वर्तमान समय में ऐसा कोई क्षेत्र नहीं, जो महिला नेतृत्व से अछूता हो : ओम बिरला

वर्तमान समय में ऐसा कोई क्षेत्र नहीं, जो महिला नेतृत्व से अछूता हो : ओम बिरला

वर्तमान समय में ऐसा कोई क्षेत्र नहीं, जो महिला नेतृत्व से अछूता हो : ओम बिरला
Modified Date: September 7, 2026 / 02:14 pm IST
Published Date: September 7, 2026 2:14 pm IST

फरीदाबाद, सात सितंबर (भाषा) लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला ने सोमवार को कहा कि वर्तमान समय में ऐसा कोई क्षेत्र नहीं है, जो महिला नेतृत्व से अछूता हो और विकसित भारत के संकल्प को साकार करने में महिलाओं का आर्थिक, सामाजिक एवं राजनीतिक सशक्तीकरण महत्वपूर्ण है।

बिरला ने राष्ट्रीय महिला आयोग की ओर से फरीदाबाद में आयोजित दो दिवसीय ‘शी इज अ चेंज मेकर’ कार्यक्रम के उद्घाटन सत्र को संबोधित करते हुए यह भी कहा कि आजादी के आंदोलन से लेकर राष्ट्र निर्माण तक महिलाओं की महत्वपूर्ण भागीदारी रही है।

उन्होंने कहा, ‘‘इस कार्यशाला में महिला विधायक अपने विचार, दृष्टिकोण और अनुभव साझा करें तथा एक-दूसरे से सीखें। लोकतंत्र में संवाद और संवेदना अनिवार्य हैं और महिलाओं की कार्यप्रणाली में ये महत्वपूर्ण विशेषताएं हैं।’’

बिरला ने इस बात पर जोर दिया कि लोगों की कठिनाइयों को दूर करने और उनकी आकांक्षाओं को साकार करने में महिला नेतृत्व की अहम भूमिका है।

उन्होंने कहा कि संविधान ने सभी नागरिकों को समान अवसर और समानता का अधिकार दिया है तथा महिलाओं को आगे बढ़ाने के लिए भी प्रावधान किए गए हैं।

लोकसभा अध्यक्ष ने कहा कि आजादी के बाद संसद ने कई कानूनों के माध्यम से महिलाओं को सशक्त और आत्मनिर्भर बनाने का काम किया है।

उन्होंने इस बात का उल्लेख किया कि भारत दुनिया का सबसे बड़ा लोकतंत्र है और विधायिका में महिलाओं के लिए 33 प्रतिशत आरक्षण सुनिश्चित किया गया है।

उन्होंने कहा कि राज्य विधानसभाओं से लेकर संसद तक महिलाएं हमेशा प्रखरता से अपने विचार रखती रही हैं।

उनके अनुसार महिलाओं की कार्यप्रणाली में अधिक संवेदना होती है, जिससे वे बेहतर क्षमता के साथ कार्य कर पाती हैं।

बिरला ने कहा कि अखिल भारतीय सेवाओं में एक समय 15 से 20 प्रतिशत महिलाएं नेतृत्व की भूमिका में होती थीं, जबकि आज यह संख्या करीब 40 प्रतिशत है।

उन्होंने उम्मीद जताई कि आने वाले समय में यह संख्या 50 प्रतिशत से अधिक होगी।

लोकसभा अध्यक्ष ने कहा कि विकसित भारत के संकल्प में महिलाओं का आर्थिक, सामाजिक और राजनीतिक सशक्तीकरण एक महत्वपूर्ण पहलू है।

भाषा हक वैभव

वैभव


लेखक के बारे में