बंगाल के अनुकूल इलाकों में बाघों को दोबारा बसाने की संभावनाओं पर किया जा रहा विचार : भूपेंद्र यादव
बंगाल के अनुकूल इलाकों में बाघों को दोबारा बसाने की संभावनाओं पर किया जा रहा विचार : भूपेंद्र यादव
(तस्वीरों के साथ)
कोलकाता, 30 जून (भाषा) केंद्रीय मंत्री भूपेंद्र यादव ने मंगलवार को कहा कि केंद्र सरकार वैज्ञानिक योजना के जरिए पश्चिम बंगाल के उपयुक्त इलाकों में बाघों को फिर से बसाने पर विचार कर रही है।
उन्होंने साथ ही कहा कि पर्यावरण संरक्षण भारत के विकास एजेंडे का एक अहम हिस्सा बन गया है।
केंद्रीय पर्यावरण, वन एवं जलवायु मंत्री यादव ने राजस्थान के सरिस्का में बाघों को फिर से बसाने की सफलता का उल्लेख करते हुए कहा कि सरकार पश्चिम बंगाल में, जो रॉयल बंगाल टाइगर का घर है, उपयुक्त जगहों पर बाघों को फिर से बसाने की संभावना पर विचार कर रही है। सरिस्का में 2008 में एक भी बाघ नहीं बचा था लेकिन अब यह संख्या बढ़कर 56 हो गई है।
यादव ने देश में पर्यावरण संरक्षण से हुई प्रगति का उल्लेख करते हुए कहा कि 2014 से बाघ अभयारण्य की संख्या 47 से बढ़कर 58 हो गई है, जबकि एशियाई शेरों की आबादी 2015 में 523 से बढ़कर 2026 में 891 हो गई है।
केंद्रीय मंत्री ने भारत की जैव-विविधता का उल्लेख करते हुए कहा कि दुनिया की कुल भूमि में भारत की हिस्सेदारी महज 2.4 प्रतिशत है, लेकिन इसके बावजूद यह दुनिया की सभी दर्ज प्रजातियों में से सात से आठ प्रतिशत का घर है।
उन्होंने कहा, ‘‘हमारी सभ्यता ने प्रकृति को हमेशा शोषण के संसाधन के तौर पर नहीं, बल्कि एक ऐसी साझा विरासत के तौर पर देखा है जिसका सम्मान और संरक्षण किया जाना चाहिए।’’
यादव ने सरकार की पर्यावरण संरक्षण पहलों को रेखांकित करते हुए कहा कि भारत ने 2014 से पर्यावरण शासन के प्रति प्रतिक्रियात्मक दृष्टिकोण से सक्रिय दृष्टिकोण की ओर रुख किया है।
उन्होंने कहा, ‘‘संरक्षण को अब पर्यावरण से जुड़ी एक अलग तरह की समस्या के तौर पर नहीं देखा जाता है। यह अब सतत विकास के हमारे दृष्टिकोण का एक अहम हिस्सा है।’’
उन्होंने कहा कि ‘मिशन लाइफ’ (पर्यावरण के लिए जीवनशैली), अंतरराष्ट्रीय सौर गठबंधन, आपदा अनुकूल अवसंरचना गठबंधन (सीडीआरआई), इंटरनेशनल बिग कैट अलायंस, वैश्विक जैवईंधन गठबंधन जैसी पहलों और जलवायु न्याय की पुरजोर वकालत के जरिए भारत ने यह साबित कर दिया है कि पर्यावरण के प्रति ज़िम्मेदारी और आर्थिक प्रगति साथ-साथ आगे बढ़ सकते हैं।
यादव ने कहा कि गत 12 साल में आद्रभूमि की संख्या 24 से बढ़कर 100 हो गई है, जबकि पर्यावरण संवेदनशील क्षेत्र के तौर पर अधिसूचित किए गए इलाके में भी काफ़ी बढ़ोतरी हुई है।
केंद्रीय मंत्री ने संरक्षण में वैज्ञानिक दस्तावेज़ीकरण के महत्व को रेखांकित करते हुए कहा कि भारतीय प्राणी सर्वेक्षण (जेडएसआई), भारतीय वनस्पति सर्वेक्षण (बीएसआई)और भारतीय वन्यजीव संस्थान जैसे संस्थान जैव-विविधता की रक्षा में अहम भूमिका निभाते हैं।
उन्होंने कहा, ‘‘हम जिसे समझते नहीं हैं, उसे संरक्षित नहीं कर सकते। और जिसका हमने दस्तावेजीकरण नहीं किया है, उसकी रक्षा नहीं कर सकते।’’
वह कोलकाता में भारतीय प्राणी सर्वेक्षण के 111वें स्थापना दिवस पर आयोजित ‘पशु वर्गीकरण शिखर सम्मेलन- 2026’ के उद्घाटन सत्र को संबोधित कर रहे थे। उन्होंने कहा, ‘‘एक सदी से भी ज़्यादा समय से यह संस्थान भारत के जीव वर्गीकरण और जीव-जगत की खोज का आधार रहा है और देश के वैज्ञानिक नजरिए को आकार देने में कोलकाता की अहम भूमिका रही है।’’
पश्चिम बंगाल के वित्त मंत्री स्वप्न दासगुप्ता ने भी अपने संबोधन में जैव विविधता और उसके दस्तावेज़ीकरण के महत्व को रेखांकित किया।
उन्होंने इस मंच का इस्तेमाल जेडएसआई जैसे संस्थानों के मुख्यालय को पश्चिम बंगाल में स्थानांतरित करने की मांग के लिए भी किया।
राज्य के वित्तमंत्री ने दलील दी कि ‘डबल-इंजन’ सरकार अब ऐसे संस्थानों में मौजूद प्रतिभाओं को बेहतर अनुसंधान और अध्ययन के लिए अनुकूल माहौल देगी।
भाषा धीरज प्रशांत
प्रशांत

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