तमिलनाडु : टीवीके को सरकार गठन के लिए आमंत्रित करने में ‘देरी’ पर विशेषज्ञों की राय बंटी हुई

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तमिलनाडु : टीवीके को सरकार गठन के लिए आमंत्रित करने में ‘देरी’ पर विशेषज्ञों की राय बंटी हुई

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  • Publish Date - May 7, 2026 / 10:27 PM IST,
    Updated On - May 7, 2026 / 10:27 PM IST

नयी दिल्ली, सात मई (भाषा) तमिलनाडु में अभिनेता-नेता विजय के नेतृत्व वाली तमिलगा वेत्री कषगम (टीवीके) को सरकार गठन के लिए आमंत्रित किए जाने में कथित देरी पर संवैधानिक कानून विशेषज्ञों की राय बंटी हुई है।

कुछ विशेषज्ञों का कहना है कि राज्यपाल को यह जानने का अधिकार है कि प्रथम दृष्टया टीवीके के पास बहुमत है या नहीं। वहीं, कुछ अन्य विशेषज्ञों का कहना है कि राज्यपाल के पास विधानसभा चुनाव में सबसे बड़ी पार्टी बनकर उभरी टीवीके को सरकार गठन के लिए आमंत्रित करने के अलावा कोई विकल्प नहीं है।

टीवीके तमिलनाडु की 238 सदस्यीय विधानसभा के लिए हाल में संपन्न चुनावों में 108 सीट पर जीत के साथ सबसे बड़ी पार्टी बनकर उभरी है। पांच सीट जीतने वाली कांग्रेस ने भी टीवीके के समर्थन की घोषणा की है। हालांकि, पार्टी के पास अकेले दम पर सरकार बनाने के लिए पर्याप्त संख्या बल (118 सदस्यों का समर्थन) अभी भी नहीं है।

टीवीके प्रमुख विजय ने पिछले 24 घंटे में राज्यपाल राजेंद्र विश्वनाथ आर्लेकर से दो बार मुलाकात कर सरकार बनाने का निमंत्रण देने का अनुरोध किया है। हालांकि, टीवीके को अभी तक सरकार गठन का निमंत्रण नहीं दिया गया है।

संवैधानिक कानून विशेषज्ञ और वरिष्ठ अधिवक्ता राकेश द्विवेदी ने कहा, “राज्यपाल को यह जानने और टीवीके से प्रथम दृष्टया यह साबित करने के लिए कहने का अधिकार है कि उसके पास बहुमत है या नहीं, फिर चाहे वह बाहरी समर्थन से हो या सरकार के भीतर। सरकार स्थिर होनी चाहिए।”

उन्होंने कहा, “सहयोगियों से समर्थन पत्र हासिल करने में कोई कठिनाई नहीं होनी चाहिए। अगर वह असफल होते हैं, तो गतिरोध उत्पन्न हो जाएगा।”

द्विवेदी ने कहा कि राज्य में राष्ट्रपति शासन लागू हो सकता है, इसलिए टीवीके को समर्थन पत्र पेश करने होंगे या सरकार गठन का दावा पेश करते समय समर्थक नेताओं को उनके साथ राज्यपाल के समक्ष उपस्थित होना पड़ेगा।

हालांकि, सुप्रीम कोर्ट बार एसोसिएशन (एससीबीए) के अध्यक्ष एवं वरिष्ठ अधिवक्ता विकास सिंह ने टीवीके को सरकार बनाने के लिए आमंत्रित न किए जाने को “अनुचित” बताया।

सिंह ने कहा, “राज्यपाल के लिए सबसे बड़ी पार्टी को सरकार बनाने के लिए बुलाना बिल्कुल उचित है, क्योंकि अन्य दो पार्टियों के पास मिलकर भी बहुमत नहीं है। इसलिए अगर सबसे बड़ी पार्टी ने सरकार बनाने का दावा पेश किया है, तो राज्यपाल को उसे मौका देना ही होगा…।”

उन्होंने कहा, “मुझे लगता है कि इस मामले में राज्यपाल का सबसे बड़ी पार्टी को सरकार बनाने के लिए आमंत्रित न करना बेहद अनुचित है।”

वरिष्ठ अधिवक्ता अजीत सिन्हा ने भी सिंह की राय से इत्तफाक जताया। उन्होंने कहा कि विजय को तुरंत सरकार बनाने के लिए आमंत्रित किया जाना चाहिए।

सिन्हा ने कहा कि टीवीके प्रमुख को 10 से 15 दिनों की निर्धारित समय सीमा के भीतर विधानसभा में अपना बहुमत साबित करना चाहिए।

उन्होंने कहा, “राज्यपाल सबसे बड़ी पार्टी को सरकार बनाने के लिए आमंत्रित करने के लिए बाध्य हैं। सरकार का भविष्य सदन में ही तय किया जाना चाहिए।”

वरिष्ठ अधिवक्ता विकास पाहवा ने कहा, “राज्यपाल के पास संविधान के अनुच्छेद-164 के तहत काम करते समय उन स्थितियों में बेहद सीमित संवैधानिक अधिकार होते हैं, जहां विधानसभा में किसी भी पार्टी के पास स्पष्ट बहुमत नहीं होता।”

उन्होंने कहा कि संविधान के मुताबिक राज्यपाल का मुख्य कर्तव्य यह सुनिश्चित करना है कि एक ऐसी स्थिर सरकार बने, जिसे विधानसभा में बहुमत हासिल हो।

पाहवा ने कहा, “आम तौर पर सबसे बड़ी पार्टी को पहले सरकार बनाने का दावा पेश करने आमंत्रित किया जाता है और फिर उससे उचित समय के भीतर विधानसभा में बहुमत साबित करने के लिए कहा जाता है। हालांकि, संविधान में ऐसा कोई स्पष्ट या यांत्रिक प्रावधान नहीं है, जो राज्यपाल को किसी भी परिस्थिति में हमेशा सबसे बड़ी पार्टी को आमंत्रित करने के लिए बाध्य करता हो।”

एक अन्य वरिष्ठ अधिवक्ता अमित आनंद तिवारी ने कहा कि राज्यपाल के लिए किसी पार्टी को केवल इस आधार पर आमंत्रित करना अनिवार्य नहीं है कि वह सबसे बड़ी पार्टी बनकर उभरी है।

उन्होंने कहा, “राज्यपाल यह जांच कर सकते हैं और खुद को संतुष्ट कर सकते हैं कि क्या वह सबसे बड़ी पार्टी सरकार बना सकती है या सदन में बहुमत साबित कर सकती है। यह संतुष्टि राज्यपाल के अधिकार क्षेत्र में आती है और इस विवेकाधिकार पर सवाल नहीं उठाया जा सकता।”

तिवारी ने कहा, “मेरी समझ के हिसाब से टीवीके के मामले में पार्टी ने यह नहीं कहा है कि उसे अन्य विधायकों का समर्थन हासिल है।” उन्होंने कहा कि टीवीके के पास अभी भी पर्याप्त संख्या बल नहीं है, इसलिए राज्यपाल को पार्टी को सरकार बनाने के लिए आमंत्रित करने से पहले खुद संतुष्ट होना होगा।

पाहवा ने कहा कि अगर राज्यपाल के पास इस बात के विश्वसनीय प्रमाण हैं कि सबसे बड़ी पार्टी बहुमत हासिल करने की स्थिति में नहीं हो सकती है, तो वह आमंत्रण से पहले समर्थन के प्रमाण या समर्थन पत्र पेश करने के लिए कहने का वैध तरीका अपना सकते हैं।

उन्होंने कहा, “अगर ऐसा कोई कदम सद्भावनापूर्वक और संवैधानिक मापदंडों के भीतर किया जाता है, तो उसे असंवैधानिक नहीं कहा जा सकता।”

पाहवा ने कहा कि अगर राज्यपाल सबसे बड़ी पार्टी के ठोस दावे के बावजूद अनिश्चित काल तक निमंत्रण रोककर रखते हैं, तो ऐसा आचरण मनमानी या संवैधानिक अनौचित्य के आधार पर न्यायिक जांच के दायरे में आ सकता है।

भाषा पारुल माधव

माधव