चंडीगढ़,नौ अगस्त (भाषा) चंडीगढ़ के ‘हेरिटेज प्रोटेक्शन सेल’ के एक सदस्य ने स्नातकोत्तर चिकित्सा शिक्षा एवं अनुसंधान संस्थान (पीजीआईएमईआर) के एक फर्नीचर को अमेरिका में नीलाम के लिए पेश किये जाने का दावा करते हुए अस्पताल प्रशासन और केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्रालय से इस मामले में दखल देने की अपील की।
पीजीआईएमईआर निदेशक विवेक लाल और केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्री जे.पी. नड्डा को भेजे अनुरोध पत्र में वकील अजय जग्गा ने दावा किया कि ‘शिकागो ऑक्शन हाउस’ ने 13 अगस्त की नीलामी के लिए पीजीआईएमईआर और नेहरू अस्पताल के निशान वाले ‘डे बेड’ को सूचीबद्ध किया है।
इस वस्तु की अनुमानित कीमत 8,000 से 10,000 अमेरिकी डॉलर, यानी लगभग 7.62 लाख से 9.52 लाख रुपये है।
इस मामले पर पीजीआईएमईआर ने तत्काल कोई प्रतिक्रिया नहीं दी।
जग्गा ने तत्काल दखल देने की मांग की है ताकि यह पता लगाया जा सके कि वह चीज अमेरिका कैसे पहुंची और क्या उसे भारत से कानूनी तौर पर बेचा या निर्यात किया गया था।
जग्गा ने अपनी बात रखते हुए कहा, ‘‘पीजीआईएमईआर की धरोहर वस्तु की प्रस्तावित नीलामी को चुनौती देने या कम से कम औपचारिक रूप से उस पर आपत्ति जताने का फैसला सिर्फ प्रशासनिक फैसला नहीं है, बल्कि संस्थान की विरासत को बचाने की जिम्मेदारी भी है।’’
उन्होंने चंडीगढ़ की आजादी के बाद की वास्तुशिल्पीय विरासत से जुड़े फर्नीचर को देश की संस्थागत और सांस्कृतिक विरासत का हिस्सा बताया तथा कहा कि ऐसी चीजें आने वाली पीढ़ियों के लिए सुरक्षित रखी जानी चाहिए।
उन्होंने पीजीआईएमईआर से आग्रह किया है कि वह प्रस्तावित नीलामी पर तुरंत औपचारिक आपत्ति दर्ज करे।
जग्गा ने संविधान के अनुच्छेद 49 और 51ए(एफ) का भी हवाला दिया एवं तर्क दिया कि संस्थानों और अधिकारियों की यह जिम्मेदारी है कि वे ऐतिहासिक और कलात्मक महत्व वाली चीजों की रक्षा करें।
भाषा
राजकुमार संतोष
संतोष