दिल्ली उच्च न्यायालय ने दहेज हत्या मामले में सास को जमानत देने से किया इनकार

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दिल्ली उच्च न्यायालय ने दहेज हत्या मामले में सास को जमानत देने से किया इनकार

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  • Publish Date - May 27, 2026 / 07:18 PM IST,
    Updated On - May 27, 2026 / 07:18 PM IST

नयी दिल्ली, 27 मई (भाषा) दिल्ली उच्च न्यायालय ने 19-वर्षीय एक युवती की कथित दहेज हत्या के एक मामले में उसकी सास को जमानत देने से इनकार कर दिया है। युवती ने शादी के आठ माह बाद ही कथित तौर पर आत्महत्या कर ली थी।

न्यायमूर्ति स्वर्ण कांता शर्मा ने कहा कि एक युवती के जीवन का दुखद परिस्थितियों में अंत हो गया और कथित प्रताड़ना इस हद तक पहुंच गया था कि पीड़िता को लगा कि अपने पति और ससुराल वालों से बचने का एकमात्र तरीका आत्महत्या करना है।

युवती नवंबर 2024 में अपने ससुराल में फंदे से लटकी हुई पाई गई थी। उसके मायके के लोगों ने पुलिस में दी गई शिकायत में आरोप लगाया था कि पति और ससुराल वालों ने दहेज के रूप में तीन लाख रुपये की मांग की थी और इसे पूरा नहीं किये जाने के कारण उसे शारीरिक और मानसिक रूप से प्रताड़ित किया गया।

आत्महत्या करने से कुछ घंटे पहले युवती और उसके भाई के बीच फोन पर हुई बातचीत की रिकॉर्डिंग से पता चला कि पति ने उसके खिलाफ अपशब्द और धमकी भरी भाषा का इस्तेमाल किया, झगड़े के बाद पीड़िता के कपड़े फाड़ दिये गये और उसे निर्वस्त्र कर सड़क पर घुमाने की धमकी दी गई।

न्यायमूर्ति शर्मा ने 25 मई को पीड़िता की सास की जमानत याचिका खारिज करते हुए कहा कि चूंकि मृत्यु के सटीक कारण से संबंधित फॉरेंसिक रिपोर्ट का अभी इंतजार है और महत्वपूर्ण गवाहों से अब तक निचली अदालत में पूछताछ नहीं की गई है, इसलिए आरोपी को रिहा करना न्याय के हित में नहीं है, खासकर जब गवाहों को प्रभावित करने की संभावना हो।

अदालत ने कहा कि यह मामला समाज की एक परेशान करने वाली वास्तविकता को दर्शाता है, जहां करीब 19-वर्षीय एक युवती को आत्महत्या करने के लिए मजबूर किया गया, क्योंकि उसके माता-पिता उसके ससुराल वालों की तीन लाख रुपये की गैरकानूनी मांग को पूरा करने में असमर्थ थे।

अदालत ने कहा, ‘‘दुखद परिस्थितियों में एक युवती के जीवन का अंत हो गया। जांच के दौरान जुटाए गए साक्ष्यों में मृतका और उसके भाई के बीच हुई बातचीत की रिकॉर्डिंग भी शामिल है, जिसमें वह रोते हुए निर्वस्त्र अवस्था में घुमाए जाने की धमकी दिये जाने का उल्लेख कर रही है। ये सारे तथ्य दहेज की मांग पूरी न होने के कारण लगातार प्रताड़ित किये जाने के आरोपों के साथ मिलकर याचिकाकर्ता के खिलाफ लगाए गए आरोपों को गंभीर बनाते हैं।’’

सास ने दावा किया कि मृतका और उसके भाई के बीच हुई बातचीत की रिकॉर्डिंग से साफ पता चलता है कि वह (युवती) दहेज की किसी कथित मांग के कारण नहीं, बल्कि (पति के) किसी दूसरी लड़की के साथ ‘इंस्टाग्राम चैट’ को लेकर पति से हुए झगड़े के कारण परेशान थी।

उसने यह भी दलील दी कि झगड़े के समय और आत्महत्या के वक्त सास घटनास्थल पर मौजूद नहीं थी।

हालांकि, न्यायमूर्ति शर्मा ने जोर देकर कहा कि उच्चतम न्यायालय के अनुसार, विवाह के कुछ ही समय के भीतर किसी युवती की कथित दहेज हत्या से जुड़े मामलों में, अदालतों को अधिक सावधानी बरतनी चाहिए और संबंधित परिस्थितियों की सावधानीपूर्वक जांच करनी चाहिए।

अदालत ने कहा कि दहेज की मांग के संबंध में सास के खिलाफ विशिष्ट आरोप हैं और उपलब्ध साक्ष्य से प्रथम दृष्टया पता चलता है कि युवती ने अपने मायके के लोगों को बार-बार सूचित किया था कि तीन लाख रुपये की मांग पूरी न होने के कारण सास और अन्य सह-आरोपियों द्वारा उसे परेशान किया जा रहा।

अदालत ने गौर किया कि घटना से कुछ ही घंटे पहले रिकॉर्ड की गई ऑडियो बातचीत में, युवती ने अपने पति द्वारा उसके कपड़े फाड़े जाने और ससुर द्वारा उसे उस हालत में देखने के कारण अपनी अपमान और पीड़ा को स्पष्ट रूप से व्यक्त किया था।

अदालत ने इस पर भी गौर किया कि युवती ने अपने मायके वालों से कथित तौर पर बार-बार कहा था कि यातना से बचने का एकमात्र तरीका अपनी जान देना है।

भाषा सुभाष सुरेश

सुरेश