चेन्नई, 13 जुलाई (भाषा) तमिलनाडु में नई तमिलगा वेत्री कषगम (टीवीके) सरकार में शामिल होने के विदुथलाई चिरुथिगल काच्चि (वीसीके) के निर्णय के बाद द्रविड़ मुनेत्र कषगम (द्रमुक) के साथ उसके रिश्तों में तनाव आ जाने के बीच वीसीके प्रमुख थोल थिरुमावलवन ने केंद्र में भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) के खिलाफ द्रमुक और मुख्यमंत्री सी. जोसेफ़ विजय की अगुवाई वाली टीवीके के बीच सहयोग की वकालत की है।
थिरुमावलवन ने दावा किया कि भाजपा और सांप्रदायिक राजनीति के खिलाफ एक राष्ट्रीय गठबंधन बनाने की जरूरत है। उन्होंने केरल या पश्चिम बंगाल मॉडल की तर्ज राष्ट्रीय स्तर पर एक संयुक्त मोर्चा बनाने का सुझाव दिया।
द्रमुक और टीवीके तमिलनाडु में एक दूसरे के राजनीतिक शत्रु हैं। द्रमुक ने थिरुमावलवन की राय को यह कहते हुए खारिज कर दिया कि ऐसी व्यवस्था काम नहीं करेगी।
द्रमुक ने कहा कि उसका नेतृत्व विदुथलाई चिरुथिगल काच्चि का प्रस्ताव स्वीकार नहीं करेगा।
द्रमुक सांसद गणपति राजकुमार ने तर्क दिया कि तमिलनाडु में ‘स्प्लिट-अलायंस’ मॉडल काम नहीं कर सकता और उनकी पार्टी इस बात पर अडिग है कि वह टीवीके के साथ कोई मंच साझा नहीं करेगी, क्योंकि टीवीके ने द्रमुक को अपना मुख्य राजनीतिक दुश्मन घोषित किया है।
‘स्प्लिट-अलायंस’ मॉडल में दो राजनीतिक दल राज्य स्तर पर एक दूसरे के विरोधी होते हैं लेकिन राष्ट्रीय स्तर पर किसी तीसरे दल का विरोध करने के लिए साथ आ जाते हैं।
हाल में वीसीके प्रमुख ने अरियालुर में पत्रकारों से कहा था, ‘‘मोर्चे में द्रमुक और टीवीके दोनों को जगह मिलनी चाहिए।’’
वैसे तो वीसीके ने द्रमुक से अपना नाता तोड़ने की आधिकारिक घोषणा नहीं की है, लेकिन अप्रैल में विधानसभा चुनाव में द्रमुक की हार के बाद दोनों पार्टियों के बीच तनाव पैदा हो गया। यह तनाव तब शुरू हुआ जब कांग्रेस, आईयूएमएल और वीसीके जैसे द्रमुक सहयोगी एक-एक करके टीवीके सरकार में शामिल हो गए, जबकि वामदलों ने सरकार को बिना किसी शर्त के समर्थन दिया।
यह वैचारिक बहस रविवार को एक खुली राजनीतिक लड़ाई में बदल गई, जब थिरुमावलवन ने द्रमुक पर तीखे हमले किए।
तिरुवन्नामलाई और धर्मपुरी में उन्होंने एम.के. स्टालिन के नेतृत्व वाले द्रमुक पर अपने सहयोगियों के साथ ‘खराब व्यवहार’ करने का आरोप लगाया। उन्होंने यहां तक कह दिया कि द्रमुक ने सत्ता में हिस्सेदारी देने से इनकार कर दिया था और यही उनके चुनावी नुकसान की वजह थी।
उन्होंने कहा, ‘‘अगर द्रमुक ने गठबंधन सरकार बनाने की बात कही होती और अपने सहयोगियों की भावनाओं का सम्मान करते हुए उन्हें उनकी पसंद की सीटों और निर्वाचन क्षेत्रों की संतोषजनक संख्या दी होती, तो शायद उसे इतना बड़ा झटका नहीं लगता।’’
उन्होंने द्रमुक पर दलित-बहुल पार्टी को कमजोर करने के मकसद से वीसीके के पूर्व विधायक पनैयुर बाबू को ‘अपनी ओर करने’ का आरोप भी लगाया।
तंजावुर में थिरुमावलवन ने इस बात पर गहरी चिंता जताई कि द्रविड़ राजनीति का भविष्य सवालों के घेरे में है, क्योंकि द्रमुक अलग-थलग पड़ रही है और अन्नाद्रमुक में टूटफूट हो रही है।
उन्होंने कहा कि क्षेत्रीय नेतृत्व की इस कमज़ोरी का फ़ायदा बाहरी ताकतें, खासकर भाजपा और राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (आरएसएस) उठा रहे हैं।
उन्होंने चेतावनी दी कि अगर ये क्षेत्रीय पार्टियां एक मज़बूत विपक्ष के तौर पर नाकाम रहती हैं, तो दिल्ली या पश्चिम बंगाल की भांति सत्ताधारी ताकतों को कमज़ोर कर उन्हें खत्म किया जा सकता है।
भाषा
राजकुमार मनीषा
मनीषा