ऑनलाइन ज्योतिष को नियंत्रित करने के लिए कोई दिशा-निर्देश नहीं हैं: उपभोक्ता मामलों का विभाग
ऑनलाइन ज्योतिष को नियंत्रित करने के लिए कोई दिशा-निर्देश नहीं हैं: उपभोक्ता मामलों का विभाग
नयी दिल्ली, तीन अगस्त (भाषा) उपभोक्ता मामलों के विभाग ने केंद्रीय सूचना आयोग (सीआईसी) को बताया है कि ऑनलाइन ज्योतिष प्लेटफॉर्म को नियंत्रित करने के लिए उसके पास कोई दिशा-निर्देश नहीं हैं। सूचना के अधिकार (आरटीआई) अपील की सुनवाई के दौरान यह जानकारी दी गई।
अपील में आरोप लगाया गया था कि एक ऑनलाइन ज्योतिष पोर्टल अनुचित व्यापारिक गतिविधियों में शामिल है, जिससे ज्योतिषियों को मानसिक, आर्थिक और पेशेवर परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है और आम लोगों के साथ भी धोखाधड़ी हो रही है।
केंद्रीय सूचना आयोग ने विभाग को निर्देश दिया कि यदि इस मामले में कोई जांच हुई है तो उसकी जानकारी दी जाए, पोर्टल के खिलाफ मिली शिकायतों की संख्या बताई जाए और आरटीआई आवेदन के कुछ हिस्से अन्य संबंधित मंत्रालयों को भेजे जाएं।
आरटीआई आवेदन में आरोप लगाया गया था कि यह ऑनलाइन ज्योतिष प्लेटफॉर्म “कई तरह की गलत और अनुचित व्यापारिक गतिविधियों में शामिल है, जिससे ज्योतिषियों को मानसिक, आर्थिक और पेशेवर नुकसान हो रहा है तथा आम लोगों के साथ धोखा किया जा रहा है।”
आवेदन में पूछा गया था कि क्या इस प्लेटफॉर्म के खिलाफ कॉरपोरेट कार्य मंत्रालय (एमसीए), उपभोक्ता मामलों के विभाग या इलेक्ट्रॉनिक्स एवं सूचना प्रौद्योगिकी मंत्रालय ने धोखाधड़ी, ठगी या व्यावसायिक नैतिकता के उल्लंघन के आरोपों की जांच की है।
यह जानकारी भी मांगी गई थी कि पिछले तीन वर्ष में इस प्लेटफॉर्म के खिलाफ कितनी शिकायतें मिलीं, उन पर क्या कार्रवाई की गई, ऐसे प्लेटफॉर्म चलाने के लिए किन लाइसेंस या मंजूरियों की जरूरत होती है और ऑनलाइन ज्योतिष या डिजिटल परामर्श सेवाओं के लिए कौन से दिशा-निर्देश लागू हैं।
आवेदक ने आरोप लगाया कि प्लेटफॉर्म बड़ी संख्या में ज्योतिषियों को नियुक्त करता है, लेकिन उन्हें पर्याप्त काम नहीं देता।
आवेदक के अनुसार उनसे रोज 15 से 18 घंटे तक ऑनलाइन रहने की अपेक्षा की जाती है, जबकि उनकी कमाई 100 रुपये प्रतिदिन से भी कम रहती है। साथ ही उन पर 50,000 रुपये से 1 लाख रुपये तक का अनुचित जुर्माना भी लगाया जाता है।
आवेदन में यह आरोप भी लगाया गया कि प्लेटफॉर्म पर रेटिंग और अन्य आंतरिक मानकों में हेरफेर किया जाता है। साथ ही दावा किया गया कि इस प्लेटफॉर्म का इस्तेमाल चैटिंग या डेटिंग ऐप की तरह किया जा रहा है, जहां महिला ज्योतिषियों को गंभीर मानसिक उत्पीड़न का सामना करना पड़ता है।
सुनवाई के दौरान विभाग की ओर से बताया गया कि राष्ट्रीय उपभोक्ता हेल्पलाइन (एनसीएच) ने इस मामले में कोई जांच नहीं की, क्योंकि वह केवल शिकायतों के समाधान का मंच है।
जब आयोग ने पूछा कि क्या ई-कॉमर्स या ऑनलाइन ज्योतिष प्लेटफॉर्म को नियंत्रित करने के लिए कोई दिशानिर्देश है, तो विभाग ने जवाब दिया कि ऐसा कोई दिशानिर्देश मौजूद नहीं है।
आयोग ने यह भी पूछा कि क्या विभाग इस प्लेटफॉर्म के खिलाफ मिली शिकायतों की संख्या बता सकता है। इस पर विभाग ने कहा कि वह रिकॉर्ड की जांच करके यह जानकारी उपलब्ध कराएगा।
सूचना आयुक्त खुशवंत सिंह सेठी ने कहा कि विभाग ने अपीलकर्ता को केवल आंशिक जानकारी दी है। उन्होंने विभाग को संशोधित जवाब देने का निर्देश दिया।
आयोग ने विभाग को निर्देश दिया कि यदि इस मामले में कोई जांच हुई है तो उसकी तथ्यात्मक जानकारी दी जाए, संबंधित सवाल कॉरपोरेट कार्य मंत्रालय (एमसीए) और इलेक्ट्रॉनिक्स एवं सूचना प्रौद्योगिकी मंत्रालय के केंद्रीय जन सूचना अधिकारियों (सीपीआईओ) को भेजे जाएं, प्राप्त शिकायतों की संख्या बताई जाए और लाइसेंस, मंजूरी तथा नियामकीय दिशा-निर्देश से जुड़े सवाल उन सार्वजनिक प्राधिकरणों को भेजे जाएं, जिनके पास यह जानकारी उपलब्ध होने की संभावना है।
भाषा जोहेब नरेश
नरेश

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