बेंगलुरु, 21 जुलाई (भाषा) कर्नाटक के उपमुख्यमंत्री जी. परमेश्वर ने स्थायी निवास प्रमाणपत्र जारी करने संबंधी राज्य सरकार के फैसले का बचाव करते हुए मंगलवार को कहा कि यह पहल मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण (एसआईआर) में वास्तविक निवासियों की मदद के लिए की गई है और इसे राजनीतिक रंग नहीं दिया जाना चाहिए।
परमेश्वर ने यहां संवाददाताओं से कहा कि ये प्रमाणपत्र उन लोगों के लिए लाभकारी होंगे, जो एसआईआर के दौरान मांगे जा रहे पुराने रिकॉर्ड उपलब्ध नहीं करा पा रहे हैं। उन्होंने कहा कि प्रमाणपत्र से जुड़ी प्रक्रिया पूरी तरह कानून के अनुसार की जा रही है।
उन्होंने कहा, ‘‘सरकार ने आवेदकों के कर्नाटक में जन्म के आधार पर स्थायी निवास प्रमाणपत्र जारी करने का फैसला किया है। (एसआईआर की प्रक्रिया में) ज्यादातर लोगों से 2002 की मतदाता सूची का विवरण मांगा गया है। करीब 50 से 60 प्रतिशत लोगों के पास ऐसे रिकॉर्ड हो सकते हैं। हालांकि, कुछ लोगों के पास ये रिकॉर्ड नहीं भी हो सकते हैं। ऐसे लोगों के लिए स्थायी निवास प्रमाणपत्र मददगार साबित होगा।’’
परमेश्वर ने कहा कि तहसीलदार पहले भी जाति प्रमाणपत्र जारी करते रहे हैं और सरकार की इस पहल की आलोचना पर सवाल उठाया।
उन्होंने कहा, ‘‘हमें इस प्रक्रिया को औपचारिक रूप देना होगा। यदि आवेदक यह प्रमाण देते हैं कि वे 10 वर्षों से कर्नाटक में रह रहे हैं, तो उन्हें प्रमाणपत्र जारी किया जाएगा। क्या हम अपनी बेटियों की शादी बांग्लादेशियों से कर सकते हैं? नहीं। हम न तो केंद्र सरकार के खिलाफ काम कर रहे हैं और न ही किसी कानून का उल्लंघन कर रहे हैं। हम पूरी तरह कानून के अनुसार आगे बढ़ रहे हैं।’’
राज्य में सूखे की स्थिति पर उन्होंने कहा, ‘‘फैसला किसानों और आम लोगों के हित में होना चाहिए। यह उन लोगों की भी सहायता करने वाला होना चाहिए, जिन्हें रोजगार न मिल पाने के कारण काम की तलाश में पलायन करना पड़ता है।’’ उन्होंने कहा कि सभी पहलुओं पर विचार करने के बाद निर्णय लिया जाएगा।
उन्होंने बताया कि उपायुक्तों को पहले ही निर्देश दिए जा चुके हैं कि वे तालुकों में सूखे जैसी स्थिति का आकलन करें, जिसके बाद आगे की कार्रवाई की जाएगी।
सूखे के प्रबंधन को लेकर भाजपा की आलोचना को खारिज करते हुए परमेश्वर ने कहा कि हर जिले को पेयजल व्यवस्था के लिए 5 करोड़ रुपये जारी किए गए हैं। उपायुक्तों के व्यक्तिगत जमा खातों में 329 करोड़ रुपये हैं और सरकार ने प्रत्येक तालुक के लिए 1 करोड़ रुपये आवंटित करने की घोषणा भी की है।
उन्होंने कहा, ‘‘भाजपा नेताओं को इन सभी उपायों को समझना चाहिए और जिम्मेदाराना बयान देना चाहिए।’’
राज्य में जारी एसआईआर प्रक्रिया के बीच, मुख्यमंत्री डी. के. शिवकुमार ने रविवार को घोषणा की थी कि घर-घर जाकर स्थायी निवास प्रमाणपत्र उपलब्ध कराया जाएगा। उन्होंने कहा था कि लोगों के निवास और मतदान के अधिकार की रक्षा के लिए ऐसा कदम उठाने वाला कर्नाटक देश का एकमात्र राज्य है।
वहीं, भाजपा ने इस फैसले पर तीखी प्रतिक्रिया व्यक्त करते हुए कहा कि यह कदम संविधान का उल्लंघन है और इसके गंभीर परिणाम हो सकते हैं।
भाषा सुभाष दिलीप
दिलीप