अदालत ने जमानत याचिका खारिज कर आरोपी की मानसिक स्थिति जांचने के निर्देश दिये
अदालत ने जमानत याचिका खारिज कर आरोपी की मानसिक स्थिति जांचने के निर्देश दिये
प्रयागराज, 20 जुलाई (भाषा) इलाहाबाद उच्च न्यायालय ने एक महिला की अश्लील फोटो लेने और उसे लगातार ब्लैकमेल करने के आरोप में गिरफ्तार व्यक्ति की जमानत याचिका पर सुनवाई करते हुए उसकी मानसिक स्थिति की जांच करने का यह कहते हुए निर्देश दिया है आरोपी स्वस्थ दिमाग का व्यक्ति प्रतीत नहीं होता है।
न्यायमूर्ति अरुण कुमार सिंह देशवाल ने आरोपी द्वारा भेजे गए संदेश और सोशल मीडिया पर किए गए पोस्ट पर संज्ञान लेने के बाद यह आदेश पारित किया।
अदालत ने कहा, ‘‘याचिकाकर्ता (आरोपी) द्वारा भेजे गए संदेश और सोशल मीडिया पर किए गए पोस्ट पर गौर करने पर अदालत को लगता है कि याचिकाकर्ता स्वस्थ दिमाग का व्यक्ति नहीं है, इसलिए कौशांबी के मुख्य चिकित्सा अधिकारी को उसके मस्तिष्क की जांच करने और संबंधित जिला अदालत के समक्ष इसे पेश करने का निर्देश दिया जाता है।”
अदालत राहुल कुमार सरोज नाम के व्यक्ति द्वारा दायर जमानत याचिका पर सुनवाई कर रही थी। आरोपी के खिलाफ कौशांबी के मंझनपुर थाना में बीएनएस, पॉक्सो अधिनियम और आईटी अधिनियम की विभिन्न धाराओं के तहत मामला दर्ज किया गया था।
इस मामले के तथ्यों के मुताबिक, पीड़िता ने आरोपी के खिलाफ प्राथमिकी दर्ज कराई थी जिसमें उसका आरोप था कि आरोपी ने उसका मोबाइल फोन हैक करके किसी तरह अश्लील फोटो हासिल कर ली और इसके बाद उसे ब्लैकमेल करना शुरू कर दिया और इसे सोशल मीडिया पर पोस्ट करने की धमकी दी।
पुलिस ने इस मामले में आरोपी को गिरफ्तार किया। पीड़िता ने पुलिस और मजिस्ट्रेट के समक्ष दर्ज कराए गए अपने बयान में कहा कि आरोपी ने उसे ब्लैकमेल करने के लिए अश्लील वीडियो और फोटो का उपयोग किया और इंस्टाग्राम पर संदेश पोस्ट कर सीधे संदेश भेजकर पांच लाख रुपये की मांग की।
सुनवाई के दौरान, आरोपी के वकील ने दलील दी कि उनके मुवक्किल का पीड़िता के साथ संबंध था और जब उसने शादी करने से मना कर दिया तो उसे झूठा फंसाया गया।
हालांकि, इस याचिका का विरोध करते हुए राज्य सरकार के वकील और शिकायतकर्ता के वकील ने याचिकाकर्ता द्वारा पीड़िता को भेजे गए संदेश और सोशल मीडिया पर पोस्ट किए गए फोटोग्राफ दिखाए।
इन संदेशों और तस्वीरों को संज्ञान में लेते हुए अदालत ने कहा कि इन संदेशों की भाषा और प्रकृति एवं सोशल मीडिया पर किए गए पोस्ट को देखते हुए यह अदालत आरोपी को जमानत पर रिहा करने के पक्ष में नहीं है।
भाषा सं राजेंद्र धीरज
धीरज

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