आपराधिक रिकॉर्ड छिपाने पर कर्मचारी को नौकरी से निकालने का आदेश ‘यांत्रिक’ नहीं होना चाहिए: न्यायालय

आपराधिक रिकॉर्ड छिपाने पर कर्मचारी को नौकरी से निकालने का आदेश ‘यांत्रिक’ नहीं होना चाहिए: न्यायालय

आपराधिक रिकॉर्ड छिपाने पर कर्मचारी को नौकरी से निकालने का आदेश ‘यांत्रिक’ नहीं होना चाहिए: न्यायालय
Modified Date: August 11, 2026 / 08:50 pm IST
Published Date: August 11, 2026 8:50 pm IST

नयी दिल्ली, 11 अगस्त (भाषा) उच्चतम न्यायालय ने मंगलवार को कहा कि आपराधिक रिकॉर्ड का खुलासा न करने पर किसी कर्मचारी को नौकरी से निकालने का आदेश ‘यांत्रिक’ (बिना सोचे-समझे) नहीं होना चाहिए, और नियोक्ता को जानकारी छिपाने की प्रकृति, अपराध के प्रकार एवं नौकरी की प्रकृति पर विचार करने के बाद ही कोई निर्णय लिया जाना चाहिए।

न्यायमूर्ति संजय करोल और न्यायमूर्ति एजी मसीह की पीठ ने कहा कि आपराधिक पृष्ठभूमि का पता चलने पर नौकरी से निकालना अपने आप होने वाली कार्रवाई नहीं है; बल्कि, कर्मचारी के मामले पर खास तौर पर विचार किया जाना चाहिए और कोई भी फ़ैसला लेने से पहले नियोक्ता को इस पर अच्छी तरह सोच-विचार करना चाहिए।

पीठ ने ‘फर्टिलाइज़र्स एंड केमिकल्स त्रावणकोर लिमिटेड’ से निकाले गए शत्रुघ्न यादव को बहाल करते हुए कहा कि आपराधिक इतिहास की जानकारी छिपाने के आधार पर किसी की सेवा समाप्त करने से पहले नियोक्ता को जांच-पड़ताल करनी चाहिए।

यादव को नौकरी से इसलिए निकाल दिया गया था क्योंकि उन्होंने अपने खिलाफ दर्ज गैर संज्ञेय अपराध से जुड़े एक मामले की जानकारी नहीं दी थी।

पीठ ने कहा, ‘‘नौकरी से हटाने का आदेश यांत्रिक नहीं होना चाहिए, बल्कि उसमें जानकारी छिपाने के तरीके, आपराधिक मामले के नतीजे, नौकरी और अपराध की प्रकृति, तथा किसी भी खास परिस्थिति का ध्यान रखा जाना चाहिए।’’

न्यायालय ने कहा, ‘‘इसलिए, आपराधिक रिकॉर्ड का पता चलने पर नौकरी से निकालना अपने आप होने वाला नतीजा नहीं है; बल्कि कर्मचारी के मामले पर खास तौर पर विचार किया जाना चाहिए और नियोक्ता को कोई भी फ़ैसला लेने से पहले अच्छी तरह सोच-विचार करना चाहिए।’’

इसने यादव को सभी संबंधित लाभों के साथ तुरंत सेवा में बहाल करने का निर्देश दिया, सिवाय बकाया वेतन के, जिसे 50 प्रतिशत तक सीमित रखा गया और कहा कि आठ सप्ताह के भीतर इसका भुगतान किया जाना चाहिए।

भाषा नेत्रपाल अविनाश

अविनाश


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