श भी फॉरेन से लाते हैं।

रेड कॉरिडोर में नक्सलवाद के चलते गरीबी आई

शाह ने आगे कहा कि नक्सलियों के आदर्श माओ है। आदिवासी माओ को अपना आदर्श मानने लगे। गरीबी के कारण नक्सलवाद नहीं फैला। रेड कॉरिडोर में नक्सलवाद के चलते गरीबी आई। आदिवासी पढ़ नहीं पाए इसलिए स्कूल जला दिए। शाह ने कहा कि मैं पूछना चाहता हूं कि 75 साल में 60 साल तो शासन आपने किया, आदिवासी अभी तक विकास से क्यों महरूम रहे? आदिवासियों का विकास तो अब मोदी जी कर रहे हैं। 60 साल कांग्रेस ने उन्हें घर नहीं दिया, पानी नहीं दिया, स्कूल नहीं बना, बैंक की फैसिलिटी नहीं पहुंचने दिया, इसलिए पहले थोड़ा अपनी गिरेबान में झांककर देखो कि दोषी कौन है।

कांग्रेस के शासन में माओवादी विचारधारा फैली

शाह ने कहा कि कांग्रेस के शासन में माओवादी विचारधारा फैली। इंदिरा गांधी के राजनीतिक स्वार्थ से नक्सल फैला। 1970 के दशक में नक्सलबाड़ी से नक्सलवाद की शुरुआत हुई। सलवा जुडूम की शुरुआत कांग्रेस नेता ने की। नक्सलियों ने कांग्रेस नेता कर्मा की हत्या की। शाह ने कहा कि 1970 से 2004 के बीच नक्सलवाद देश में फैला। समस्या का समाधान बातचीत से निकलता है, हथियार से नहीं। नक्सलियों के पास ज्यादातर हथियार पुलिस के लूटे हुए हैं। शाह ने कहा कि नक्सली हिंसा करने वालों के दिन अब समाप्त हो गए। मैं 50 बार कह चुका हूं कि नक्सली हथियार डाल दें, नहीं तो सरकार अब गोली का जवाब गोली से देगी। संविधान को कोई चुनौती नहीं दे सकता। बंदूक चलाने वालों से अब कोई बात नहीं। हथियार डालने वालों को सरकार मदद करेगी।

नक्सलियों से लड़ते हुए 5000 जवान शहीद

गृह मंत्री ने आगे कहा कि नक्सलियों से लड़ते हुए पांच हजार जवान शहीद हो गए। अर्बन नक्सली मानवता के साथ नहीं। मानवता के दोहरे चरित्र को स्वीकार नहीं करता। उन्होंने कहा कि राजनीतिक इच्छाशक्ति से नक्सलवाद खत्म किया। कुछ लोग चर्चा से नहीं बल से मानते हैं। मोदी सरकार ने नागरिकों की सुरक्षा सुनिश्चित की। 2014 में मोदी जी आए, 2026 में सबकी समाप्ति हो गई।

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