गोवध पर रोक लगाने के आदेश के खिलाफ उच्चतम न्यायालय पहुंची तमिलनाडु सरकार

गोवध पर रोक लगाने के आदेश के खिलाफ उच्चतम न्यायालय पहुंची तमिलनाडु सरकार

गोवध पर रोक लगाने के आदेश के खिलाफ उच्चतम न्यायालय पहुंची तमिलनाडु सरकार
Modified Date: July 1, 2026 / 12:51 pm IST
Published Date: July 1, 2026 12:51 pm IST

नयी दिल्ली, एक जुलाई (भाषा) तमिलनाडु सरकार ने राज्य में गायों और बछड़ों के वध पर पूरी तरह रोक लगाने के मद्रास उच्च न्यायालय के आदेश को उच्चतम न्यायालय में चुनौती दी है।

तमिलनाडु सरकार ने अपनी याचिका में उच्च न्यायालय के 27 मई के उस आदेश को चुनौती दी है जिसमें मुख्य सचिव और पुलिस महानिदेशक को यह सुनिश्चित करने का निर्देश दिया गया था कि राज्य में 28 मई को बकरीद की पूर्व संध्या पर या किसी भी अन्य दिन किसी गाय या बछड़े का वध न किया जाए।

उच्च न्यायालय का यह आदेश 1976 के उस आदेश पर आधारित था, जिसमें दुग्ध उत्पादन और ग्रामीण अर्थव्यवस्था में सुधार के हित में गोवध पर रोक लगाई गई थी।

राज्य सरकार ने अपनी याचिका में कहा कि उच्च न्यायालय का आदेश तमिलनाडु पशु संरक्षण अधिनियम, 1958 के प्रावधानों के विपरीत है।

अधिनियम के तहत सक्षम अधिकारी द्वारा जारी प्रमाण-पत्र के आधार पर, 10 वर्ष से अधिक आयु की ऐसी गायों के वध की अनुमति है जो काम करने और प्रजनन के लिए अनुपयुक्त हों।

उच्च न्यायालय ने हिंदू मक्कल काची के महासचिव के. सूर्य प्रशांत की ओर से दायर जनहित याचिका पर यह आदेश दिया था।

याचिका में यह निर्देश देने का अनुरोध किया गया था कि पशुओं का वध केवल निर्धारित स्थानों पर किया जाए।

उच्च न्यायालय ने हालांकि तमिलनाडु में किसी भी दिन और कहीं भी गायों और बछड़ों का वध किए जाने पर पूरी तरह से रोक लगा दी।

भाषा

सिम्मी वैभव

वैभव


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