आरएसएस ने अयोध्या के राममंदिर में दानपेटी चढ़ावे की गिनती में अनियमितता की घटना पर दुख जताया

आरएसएस ने अयोध्या के राममंदिर में दानपेटी चढ़ावे की गिनती में अनियमितता की घटना पर दुख जताया

आरएसएस ने अयोध्या के राममंदिर में दानपेटी चढ़ावे की गिनती में अनियमितता की घटना पर दुख जताया
Modified Date: July 12, 2026 / 05:57 pm IST
Published Date: July 12, 2026 5:57 pm IST

बेलगावी (कर्नाटक), 12 जुलाई (भाषा) राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (आरएसएस) ने रविवार को अयोध्या के श्री रामजन्मभूमि मंदिर में दानपेटी चढ़ावे की गिनती में हुई कथित अनियमितता की घटना पर ‘दुख’ व्यक्त किया तथा भरोसा जताया कि विशेष जांच दल (एसआईटी) की मौजूदा जांच और पुलिस कार्रवाई ‘निर्णायक मोड़’ पर पहुंचेगी।

यह मुद्दा यहां आरएसएस की वार्षिक अखिल भारतीय प्रांत प्रचारक बैठक के समापन दिवस के दौरान उठा। बैठक में संघ ने अपनी प्रशिक्षण गतिविधियों और शताब्दी वर्ष के कार्यक्रमों की समीक्षा की तथा जनसांख्यिकी असंतुलन से लेकर नशीली दवाओं के सेवन तक जैसे विभिन्न मुद्दों पर भी चर्चा की।

आरएसएस ने एक बयान में कहा, ‘‘बैठक में सभी ने श्री रामजन्मभूमि मंदिर में दानपेटी चढ़ावे की गिनती में हुई अनियमितता की घटना पर दुःख व्यक्त किया तथा विश्वास जताया कि श्री राम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र न्यास के निवेदन पर चल रही एसआईटी जांच एवं पुलिस कार्रवाई निर्णायक मोड़ पर पहुँचेगी।’’

संघ ने कहा कि उसे ‘तीर्थ क्षेत्र न्यास’ से यह अपेक्षा भी है कि ‘वह यह सुनिश्चित करेगा कि भविष्य में ऐसी कोई घटना न हो, जिससे राम मंदिर के प्रति सभी राम भक्तों की श्रद्धा और गहरी आस्था को ठेस पहुंचे।’’

राम मंदिर के चढ़ावे में कथित हेराफेरी का मामला सात जून को सामने आया था।

उसके बाद उत्तर प्रदेश सरकार ने मामले की जांच के लिए एसआईटी गठित की थी, जिसकी प्रारंभिक रिपोर्ट के आधार पर 25 जून को प्राथमिकी दर्ज की गई।

मंदिर में चढ़ावा और गिनती प्रक्रिया से जुड़े आठ लोगों को इस मामले में गिरफ्तार किया गया है और जांच जारी है।

यहां 10 से 12 जुलाई तक चली तीन दिवसीय बैठक आरएसएस सरसंघचालक मोहन भगवत, सरकार्यवाह दत्तात्रेय होसबाले सहित 226 कार्यकर्ताओं की उपस्थिति में संपन्न हुई।

बयान के अनुसार, बैठक में मार्च 2026 के बाद आयोजित प्रशिक्षण शिविरों की समीक्षा की गई। इसमें बताया गया कि देश भर में 83 ‘संघ शिक्षा वर्ग’ और 12 ‘कार्यकर्ता विकास वर्ग’ आयोजित किए गए, जिनमें कुल 18,842 स्वयंसेवकों को प्रशिक्षण दिया गया।

इन प्रशिक्षण में रोज़ाना लगने वाली शाखा, संघ की कार्यपद्धति, ग्राम विकास, कुटुंब प्रबोधन, आपदा प्रबंधन और पर्यावरण जैसे विषय शामिल थे।

आरएसएस ने कहा कि शताब्दी वर्ष के विभिन्न कार्यक्रमों के जरिए संपर्क में आए लोगों को समाज सेवा और ‘पंच परिवर्तन’ पहल में सक्रिय रूप से शामिल करने की योजनाओं पर चर्चा की गई।

भागवत के 2026-27 के प्रस्तावित प्रवास कार्यक्रम की भी समीक्षा की गई।

बैठक में मौजूदा जनगणना से जुड़े मुद्दों, जनसांख्यिकी असंतुलन से पैदा होने वाली चुनौतियों, नशीली दवाओं के बढ़ते सेवन और नशा-मुक्ति की कोशिशों को प्राथमिकता देने की ज़रूरत पर भी चर्चा की गई।

बयान में कहा गया है कि बैठक में संत शिरोमणि रविदास महाराज की 650वीं जयंती मनाने के कार्यक्रमों पर भी विचार-विमर्श किया गया।

भाषा राजकुमार दिलीप

दिलीप


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