नयी दिल्ली, 11 जुलाई (भाषा) उत्तरी दिल्ली के बुराड़ी फ्लाईओवर के पास 37.5 लाख रुपये की लूट की घटना कंपनी के दो कर्मचारियों द्वारा अपने साथियों के साथ मिलकर रची गई साजिश निकली। अधिकारियों ने शनिवार को यह जानकारी दी।
उन्होंने बताया कि पुलिस ने मामले का खुलासा करते हुए लूटी गई लगभग पूरी रकम बरामद कर ली है।
पुलिस के अनुसार, कंपनी के विज्ञापन और समाचारपत्र प्रकाशन कारोबार से जुड़े दो कर्मचारियों समेत तीन आरोपियों को शुक्रवार को गिरफ्तार कर लिया गया, जबकि अन्य आरोपियों की तलाश जारी है।
पुलिस ने बताया कि नौ जुलाई को वजीराबाद थाने में पीसीआर को नकदी लूट की सूचना मिली थी। शिकायतकर्ता मोहन दास ने बताया था कि वह अपने सहकर्मियों अभिषेक और योगेश के साथ चांदनी चौक से 45.5 लाख रुपये नकद लेकर अपने नियोक्ता के सरस्वती विहार स्थित आवास पर पहुंचाने जा रहा था।
इस संबंध में एक अधिकारी ने कहा, ‘‘मोहन दास और अभिषेक एक मोटरसाइकिल पर 37.5 लाख रुपये से भरा बैग लेकर जा रहे थे, जबकि योगेश दूसरी मोटरसाइकिल पर आठ लाख रुपये लेकर उनके पीछे चल रहा था।’’
अधिकारी ने बताया कि आउटर रिंग रोड पर बुराड़ी फ्लाईओवर के पास शाम करीब छह बजे काले रंग की मोटरसाइकिल पर सवार तीन लोगों ने कथित तौर पर उनकी मोटरसाइकिल को टक्कर मारकर रोक लिया, 37.5 लाख रुपये से भरा बैग छीन लिया और निरंकारी भवन की ओर फरार हो गए।
उन्होंने कहा कि शिकायतकर्ता और अभिषेक ने राहगीरों की मदद से एक संदिग्ध को कथित तौर पर पकड़ लिया था, लेकिन पुलिस को सूचना देने के बजाय अभिषेक और योगेश उसे अपनी मोटरसाइकिल पर बादली स्थित कार्यालय की ओर ले गए। बाद में उन्होंने दावा किया कि जीटीबी नगर मेट्रो स्टेशन के पास आरोपी ने योगेश के कंधे पर काट लिया और वहां से भाग निकला।
अधिकारी ने बताया कि इस संबंध में 10 जुलाई को वजीराबाद थाने में प्राथमिकी दर्ज कर जांच शुरू की गई।
जांच के दौरान पुलिस ने चांदनी चौक से बुराड़ी और मुखर्जी नगर तक की सीसीटीवी फुटेज खंगाले, कॉल डिटेल रिकॉर्ड (सीडीआर) का विश्लेषण किया और कंपनी के कर्मचारियों से पूछताछ की। जांचकर्ताओं को उस समय संदेह हुआ, जब अभिषेक ने दावा किया कि पकड़े गए आरोपी ने भागते समय उसका मोबाइल फोन भी छीन लिया था।
पुलिस के अनुसार, योगेश के कंधे पर कथित तौर पर काटने का निशान वास्तविक नहीं लगा। कर्मचारियों की मोटरसाइकिल की तलाशी लेने पर कथित रूप से लूटा गया मोबाइल फोन वाहन के स्टोरेज बॉक्स से बरामद हो गया, जिससे आरोपी के फरार होने की कहानी मनगढ़ंत साबित हुई।
इसने कहा कि लगातार पूछताछ में अभिषेक और योगेश ने लूट की साजिश रचने की बात स्वीकार कर ली और अपने सहयोगी विपिन का नाम भी बताया।
पुलिस के अनुसार, तकनीकी निगरानी से पुष्टि हुई कि चांदनी चौक में नकदी एकत्र किए जाने के समय विपिन भी वहां मौजूद था। इसके बाद जांचकर्ताओं ने जाल बिछाया और उसे यह विश्वास दिलाया कि उसके साथी पुलिस के शक से बच निकले हैं तथा लूटी गई रकम में अपने हिस्से की मांग कर रहे हैं।
पुलिस के अनुसार, इस योजना पर भरोसा करते हुए विपिन ने जहांगीरपुरी में अपना ठिकाना बता दिया, जहां से उसे शुक्रवार को कथित तौर पर भागने की कोशिश के दौरान गिरफ्तार कर लिया गया।
इसने बताया कि उसके घर की तलाशी में 36.92 लाख रुपये नकद, चार मोबाइल फोन और वारदात में इस्तेमाल की गई मोटरसाइकिल बरामद की गई।
पूछताछ में आरोपियों ने बताया कि उनकी पहचान रोहिणी में विपिन द्वारा संचालित एक कैफे में हुई थी।
पुलिस के अनुसार, यह जानकारी होने के कारण कि अभिषेक और योगेश अपने नियोक्ता के लिए नियमित रूप से बड़ी मात्रा में नकदी ले जाते थे। उन्होंने कथित तौर पर चार अन्य साथियों की मदद से लूट की वारदात की साजिश रची।
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राखी नेत्रपाल
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