बांधवगढ़-अचानकमार बाघ गलियारा के नजदीक एक महीने से कम समय में तीसरी खनन योजना को मंजूरी

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बांधवगढ़-अचानकमार बाघ गलियारा के नजदीक एक महीने से कम समय में तीसरी खनन योजना को मंजूरी

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  • Publish Date - August 6, 2026 / 08:42 PM IST,
    Updated On - August 6, 2026 / 08:42 PM IST

नयी दिल्ली, छह अगस्त (भाषा) एक महीने से भी कम समय में मध्य प्रदेश के उमरिया जिले में बांधवगढ़ बाघ अभयारण्य को अचानकमार वन्यजीव अभयारण्य से जोड़ने वाले अहम बाघ गलियारे के नजदीक तीसरे कोयला ब्लॉक को खनन के लिए पर्यावरण मंत्रालय की विशेषज्ञ समिति से अहम मंजूरी मिल गई है।

पर्यावरण मंत्रालय की विशेषज्ञ समिति ने नवीनतम मंजूरी ‘पठोरा पूर्व भूमिगत कोयला खदान’(सोहागपुर कोलफील्ड) को दी है जो बांधवगढ़-अचानकमार बाघ गलियारा से लगभग 1.5 किलोमीटर दूर है। यह फैसला 27 जुलाई को हुई समिति की बैठक में लिया गया।

इससे पहले, 8-9 जुलाई को हुई बैठकों में समिति ने मारवाटोला-7 कोयला ब्लॉक और अर्जुनी पूर्वी कोयला ब्लॉक से खनन के लिए पर्यावरणीय मंजूरी देने की सिफारिश की थी। ये खदान बांधवगढ़-अचानकमार बाघ गलियारे से क्रमशः 53 मीटर और 3.9 मीटर की दूरी पर स्थित हैं।

बाघ गलियारों को बहुत अहम माना जाता है क्योंकि ये जैव विविधता बनाए रखने, बाघों को आपस में प्रजनन करने और सभी जानवरों व पौधों का विस्तृत क्षेत्र में विस्तार के लिए मददगार होते हैं।

ऐसे गलियारे बड़े प्राकृतिक आवास तक पहुंच भी देते हैं, प्रजातियों को मुश्किल इलाकों को पार करने में मदद करते हैं, और उनके दायरे को बढ़ाकर नई जगहों पर बसने में सहायक होते हैं।

‘दीर्घकालिक संरक्षण के लिए बाघों को आपस में जोड़ना’ विषय पर 2014 में जारी एक दस्तावेज में कहा गया था कि बांधवगढ़-अचानकमार गलियारा ‘दो बहुत महत्वपूर्ण उप-भूपरिदृश्यों कान्हा-पेंच (बाघ) और बांधवगढ़-संजय-दुबरी के बाघों को जोड़ता है।

इस दस्तावेज को राष्ट्रीय बाघ संरक्षण प्राधिकरण (एनटीसीए) और भारतीय वन्यजीव संस्थान (डब्ल्यूआईआई) ने मिलकर प्रकाशित किया था।

इसमें यह भी कहा गया है कि पारिस्थितिकी और सामाजिक-आर्थिक पहलुओं के मद्देनजर इस गलियारे को बहाल करने के लिए ‘‘विशेष ध्यान’’ देने की ज़रूरत है।

दस्तावेज के मुताबिक, ‘‘इस इलाके में कोयला मौजूद होने की वजह से, कोयला खनन से जुड़े आधारभूत अवसंरचना विकास का दबाव हमेशा बना रहता है।’’

विशेषज्ञ आकलन समिति (ईएसी) बैठक विवरण के मुताबिक पठोरा पूर्व भूमिगत कोयला ब्लॉक के लिए पट्टा क्षेत्र 1,000 हेक्टेयर से अधिक है, जिसमें 800 हेक्टेयर से अधिक वन भूमि शामिल है।

हालांकि, बजरंग पावर एंड इस्पात लिमिटेड द्वारा संचालित की जाने वाली प्रस्तावित परियोजना के तहत केवल 20 हेक्टेयर भूमि का ही उपयोग होगा, क्योंकि इसमें भूमिगत खनन किया जाएगा।

परियोजना स्थल पर वन्यजीव संरक्षण सूची-1 में शामिल 31 प्रजातियां पाई जाती हैं, जिनमें सियार, भालू, बाघ, तेंदुआ, जंगली बिल्ली और धारीदार लकड़बग्घा आदि शामिल हैं।

ईएसी ने कई शर्तों के आधार पर पर्यावरणीय मंजूरी देने की सिफारिश की। उदाहरण के लिए, समिति ने कहा कि परियोजना प्रवर्तक को परियोजना में शामिल 809.892 हेक्टेयर वन भूमि के गैर-वन उपयोग के लिए चरण-एक (सैद्धांतिक) वन मंजूरी (फॉरेस्ट क्लीयरेंस) प्रस्तुत करनी होगी।

समिति ने कहा कि परियोजना प्रवर्तक को राज्य वन विभाग द्वारा डब्ल्यूआईआई के ज़रिए तैयार किए जा रहे क्षेत्रीय वन्यजीव संरक्षण योजना का अनुपालन करना होगा।

भाषा धीरज अमित

अमित