न्यायालय को नीट पेपर की छपाई से परीक्षा केंद्र तक पहुंचने की प्रक्रिया का ब्योरा देगा केंद्र
न्यायालय को नीट पेपर की छपाई से परीक्षा केंद्र तक पहुंचने की प्रक्रिया का ब्योरा देगा केंद्र
नयी दिल्ली, तीन अगस्त (भाषा) केंद्र सरकार ने सोमवार को कहा कि वह उच्चतम न्यायालय के सामने उस प्रक्रिया का ब्योरा रखना चाहती है, जिसमें राष्ट्रीय पात्रता सह प्रवेश परीक्षा (नीट) का प्रश्न-पत्र छपने से लेकर छात्रों तक पहुंचने तक सुरक्षा के उपाय अपनाए जाते हैं।
न्यायमूर्ति पी.एस. नरसिम्हा और न्यायमूर्ति आलोक अराधे की पीठ को सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने बताया कि सरकार अपनाई गई कार्यप्रणाली के बारे में बताना चाहती है और उसे हलफनामे के जरिए रिकॉर्ड पर लाना चाहती है।
मेहता ने बृहस्पतिवार या शुक्रवार को सुनवाई के लिए समय मांगा।
पीठ ने मेहता से कहा कि वह भी इस प्रक्रिया के बारे में जानना चाहती है और नीट प्रश्न पत्रों के लिए अतिरिक्त सुरक्षा उपायों की मांग करने वाली याचिकाओं के समूह को बृहस्पतिवार को सुनवाई के लिए सूचीबद्ध किया।
मेहता ने कहा कि हलफ़नामा आज ही दाखिल किया जाएगा।
राष्ट्रीय जनता दल (राजद) के नेताओं की एक याचिका में 27 जुलाई को कहा गया था कि वे देखेंगे कि सरकार द्वारा गठित नंदन नीलेकणि की अध्यक्षता वाला उच्चाधिकार प्राप्त कार्य बल नीट परीक्षा के ऑनलाइन आयोजन के बारे में क्या सुझाव देता है।
इसमें कहा गया था कि कुछ हटकर सुझावों की जरूरत है, खासकर तब जब नीट परीक्षा को भौतिक प्रारूप से ऑनलाइन प्रारूप में बदला जा रहा हो।
केंद्र की ओर से पेश हुए मेहता ने तब पीठ को बताया था कि केंद्र सरकार ने बार-बार प्रश्न-पत्र लीक होने के मामले को बहुत गंभीरता से लिया है और इसके लिए एक उच्च-स्तरीय समिति का गठन किया गया है।
उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने घोषणा की थी और इस उच्च स्तरीय समिति के प्रमुख नंदन नीलेकणि हैं, जो प्रौद्योगिकी के क्षेत्र के विशेषज्ञ हैं।
इसी तरह, 24 जून को उच्चतम न्यायालय ने केंद्र सरकार से कहा कि वह नीट परीक्षा के प्रश्नपत्र लीक को रोकने के लिए उठाए गए कदमों पर बारीकी से नजर रखेगी। साथ ही, न्यायालय ने इस बात पर भी जोर दिया कि तदर्थ व्यवस्था की वजह से सालों से परेशानियां हो रही हैं।
न्यायालय ‘फेडरेशन ऑफ ऑल इंडिया मेडिकल एसोसिएशन’ (एफएआईएमए) की याचिका समेत कई याचिकाओं पर सुनवाई कर रहा था। उसने मेहता से कहा कि सरकार को पारदर्शिता लाने, राधाकृष्णन समिति की सिफारिशों को लागू करने और आईआईटी मॉडल को कैसे अपनाया जाएगा, इस दिशा में उठाए गए कदमों के बारे में बताना चाहिए।
भाषा प्रशांत नरेश
नरेश

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