पणजी, छह सितंबर (भाषा) केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने रविवार को कहा कि नरेन्द्र मोदी सरकार देश से नशे की समस्या को भी उसी तरह खत्म करेगी जैसे नक्सलवाद की समस्या का खात्मा किया है।
शाह ने कहा कि पांच दशक पुरानी नक्सलवाद की समस्या अब अतीत की बात बन गई है।
उन्होंने पिछले कुछ वर्षों में वामपंथी उग्रवाद के खिलाफ सुरक्षा बलों के अभियान का जिक्र करते हुए यह बात कही।
इस अभियान के कारण प्रतिबंधित संगठन के शीर्ष नेतृत्व का सफाया हुआ और सैकड़ों उग्रवादियों ने आत्मसमर्पण किया, जिसके बाद सरकार ने इस साल 31 मार्च को देश को नक्सलवाद मुक्त घोषित किया।
शाह यहां मादक पदार्थों के मुद्दे पर हुई उच्चस्तरीय बैठक की अध्यक्षता करने के बाद पत्रकारों को संबोधित कर रहे थे।
बैठक में गोवा के मुख्यमंत्री प्रमोद सावंत और गृह मंत्रालय तथा राज्य सरकार के वरिष्ठ अधिकारी भी शामिल हुए।
शाह ने कहा, ‘पांच दशक पुरानी नक्सलवाद की समस्या आज लगभग अतीत की बात बन चुकी है। रेड कॉरिडोर की कल्पना करने वाले ज्यादातर लोगों ने आज हथियार डालकर आत्मसमर्पण कर दिया है और मुख्यधारा में शामिल हो रहे हैं।’
उन्होंने कहा, ‘जिस तरह देश से नक्सलवाद को खत्म किया गया, उसी तरह केंद्र सरकार नशे की समस्या को भी खत्म करेगी।’
प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी की सराहना करते हुए शाह ने कहा कि केंद्र सरकार ने देश की आंतरिक सुरक्षा को मजबूत करने के लिए कई कदम उठाए हैं।
उन्होंने कहा कि देश के सामने तीन बड़ी चुनौतियां थीं, जिनमें नक्सलवाद, जम्मू-कश्मीर में आतंकवाद और पूर्वोत्तर में सशस्त्र समूहों द्वारा उत्पन्न की गई अशांति शामिल थी।
उन्होंने कहा, ‘इसके अलावा आंतरिक सुरक्षा के मोर्चे पर देश कई बम धमाकों से भी काफी परेशान था। महिलाओं की सुरक्षा को लेकर बड़े स्तर पर आंदोलन हो रहे थे। इसी दौर में मोदी जी ने प्रधानमंत्री पद संभाला था।’
शाह ने कहा कि 2019 से उनके नेतृत्व में स्थिति में काफी बदलाव आया है। उन्होंने मोदी सरकार के प्रयासों की सराहना की।
केंद्रीय गृह मंत्री ने कहा, ‘जम्मू-कश्मीर में अनुच्छेद 370 हटाए जाने के बाद अलगाववाद की भावना में काफी कमी आई है। आतंकवाद के आंकड़े धीरे-धीरे कम हो रहे हैं और शून्य की ओर बढ़ रहे हैं। जम्मू-कश्मीर विकास के रास्ते पर आगे बढ़ रहा है।’
उन्होंने कहा कि जम्मू-कश्मीर और देश के बाकी हिस्सों के बीच मौजूद मानसिक दूरी को कम करने के लिए भी सफल प्रयास किए गए हैं।
शाह ने कहा कि पूर्वोत्तर राज्यों में करीब 11,000 युवाओं ने हथियार डाल दिए।
उन्होंने कहा, ‘‘भारत सरकार ने उनके साथ 14 से अधिक समझौते किए हैं और आज पूर्वोत्तर भी विकास के रास्ते पर आगे बढ़ रहा है।’’
शाह ने कहा कि 2019 के पश्चात अपराध करने के बाद देश से भागने वालों के खिलाफ भी अभियान शुरू किया गया है।
उन्होंने बताया, ‘वर्ष 2019 से जुलाई 2026 तक 36 देशों से कुल 274 भगोड़ों को प्रत्यर्पित किया गया है। इनमें आर्थिक अपराध, आतंकवाद, मादक पदार्थों और गैंगवार जैसे गंभीर अपराधों में संलिप्त लोग भी शामिल हैं।’
भाषा जोहेब सुरेश
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