तिब्बती राजनीतिक प्रमुख ने पद की शपथ ली, दलाई लामा की ‘मध्य मार्ग की नीति’ के प्रति जताई प्रतिबद्धता

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तिब्बती राजनीतिक प्रमुख ने पद की शपथ ली, दलाई लामा की 'मध्य मार्ग की नीति' के प्रति जताई प्रतिबद्धता

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  • Publish Date - May 27, 2026 / 07:07 PM IST,
    Updated On - May 27, 2026 / 07:07 PM IST

धर्मशाला (हिमाचल प्रदेश), 27 मई (भाषा) तिब्बत की ‘‘निर्वासित सरकार’’ के प्रमुख पेनपा शेरिंग ने पुनः निर्वाचित होने के बाद बुधवार को यहां अपने शपथ ग्रहण के दौरान, चीन सरकार के साथ मुद्दों के समाधान के लिए तिब्बती धर्मगुरु दलाई लामा की ‘‘मध्य मार्ग की नीति’’ के प्रति अपनी प्रतिबद्धता जताई।

मैक्लोडगंज में शपथ ग्रहण समारोह के बाद एक सभा को संबोधित करते हुए, केंद्रीय तिब्बती प्रशासन (सीटीए) के सिक्योंग (प्रमुख) ने चीन सरकार पर तिब्बती पहचान को ‘‘मिटाने’’ और तिब्बती एकता को कमजोर करने के उद्देश्य से ‘‘गलत सूचना’’ फैलाने का भी आरोप लगाया।

शेरिंग ने कहा कि अहिंसा, संवाद और पारस्परिक लाभ के माध्यम से चीन-तिब्बत संघर्ष का समाधान तलाशने वाली ‘‘मध्य मार्ग की नीति’’ टिकाऊ होगी।

उन्होंने कहा, ‘‘समाधान प्राप्त होने तक हम चीन सरकार के साथ सावधानीपूर्वक और स्थिरता के साथ अनाधिकारिक रूप से संवाद जारी रखेंगे।’’

एक बयान के अनुसार, शेरिंग ने तिब्बत में रहने वाले और निर्वासन में रह रहे समुदायों के सदस्यों से तिब्बती भाषा, संस्कृति और धर्म को संरक्षित करने की अपील की।

शेरिंग ने कहा, ‘‘लोकतांत्रिक रूप से चुनी गई निर्वासित सरकार, केंद्रीय तिब्बती प्रशासन की 17वीं काशाग (कैबिनेट), दलाई लामा के विचारों और सलाह को इसके मूल रूप में बनाये रखने की अपनी प्रतिबद्धता को दोहराती है।’’

उन्होंने कहा, ‘‘हम नियमों और विनियमों पर आधारित न्यायसंगत निष्पक्षता को कायम रखेंगे, सैद्धांतिक नीति कार्यान्वयन के माध्यम से सामूहिक प्रयासों को एकजुट करेंगे और साझा लक्ष्य की प्राप्ति के लिए आगे बढ़ेंगे।’’

उन्होंने कहा कि केंद्रीय तिब्बती प्रशासन तिब्बत-चीन संघर्ष के न्यायसंगत समाधान प्राप्त होने तक तिब्बती संघर्ष की दीर्घकालिक स्थिरता के प्राथमिक लक्ष्य के साथ राजनीतिक और सामाजिक कल्याणकारी पहल को आगे बढ़ाएगा।

अपने प्रशासन की सभी उपलब्धियों का श्रेय दलाई लामा के ‘‘असीम आशीर्वाद और दूरगामी नेक कार्यों’’ को देते हुए, उन्होंने तिब्बत के मुद्दे के लिए निरंतर समर्थन देने को लेकर भारत सरकार और देश के लोगों, अमेरिका तथा अन्य देशों के प्रति आभार जताया।

तिब्बती केंद्रीय प्रशासन 28 से 30 मई तक धर्मशाला के पुलिस ग्राउंड में तिब्बती सांस्कृतिक उत्सव का आयोजन कर रहा है।

विश्व में सर्वाधिक संख्या में तिब्बती प्रवासी समुदाय भारत में रहता है, जिसमें करीब 80,000 से लेकर 1,00,000 तक तिब्बती शरणार्थी और उनके वंशज शामिल हैं।

तिब्बती निर्वासित सरकार मैक्लोडगंज से संचालित होती है।

भाषा सुभाष पवनेश

पवनेश