अन्नाद्रमुक के तीन बागी विधायकों ने इस्तीफा सौंपा, टीवीके में शामिल होने की संभावना
अन्नाद्रमुक के तीन बागी विधायकों ने इस्तीफा सौंपा, टीवीके में शामिल होने की संभावना
चेन्नई, 25 मई (भाषा) ऑल इंडिया अन्ना द्रविड़ मुन्नेत्र कषगम (अन्नाद्रमुक) को सोमवार को एक और बड़ा झटका लगा, जब पार्टी के तीन विधायकों ने इस्तीफा दे दिया।
वरिष्ठ नेताओं- सी.वी. षणमुगम और एस.पी. वेलुमणि के गुट में शामिल इन तीनों विधायकों के सत्तारूढ़ तमिलगा वेत्री कषगम (टीवीके) में शामिल होने की संभावना है।
इस घटनाक्रम को विपक्षी द्रविड़ मुन्नेत्र कषगम (द्रमुक) और अन्नाद्रमुक दोनों ने “विधायकों की खरीद-फरोख्त” करार दिया है। अन्नाद्रमुक के प्रमुख ई.के. पलानीस्वामी ने टीवीके सरकार पर “बेईमानी” का आरोप लगाते हुए कहा कि यह तमिलनाडु की राजनीति में नयी और पूर्व-नियोजित साजिश है।
पिछले महीने 23 तारीख को हुए चुनाव के कुछ हफ्तों बाद यह घटनाक्रम सामने आया है। चुनाव में अन्नाद्रमुक को हार मिली थी, जिसके बाद पार्टी में दो गुट बन गए थे। एक गुट पलानीस्वामी, जबकि दूसरा षणमुगम और वेलुमणि के साथ है। षणमुगम और वेलुमणि गुट के 25 विधायक टीवीके सरकार के पक्ष में थे।
विधानसभा अध्यक्ष जे.सी.डी. प्रभाकर द्वारा तीन विधायकों का इस्तीफा स्वीकार करने के बाद अब 234-सदस्यीय विधानसभा में अन्नाद्रमुक के विधायकों की संख्या 47 से घटकर 44 रह गई है।
तीनों विधायकों (मदुरंथकम से निर्वाचित एम. कुमारवेल, धारापुरम से निर्वाचित सत्यभामा और पेरुंदुरई से चुने गए जयकुमार) ने पहले विधानसभा अध्यक्ष से मुलाकात की और बाद में टीवीके नेता एवं मंत्री ए. अर्जुन से भी मिले।
कुमारवेल ने कहा कि वे जल्द ही पनैयूर में स्थित टीवीके मुख्यालय में पार्टी में शामिल होंगे।
विधानसभा अध्यक्ष ने कहा कि इस्तीफे निर्धारित प्रक्रिया के अनुसार स्वीकार किए गए हैं और इसकी सूचना निर्वाचन आयोग को भेजी जाएगी।
इस बीच, षणमुगम-वेलुमणि गुट में शामिल अन्नाद्रमुक के पांच विधायक फिर से पलानीस्वामी के खेमे में चले गए।
इस घटनाक्रम पर प्रतिक्रिया मांगे जाने पर षणमुगम ने संवाददाताओं से कहा, “बाद में बात करेंगे।”
तीन विधायकों ने यहां सचिवालय में प्रभाकर से मुलाकात कर अपना इस्तीफा सौंपा। धारापुरम (तिरुप्पुर) और पेरुंदुरई (इरोड) पश्चिमी तमिलनाडु के कोंगु क्षेत्र में आते हैं और अन्नाद्रमुक के पारंपरिक गढ़ रहे हैं। मदुरंथकम चेन्नई के पास स्थित है।
इस्तीफे के कुछ देर बाद तीनों विधायकों ने ए. अर्जुन के कक्ष में उनसे मुलाकात की।
कुमारवेल, सत्यभामा और जयकुमार उन 25 विधायकों में शामिल थे, जिन्होंने पार्टी के निर्देशों की अवहेलना करते हुए मुख्यमंत्री विजय के विश्वास मत हासिल करने के दौरान टीवीके सरकार के समर्थन में मतदान किया था।
इस बीच, षणमुगम-वेलुमणि गुट में शामिल अन्नाद्रमुक के पांच विधायक फिर से पलानीस्वामी के खेमे में चले गए। इसके साथ ही विधानसभा में पलानीस्वामी समर्थक विधायकों की संख्या बढ़कर 27 हो गई।
वेलुमणि गुट छोड़ने वाले विधायकों में एस.एम. सुकुमार (आर्कोट) भी शामिल हैं।
तीन विधायकों के इस्तीफे और पांच विधायकों के पलानीस्वामी खेमे में लौटने के बाद, बागी गुट में शामिल विधानसभा सदस्यों की संख्या अब 25 से घटकर 17 रह गई है।
विधानसभा अध्यक्ष ने तीनों विधायकों के इस्तीफे स्वीकार कर लिए हैं, जिसके बाद तमिलनाडु में चार विधानसभा सीट पर उपचुनाव होने की संभावना बन गई है। इन सीट में मुख्यमंत्री सी. जोसेफ विजय की ओर से खाली की गई तिरुचिरापल्ली ईस्ट सीट भी शामिल है।
विधानसभा अध्यक्ष प्रभाकर ने संवाददाताओं को बताया कि अन्नाद्रमुक के तीनों विधायकों के इस्तीफे तय प्रक्रिया के अनुसार सही प्रारूप में मिले, इसलिए उन्हें स्वीकार कर लिया गया।
उन्होंने एक सवाल का जवाब देते हुए कहा, “इस्तीफा देने के लिए कारण बताना जरूरी नहीं है।”
विधानसभा चुनाव परिणाम घोषित होने के 21 दिन के अंदर अन्नाद्रमुक में इस टूट को पार्टी के लिए बड़ा झटका माना जा रहा है। वहीं, द्रमुक को भी झटका लगा है, क्योंकि उसके सहयोगी दल कांग्रेस, वीसीके और आईयूएमएल टीवीके सरकार में शामिल हो गए हैं, जबकि वाम दलों ने विजय के नेतृत्व वाली सरकार को समर्थन दिया है।
इस बीच, अन्नाद्रमुक के षणमुगम गुट का समर्थन करने वाले पांच विधायकों ने पलानीस्वामी के ग्रीनवेज रोड स्थित आवास पर उनसे मुलाकात की और उनके खेमे में लौट गए। बाद में उन्होंने विधानसभा अध्यक्ष को पत्र भेजकर कहा कि वे अब पलानीस्वामी के नेतृत्व में काम करेंगे।
अन्नाद्रमुक के गुटों के बीच सुलह की अटकलों के बीच, षणमुगम गुट का समर्थन करने वाले पांच विधायकों ने चेन्नई में स्थित ग्रीनवेज रोड पर पलानीस्वामी के आवास पर उनसे मुलाकात की और पार्टी में लौट गए।
बाद में, उन्होंने विधानसभा अध्यक्ष को पत्र भेजकर कहा कि वे अब पलानीस्वामी के नेतृत्व में काम करेंगे।
सुकुमार ने कहा, “हमने अपने महासचिव को एक पत्र सौंपा, जिसमें विधानसभा में बहुमत परीक्षण के दौरान हुई कुछ गलतियों पर खेद व्यक्त किया गया। हमने कहा कि हम पांचों उनके नेतृत्व में काम करेंगे और अन्नाद्रमुक में लौट आए हैं।”
पलानीस्वामी गुट में लौटे अन्य विधायकों में पी. हरिबास्कर (अंथियूर), दिलीपन जयशंकर (शंकरकोइल), एन.एस.एन. नटराजन (कांगयम) और के. मोहन (पणरुति) शामिल हैं।
पलानीस्वामी ने तीन विधायकों के इस्तीफे पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि सचिवालय के भूतल पर उनके इस्तीफे स्वीकार किए गए, वहीं पर प्रथम तल पर एक मंत्री के हाथों उन्हें पार्टी सदस्यता कार्ड भी दे दिए गए।
उन्होंने इसे “पूर्व-नियोजित साजिश” और “विधायकों की खरीद-फरोख्त” करार दिया। उन्होंने कहा कि अन्नाद्रमुक ने जनता की सेवा करते हुए कई बार पीठ में घोंपे गए छुरे और “विश्वासघात” झेले हैं।
टीवीके प्रमुख सी. जोसेफ विजय का अप्रत्यक्ष रूप से जिक्र करते हुए उन्होंने कहा कि जनता ने “सिनेमा सेलिब्रिटी के सिंबल” के खिलाफ वोट किया है। उनका इशारा टीवीके के चुनाव चिह्न सीटी की ओर था।
उन्होंने यह भी कहा कि जो लोग दूसरों के सहारे आगे बढ़ते हैं, उन्हें जनता जल्द ही सबक सिखाएगी।
इस बीच द्रमुक के प्रमुख एम.के. स्टालिन ने भी टीवीके पर तीखा हमला बोलते हुए कहा कि “विधायकों की खरीद-फरोख्त” बहुत तेज़ी से हुई है।
उन्होंने आरोप लगाया कि टीवीके ने पहले सरकार बनाने के लिए द्रमुक के सहयोगियों का समर्थन मांगा, फिर अन्नाद्रमुक के कुछ विधायकों को अपने पक्ष में वोट देने के लिए आकर्षित किया, और बाद में उन्हें इस्तीफा दिलाकर अपने पाले में कर लिया।
भाषा जोहेब सुरेश
सुरेश

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