यादवपुर विश्वविद्यालय के शिक्षकों ने अंतर-विश्वविद्यालय तबादले वाले विधेयक को वापस लेने की मांग की

यादवपुर विश्वविद्यालय के शिक्षकों ने अंतर-विश्वविद्यालय तबादले वाले विधेयक को वापस लेने की मांग की

यादवपुर विश्वविद्यालय के शिक्षकों ने अंतर-विश्वविद्यालय तबादले वाले विधेयक को वापस लेने की मांग की
Modified Date: September 30, 2026 / 03:38 pm IST
Published Date: September 30, 2026 3:38 pm IST

कोलकाता, 30 सितंबर (भाषा) यादवपुर विश्वविद्यालय शिक्षक संघ (जूटा) के 400 से अधिक सदस्यों ने बुधवार को पश्चिम बंगाल के राज्यपाल आर एन रवि को एक प्रतिवेदन सौंपकर शिक्षकों के अंतर-विश्वविद्यालय तबादले की अनुमति देने वाले विधेयक को वापस लेने के लिए कदम उठाने का आग्रह किया।

जूटा के महासचिव पार्थ प्रतिम रॉय ने बताया कि प्रतिवेदन पर शिक्षक संघ के 401 सदस्यों ने हस्ताक्षर किए हैं।

उन्होंने ‘पीटीआई-भाषा’ से कहा, ‘‘पत्र 14 सितंबर को तैयार किया गया था, लेकिन इसे बुधवार को कुलाधिपति को भेजा गया।’’

राज्यपाल पश्चिम बंगाल के राज्य संचालित विश्वविद्यालयों के कुलाधिपति भी हैं।

यह प्रतिवेदन पश्चिम बंगाल विधानसभा में 10 सितंबर को पश्चिम बंगाल विश्वविद्यालय एवं महाविद्यालय (प्रशासन एवं विनियमन) संशोधन विधेयक, 2026 पारित किए जाने के कुछ सप्ताह बाद सौंपा गया है।

विधेयक में राज्य सरकार को एक राज्य विश्वविद्यालय से दूसरे राज्य विश्वविद्यालय में शिक्षण और गैर-शिक्षण कर्मचारियों के तबादले का अधिकार दिया गया है।

कई विश्वविद्यालयों के शिक्षक संगठनों ने इस प्रावधान का विरोध किया है और संस्थागत स्वायत्तता, सेवा शर्तों तथा शिक्षण एवं शोध पर इसके प्रभाव को लेकर चिंता जताई है।

जूटा ने अपने प्रतिवेदन में कहा कि प्रत्येक विश्वविद्यालय अपने अलग-अलग अधिनियमों और नियमों के तहत काम करता है तथा नियुक्तियां संबंधित विश्वविद्यालय की सेवा शर्तों के अनुसार की जाती हैं।

शिक्षक संघ ने सुझाव दिया कि यदि बेहतर सुविधाओं वाले विश्वविद्यालयों के शिक्षकों को कम सुविधाओं वाले संस्थानों की मदद के लिए भेजना जरूरी हो, तो स्थायी या अंतर-विश्वविद्यालय तबादले के बजाय अल्पकालिक नियुक्तियों पर विचार किया जा सकता है।

जूटा ने प्रतिवेदन में कहा कि कार्यस्थल के स्थान को लेकर अनिश्चितता राज्य विश्वविद्यालयों में शिक्षण पदों के लिए उच्च योग्यता वाले शिक्षाविदों को आवेदन करने से हतोत्साहित कर सकती है।

भाषा रवि कांत रवि कांत नरेश

नरेश


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