जम्मू-कश्मीर विधानसभा का शरदकालीन सत्र बृहस्पतिवार को शुरू होगा

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जम्मू-कश्मीर विधानसभा का शरदकालीन सत्र बृहस्पतिवार को शुरू होगा

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  • Publish Date - October 22, 2025 / 03:48 PM IST,
    Updated On - October 22, 2025 / 03:48 PM IST

श्रीनगर, 22 अक्टूबर (भाषा) जम्मू-कश्मीर विधानसभा का शरदकालीन सत्र बृहस्पतिवार को शुरू होगा।

विधानसभा के इस सत्र के हंगामेदार रहने और जम्मू-कश्मीर को पूर्ण राज्य का दर्जा देने, आरक्षण नीति एवं केंद्र शासित प्रदेश में हजारों संविदा कर्मियों को स्थायी करने जैसे मुद्दे सदन की कार्यवाही में छाए रहने की संभावना है।

नौ दिवसीय विधानसभा सत्र की शुरुआत जम्मू-कश्मीर के उन पूर्व विधायकों को श्रद्धांजलि देने के साथ होगी, जिनका हाल में निधन हुआ है।

जम्मू-कश्मीर विधानसभा में शुक्रवार को राज्यसभा की चार सीट के लिए मतदान होगा। ये सीट 2021 से खाली हैं क्योंकि पिछले साल तक विधानसभा के चुनाव नहीं हुए थे।

विधानसभा में मौजूदा संख्याबल के मद्देनजर सत्तारूढ़ नेशनल कांफ्रेंस के तीन उम्मीदवारों की जीत तय मानी जा रही है जबकि चौथी सीट पर कड़ा मुकाबला होने की उम्मीद है क्योंकि भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) के वरिष्ठ नेता सतपाल शर्मा का मुकाबला युवा नेकां प्रवक्ता इमरान नबी डार से है।

डार को जीत के लिए न केवल अपनी पार्टी के सदस्यों बल्कि विपक्षी पीपुल्स डेमोक्रेटिक पार्टी (पीडीपी), अवामी इत्तेहाद पार्टी और आम आदमी पार्टी (आप) के समर्थन की भी आवश्यकता होगी।

इस चुनाव में हर मत अहम होगा। पीपुल्स कॉन्फ्रेंस के अध्यक्ष सज्जाद गनी लोन ने पहले ही घोषणा कर दी है कि वह मतदान में हिस्सा नहीं लेंगे उनके इस फैसले से भाजपा को फायदा मिलने की बात कही जा रही है।

सदन में असली हंगामा सोमवार को शुरू होने की उम्मीद है, क्योंकि विपक्षी दल जम्मू-कश्मीर को राज्य का दर्जा बहाल करने और केंद्र शासित प्रदेश में मौजूदा आरक्षण कोटा नीति को युक्तिसंगत बनाने सहित कई मुद्दों पर सत्तारूढ़ नेकां को घेरने की कोशिश करेंगे।

पिछले सप्ताह उमर अब्दुल्ला सरकार ने अपना एक वर्ष पूरा कर लिया है, ऐसे में विपक्ष विधानसभा चुनाव के दौरान नेकां द्वारा किये गए वादों को पूरा करने का मुद्दा उठा सकते हैं।

अधिकारियों के अनुसार, विधायकों ने इस सत्र के दौरान सरकार से पूछे जाने वाले 450 प्रश्न प्रस्तुत किए हैं।

उन्होंने बताया कि सत्र के दौरान चर्चा के लिए विधायकों द्वारा 13 निजी विधेयक और 50 से अधिक प्रस्ताव भी प्रस्तुत किए गए हैं।

भाषा धीरज सुरभि

सुरभि