Maulana Sajjad Nomani Video: मौलाना का दावा, ‘भारत में अब हिन्दू बहुसंख्यक नहीं है.. एसटी-एससी और तमिलनाडु के लोगों को हिन्दू मानने से किया इंकार, खुद सुनें

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Maulana Sajjad Nomani Statement on Hindu Community: मौलाना सज्जाद नोमानी के बयान पर विवाद, हिंदुओं को अल्पसंख्यक बताने और कई समुदायों को अलग मानने का दावा।

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  • Publish Date - June 19, 2026 / 02:29 PM IST,
    Updated On - June 19, 2026 / 02:29 PM IST

Maulana Sajjad Nomani Statement on Hindu Community || Image- Millat Times File

HIGHLIGHTS
  • सज्जाद नोमानी ने हिंदुओं को अल्पसंख्यक बताया।
  • एससी, एसटी और लिंगायतों को अलग पहचान बताया।
  • बयान के बाद राजनीतिक और सामाजिक बहस तेज।

नई दिल्ली: सज्जाद नोमानी के सदस्य मौलाना सज्जाद नोमानी के एक बयान ने नया विवाद खड़ा कर दिया है। नोमानी ने दावा किया है कि यदि देश के विभिन्न समुदायों और जातीय समूहों को अलग-अलग माना जाए, तो हिंदू भारत में बहुसंख्यक नहीं बल्कि अल्पसंख्यक हैं। (Maulana Sajjad Nomani Statement on Hindu Community) मौलाना नोमानी ने कहा कि उन्होंने पिछले 30 वर्षों में पूरे देश का दौरा किया है और लोगों की आस्था, धार्मिक पहचान, जनजातीय पहचान, जातीय समूहों और विभिन्न परंपराओं पर अध्ययन किया है। इसी आधार पर उन्होंने यह निष्कर्ष निकाला है।

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“हिंदुओं को बहुसंख्यक नहीं माना जा सकता”

नोमानी ने कहा, “मैं हज्र-ए-अस्वद और काबा के गिलाफ पर हाथ रखकर कहता हूं कि हिंदू भारत में अल्पसंख्यक हैं। किसी भी परिस्थिति में हिंदुओं को बहुसंख्यक नहीं माना जा सकता।” उन्होंने दावा किया कि जिन समुदायों को आमतौर पर हिंदू आबादी में शामिल किया जाता है, उनमें से कई स्वयं को अलग पहचान के रूप में देखते हैं। उनके अनुसार सिख, ईसाई और बौद्ध समुदाय हिंदू नहीं हैं।

कई समुदायों को हिंदू आबादी से अलग बताया

मौलाना नोमानी ने आगे कहा कि अनुसूचित जाति, आदिवासी समुदाय, तमिलनाडु के लोग और लिंगायत समुदाय को भी हिंदू आबादी का हिस्सा नहीं माना जाना चाहिए। उन्होंने कहा कि आदिवासी समुदाय देश के मूल निवासी हैं और उन्हें हिंदू श्रेणी में शामिल करना उचित नहीं है। (Maulana Sajjad Nomani Statement on Hindu Community) उन्होंने यह भी दावा किया कि जाट समुदाय के कुछ लोग भी अपनी अलग पहचान की बात कर रहे हैं और स्वयं को हिंदू नहीं मानते।

सियासी बंटवारे पर भी कही ये बात

अपने संबोधन के दौरान नोमानी ने हिंदुओं के राजनीतिक विभाजन और मुस्लिम राजनीति पर उसके प्रभाव को लेकर भी टिप्पणी की। उन्होंने कहा कि मुसलमानों ने हिंदुओं को “सेक्युलर” और “फासीवादी” वर्गों में बांटकर देखा, लेकिन दोनों ही परिस्थितियां मुस्लिम समाज के लिए नुकसानदेह साबित हुईं। उन्होंने कहा कि पहले मुस्लिम समाज को तथाकथित “सेक्युलर हिंदुओं” से उम्मीद थी, लेकिन बाद में उन्हें लगा कि उन्हीं समूहों ने देश को उन लोगों के हाथों में सौंप दिया जिन्हें वह “फासीवादी हिंदू” कहते हैं।

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बयान मूर्खतापूर्ण : कांग्रेस

एआईएमपीएलबी सदस्य मौलाना सज्जाद नोमानी के बयान पर कांग्रेस प्रवक्ता सुरेंद्र राजपूत ने तीखी प्रतिक्रिया दी है। उन्होनें कहा, “कुछ लोग टीवी पर आने के लिए इतने जुनूनी हैं कि वे इस तरह के गैरजिम्मेदाराना और मूर्खतापूर्ण बयान देते रहते हैं। हमारा स्पष्ट रुख यह है कि देश में जनसंख्या गणना की जा रही है, जिसमें जाति और धर्म के आधार पर आंकड़े एकत्र किए जा रहे हैं। आधिकारिक तौर पर उपलब्ध होने के बाद इस प्रक्रिया के निष्कर्षों और परिणामों के आधार पर ही चर्चा की जानी चाहिए।”

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Q1. मौलाना सज्जाद नोमानी ने क्या दावा किया है?

उत्तर: उन्होंने कहा कि कई समुदायों को अलग मानें तो हिंदू बहुसंख्यक नहीं रहेंगे।

Q2. किन समुदायों का उल्लेख बयान में किया गया?

उत्तर: एससी, एसटी, लिंगायत, सिख, बौद्ध, ईसाई और तमिल समुदाय का उल्लेख किया।

Q3. बयान को लेकर विवाद क्यों हुआ?

उत्तर: हिंदू जनसंख्या और धार्मिक पहचान संबंधी दावों पर व्यापक बहस शुरू हुई।