बंगाल की सत्ता में तीन महीने: भाजपा अपने संगठन का ‘तृणमूलकरण’ रोकने के लिए कर रही संघर्ष

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बंगाल की सत्ता में तीन महीने: भाजपा अपने संगठन का ‘तृणमूलकरण’ रोकने के लिए कर रही संघर्ष

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  • Publish Date - August 18, 2026 / 05:08 PM IST,
    Updated On - August 18, 2026 / 05:08 PM IST

कोलकाता, 18 अगस्त (भाषा) भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) ने पश्चिम बंगाल में सत्ता की लड़ाई तो जीत ली है, लेकिन सरकार बनने के तीन महीने बाद ही उसे एक मुश्किल राजनीतिक परीक्षा का सामना करना पड़ रहा है। यह परीक्षा पार्टी के विस्तार और मजबूती की होने के साथ ही इस बात की भी है कि संगठन और पहचान उस राजनीतिक संस्कृति के सांचे में न ढल जाए, जिसके ख़िलाफ़ उसने बरसों तक आवाज उठाई।

यह विरोधाभास दो मोर्चों पर तेज़ी से साफ़ दिखाई दे रहा है।

संगठनात्मक स्तर पर, प्रदेश भाजपा अध्यक्ष समिक भट्टाचार्य ने जबरन वसूली, डराने-धमकाने और ऐसी अन्य गतिविधियों के खिलाफ कड़ी चेतावनी जारी की है। यदि इस पर काबू नहीं पाया गया तो भाजपा और उस तृणमूल कांग्रेस के बीच कोई फर्क नहीं रह जाएगा जिसे सत्ताच्युत होना पड़ा है।

राजनीतिक तौर पर, पार्टी को अपने कुछ कार्यकर्ताओं की नाराजगी का सामना करना पड़ रहा है। यह नाराज़गी पूर्व तृणमूल नेताओं और बागी नेताओं को पार्टी में शामिल करने तथा उनसे बढ़ती नज़दीकियों को लेकर है। इनमें से कुछ नेताओं पर भाजपा ने पिछली सरकार के कथित भ्रष्टाचार और राजनीतिक संस्कृति के प्रतीक के तौर पर हमले किए थे।

ये दोनों चुनौतियां आपस में गहराई से जुड़ी हैं। इन सबके मूल में एक ऐसा सवाल है जिसे बंगाल भाजपा अब और नज़रअंदाज़ नहीं कर सकती: तृणमूल कांग्रेस से जुड़ी राजनीतिक कार्यप्रणालियों को अपनाए बिना, पार्टी उस राजनीतिक तंत्र के कितने हिस्से को अपने में समाहित कर सकती है जिसे उसने हराया है?

भट्टाचार्य ने साफ़ कर दिया है कि पार्टी के अनुशासन के नियमों में कोई ढील नहीं दी जाएगी।

हाल में भाजपा विधायकों और ज़िला अध्यक्षों के लिए आयोजित एक संगठनात्मक प्रशिक्षण कार्यक्रम में, उन्होंने चुने हुए प्रतिनिधियों को आगाह किया कि वे अपनी विधानसभा सीटों पर ‘‘मुख्यमंत्री’’ की तरह व्यवहार न करें। साथ ही, उन्होंने उन्हें फ़्लैट की नाप-जोख करने, दुकानों या घरों पर ताला लगाने और स्थानीय मामलों में दखल देने जैसी गतिविधियों से भी दूर रहने की चेतावनी दी।

भट्टाचार्य ने कहा, ‘‘ऐसा कुछ न करें जिससे लोग आपमें और तृणमूल कांग्रेस में कोई फ़र्क न कर पाएं।’’

उन्होंने यह भी चेतावनी दी कि पार्टी गलत रास्ते पर चलने वाले नेताओं का रिकॉर्ड रख रही है और अगर उन्होंने अपना व्यवहार नहीं सुधारा, तो सही समय पर उन ‘‘फ़ाइलों’’ को खोला जा सकता है।

भट्टाचार्य ने साफ़ किया कि निर्वाचित प्रतिनिधि भी कार्रवाई से नहीं बचेंगे; और भ्रष्टाचार में शामिल किसी भी विधायक या सांसद को बख्शा नहीं जाएगा।

प्रदेश भाजपा ने 22 पदाधिकारियों को निलंबित कर दिया है, जिनमें मंडल स्तर के कई नेता भी शामिल हैं। इन नेताओं और कार्यकर्ताओं को जबरन वसूली, तृणमूल कांग्रेस के दफ्तरों पर कब्ज़ा करने की कोशिश और पार्टी-विरोधी गतिविधियों जैसे आरोपों के चलते ‘कारण बताओ’ नोटिस जारी किए गए थे।

यह कार्रवाई इसलिए अहम है, क्योंकि बंगाल में भाजपा का उभार मुख्य रूप से तृणमूल के ‘‘कट-मनी, सिंडिकेट और जबरन वसूली’’ वाले नेटवर्क का विकल्प देने के वादे पर हुआ था।

मंत्री अग्निमित्रा पॉल ने कहा, ‘‘हम सबके सामने कुछ और, तथा निजी तौर पर कुछ और नहीं कहेंगे। हम पिछली सरकार जैसे नहीं हैं। हम जो कहते हैं, वह करते हैं।’’ उन्होंने कहा कि जबरन वसूली में शामिल लोगों के ख़िलाफ़ कार्रवाई की जाएगी।

इस संबंध में एक राजनीतिक विश्लेषक ने कहा, ‘‘भाजपा के लिए खतरा यह नहीं है कि तृणमूल नेता उसमें शामिल हो रहे हैं; बल्कि खतरा यह है कि भाजपा और तृणमूल के बीच का फ़र्क धीरे-धीरे उसके अपने कार्यकर्ताओं और मतदाताओं की नज़र में खत्म हो सकता है।’’

भाषा

नेत्रपाल सुरेश

सुरेश