नीट आंदोलन का परिणाम धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे से कहीं बड़ा था: आइसा अध्यक्ष नेहा बोरा
नीट आंदोलन का परिणाम धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे से कहीं बड़ा था: आइसा अध्यक्ष नेहा बोरा
कोलकाता, 11 अगस्त (भाषा) ऑल इंडिया स्टूडेंट्स एसोसिएशन (आइसा) की अध्यक्ष नेहा बोरा ने मंगलवार को कहा कि नीट प्रश्नपत्र लीक के खिलाफ दो महीने तक चले आंदोलन का परिणाम केवल शिक्षा मंत्री का इस्तीफा नहीं था, बल्कि यह उन लोगों के खिलाफ जीत थी जो देश की जनता के सामने ‘‘56 इंच का सीना’’ दिखाते हैं और खुद को लोकतांत्रिक जवाबदेही से ऊपर मानते हैं।
नेहा बोरा ने कहा कि राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (आरएसएस) प्रमुख मोहन भागवत ने यह कहा था कि युवावस्था में उन्होंने अपने बड़ों की सलाह मानी थी, लेकिन देश का निर्माण इस तरह होना चाहिए कि यदि कोई केंद्रीय मंत्री गलत है, तो उससे यह सवाल पूछा जा सके, चाहे वह उम्र में बड़ा ही क्यों न हो।
राष्ट्रीय पात्रता सह प्रवेश परीक्षा (नीट) के प्रश्नपत्र लीक के विरोध में दिल्ली में हुए छात्र आंदोलन के दौरान नेहा बोरा ने सामाजिक कार्यकर्ता सोनम वांगचुक के साथ 23 दिनों तक भूख हड़ताल की थी। जंतर-मंतर पर कॉकरोच जनता पार्टी (कॉजपा) के नेतृत्व में 20 जून से शुरू हुआ यह आंदोलन 36 दिनों तक चला और 25 जुलाई को केंद्रीय शिक्षा मंत्री पद से धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे के बाद समाप्त हुआ।
वामपंथी छात्र संगठनों के एक सम्मेलन को संबोधित करते हुए बोरा ने कहा कि आंदोलन का परिणाम धर्मेंद्र प्रधान का इस्तीफा नहीं था, बल्कि ‘‘यह उन लोगों के खिलाफ जीत थी जो जनता के सामने 56 इंच का सीना दिखाते हैं और खुद को लोकतांत्रिक जवाबदेही से ऊपर समझते हैं।’’
आइसा अध्यक्ष ने कहा कि इस आंदोलन ने यह साबित किया कि जब देश के लोग एकजुट होते हैं, तो वे अपने अधिकार हासिल कर सकते हैं।
उन्होंने कहा, ‘‘इस आंदोलन ने स्थापित किया कि चाहे आप आरएसएस और भाजपा की पूरी व्यवस्था का कितना भी महत्वपूर्ण और अपरिहार्य हिस्सा हों, तब भी यदि जनता आपको दोषी मानती है, तो आपको अपनी कुर्सी छोड़नी पड़ेगी।’’
बोरा ने कहा कि इस आंदोलन ने यह भी सिखाया कि दशकों पुरानी निराशा और चुप्पी को तोड़ा जा सकता है और इससे सत्ता में बैठे लोगों को झुकने के लिए मजबूर किया जा सकता है। उन्होंने कहा कि इससे भविष्य में भी ऐसे मुद्दों पर जीत का रास्ता खुलेगा।
उन्होंने कहा, ‘‘हमारे सामने अपने राष्ट्र का नए सिरे से निर्माण करने की ऐतिहासिक जिम्मेदारी है। हमें गर्व है कि यह जिम्मेदारी हमारे कंधों पर है।’’
आइसा नेता ने दावा किया कि नीट प्रश्नपत्र लीक को लेकर चला यह आंदोलन ‘‘फासीवादी ताकतों के अंत की शुरुआत भी बनेगा।’’
रवींद्रनाथ टैगोर की प्रसिद्ध पंक्तियां ‘जहां मन भय से मुक्त हो और मस्तक ऊंचा हो’ पढ़ते हुए उन्होंने कहा, ‘‘यही वह राष्ट्र है जिसकी कल्पना उन्होंने की थी।’’
बोरा ने कहा कि ठाकुर की इन पंक्तियों का अर्थ यह है कि आरजी कर मेडिकल कॉलेज एवं अस्पताल में एक छात्रा के साथ हुए जघन्य दुष्कर्म और हत्या और ‘‘बजरंग दल के कार्यकर्ताओं द्वारा नुक्कड़ नाटक पर हमले’’ जैसी घटनाओं की कोई जगह नहीं होनी चाहिए।
उन्होंने कहा कि किसी गलत बात का विरोध करने वाले व्यक्ति को पाकिस्तानी नहीं कहा जाना चाहिए और यह सुनिश्चित किया जाना चाहिए कि राजनीतिक दल अपने चुनावी वादों को पूरा करें।
भाषा गोला नरेश
नरेश

Facebook


