हैदराबाद, चार अगस्त (भाषा) सऊदी अरब में एक गंभीर सड़क दुर्घटना के बाद अस्पताल में बिस्तर पर पड़ी तेलंगाना की एक नर्स के परिजनों ने मुख्यमंत्री ए. रेवंत रेड्डी से उसे भारत वापस लाने में मदद करने की अपील की है।
परिवार का कहना है कि लंबित बैंक ऋण के कारण सऊदी अरब में उस पर यात्रा प्रतिबंध लगा दिया गया है, जिससे वह स्वदेश नहीं लौट पा रही है।
तेलंगाना के सूर्यापेट जिले के चिव्वेमला मंडल की रहने वाली 36 वर्षीय गुगुलोत सुनीता की मां ने 31 जुलाई को ‘सीएम प्रवासी प्रजावाणी’ में मुख्यमंत्री रेवंत रेड्डी से भावुक अपील करते हुए सहायता मांगी।
तेलंगाना सरकार की एनआरआई सलाहकार समिति के उपाध्यक्ष मांधा भीम रेड्डी ने मंगलवार को ‘पीटीआई-भाषा’ को बताया कि इस संबंध में दायर आवेदन मुख्यमंत्री कार्यालय को भेज दिया गया है और मामले में हस्तक्षेप का अनुरोध किया गया है।
सुनीता की मां गुगुलोत परेंगी ने बताया कि पहले गंभीर रूप से बीमार मरीजों की देखभाल करने वाली सुनीता अब स्वयं पूरी तरह बिस्तर पर पड़ी हैं और अपनी दैनिक जरूरतों के लिए भी दूसरों पर निर्भर हैं।
उन्होंने कहा कि बी.एससी. नर्सिंग की पढ़ाई पूरी करने के बाद सुनीता अपने आर्थिक रूप से कमजोर परिवार का सहारा बनने के उद्देश्य से सात सितंबर, 2024 को सऊदी अरब गई थीं।
सुनीता ने वहां किंग अब्दुल्ला अस्पताल में गहन चिकित्सा कक्ष (आईसीयू) विशेषज्ञ नर्स के रूप में काम शुरू किया। परिवार के अनुसार, 23 अप्रैल, 2025 को एक भीषण सड़क दुर्घटना में सुनीता गंभीर रूप से घायल हो गईं।
दुर्घटना में उनके दोनों हाथों, रीढ़ और सिर में गंभीर चोटें आईं, जिसके कारण कई शल्य चिकित्सा करनी पड़ी और शरीर में धातु की प्लेटें लगानी पड़ीं। बाद में सऊदी अरब के चिकित्सा बोर्ड ने उन्हें 87 प्रतिशत स्थायी रूप से दिव्यांग घोषित करते हुए काम करने के लिए चिकित्सकीय रूप से अयोग्य करार दिया। इसके बाद उनकी नौकरी भी चली गई।
परिवार का कहना है कि इस त्रासदी के बीच सुनीता एक और बड़ी समस्या का सामना कर रही हैं। दुर्घटना से पहले सुनीता ने पारिवारिक जरूरतों को पूरा करने के लिए सऊदी अरब के एक बैंक से 1,48,000 सऊदी रियाल (करीब 38 लाख रुपये) का ऋण लिया था।
दुर्घटना से संबंधित सभी चिकित्सकीय दस्तावेज हालांकि बैंक को सौंप दिए गए, लेकिन ऋण विवाद अब तक सुलझ नहीं पाया है। इसके चलते सऊदी अधिकारियों ने उन पर ‘यात्रा प्रतिबंध’ लगा दिया है, जिससे वह देश छोड़कर नहीं जा सकतीं।
सुनीता की मां ने कहा कि भारत में बेहतर इलाज की तत्काल आवश्यकता होने के बावजूद वह सऊदी अरब में फंसी हुई हैं। परिवार के अनुसार, नवंबर 2025 से उनका वेतन भी बंद है, जिससे उनके पास आय का कोई स्रोत नहीं बचा है। परिवार उनकी चिकित्सा, कानूनी और अन्य खर्च वहन करने में असमर्थ है और गंभीर आर्थिक संकट से गुजर रहा है।
सुनीता की मां ने कहा, ‘‘मेरी बेटी ने अपना जीवन अनगिनत मरीजों की जान बचाने में समर्पित किया। आज मैं सरकार से अपनी बेटी को बचाकर उसे घर वापस लाने की गुहार लगा रही हूं।’’
‘सीएम प्रवासी प्रजावाणी’ में आवेदन मिलने के बाद तेलंगाना सरकार की एनआरआई सलाहकार समिति के उपाध्यक्ष मांधा भीम रेड्डी ने परिवार से मुलाकात कर उन्हें आवश्यक मार्गदर्शन दिया।
भीम रेड्डी ने बताया कि सुनीता की स्थिति की जानकारी मिलने पर तेलंगाना राज्य योजना बोर्ड के उपाध्यक्ष तथा ‘सीएम प्रजावाणी’ के प्रभारी जी. चिन्ना रेड्डी ने मुख्यमंत्री के प्रधान सचिव वी. शेषाद्रि को आवेदन अग्रेषित कर सुनीता को तत्काल स्वदेश लाने और उन्हें उचित चिकित्सा सहायता उपलब्ध कराने के लिए हस्तक्षेप का अनुरोध किया।
परिवार के अनुसार, सुनीता अपने घर की मुख्य कमाने वाली सदस्य थीं। उन्होंने अपनी मां के दिल के ऑपरेशन, पिता की मस्तिष्क सर्जरी का खर्च उठाया, अपनी तीन बहनों की पढ़ाई, विवाह और प्रसूति संबंधी जरूरतों में आर्थिक मदद की तथा वर्ष 2011 में भाई की मृत्यु के बाद उसके दो छोटे बच्चों की जिम्मेदारी भी संभाली।
दुर्घटना के बाद गरीबी रेखा से नीचे जीवनयापन करने वाला पूरा परिवार आर्थिक और मानसिक रूप से बुरी तरह प्रभावित हुआ है।
परिवार ने मुख्यमंत्री रेवंत रेड्डी, सूर्यापेट के विधायक जी. जगदीश रेड्डी तथा नलगोंडा के सांसद कुंदुरु रघुवीर रेड्डी से तत्काल हस्तक्षेप की अपील की है।
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