कोलकाता, 15 जनवरी (भाषा) पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव से पहले तृणमूल कांग्रेस (टीएमसी) ने अपनी कल्याणकारी मुहिम को बढ़ावा देने के लिए सिल्वर स्क्रीन का सहारा लिया है और मुख्यमंत्री ममता बनर्जी की प्रमुख योजनाओं को रोजमर्रा की जिंदगी बदलने वाले सामाजिक समताकारी उपायों के रूप में पेश करती 55 मिनट की एक डॉक्यूमेंट्री का अनावरण किया है।
‘लोक्खी एलो घोरे’ शीर्षक वाली इस फिल्म का प्रीमियर बुधवार रात नंदन में हुआ, जहां तृणमूल कांग्रेस के राष्ट्रीय महासचिव और सांसद अभिषेक बनर्जी, पार्टी के सांसद और मंत्री तथा तमिलनाडु फिल्म उद्योग की जानी-मानी हस्तियां मौजूद रहीं।
अभिषेक बनर्जी की परिकल्पना और मंजूरी से बनी तथा फिल्मकार और बैरकपुर के विधायक राज चक्रवर्ती द्वारा निर्देशित इस डॉक्यूमेंट्री में एक काल्पनिक लेकिन राजनीतिक रूप से प्रभावशाली कथा बुनी गई है।
कहानी ग्रामीण बंगाल की एक लड़की के इर्द-गिर्द घूमती है, जिसने कम उम्र में अपने पति को खो दिया था।
विधवा का किरदार अभिनेत्री सुभाश्री गांगुली ने निभाया है। उसके किसान पति की दिल का दौरा पड़ने से अचानक मौत के बाद उसकी जिंदगी बिखर जाती है।
सामाजिक रीति-रिवाजों की जकड़न के साथ, विधवा को गरीबी और जड़ जमाए पितृसत्तात्मक मानदंडों के बीच अपने ही घर में अपमान का सामना करना पड़ता है।
कहानी में मोड़ तब आता है जब उसे धीरे-धीरे राज्य की कल्याणकारी योजनाओं का लाभ मिलने लगता है—घरेलू सहायता के लिए लक्ष्मी भंडार, खाद्य सुरक्षा के लिए खाद्य साथी, खेती सहायता के लिए कृषक बंधु, आजीविका के लिए स्वयं सहायता समूहों के ऋण, देवरानी के बाल विवाह को रोकने के लिए कन्याश्री, स्वास्थ्य सेवा के लिए स्वास्थ्य साथी और स्थायी आवास के लिए बंगालार बाड़ी।
ये सरकारी पहल उस विधवा स्त्री को अपनी जिंदगी फिर से संवारने में मदद करते हैं।
स्क्रीनिंग के बाद ममता बनर्जी ने कहा, “किसी भी निर्वाचित सरकार का कर्तव्य और जिम्मेदारी अपने पूरे कार्यकाल के दौरान काम करना होता है। यह डॉक्यूमेंट्री सात या आठ योजनाओं को उजागर करती है लेकिन और भी कई योजनाएं हैं।”
केंद्र पर वित्तीय वंचना का आरोप लगाते हुए बनर्जी ने कहा कि धन रोके जाने के बावजूद कई योजनाएं लागू की गईं।
उन्होंने कहा, “केंद्र पर बंगाल के लगभग दो लाख करोड़ रुपये बकाया हैं। केंद्र सरकार दिल्ली बंगाल को वंचित रखना चाहती थी, लेकिन हम उनकी कृपा पर नहीं टिके। हमारी सरकार ने दिखाया है कि आत्मनिर्भर बंगाल का क्या मतलब है।”
राज चक्रवर्ती ने कहा कि फिल्म को मात्र 15 दिनों में पूरा किया गया और बताया कि अभिषेक बनर्जी ने व्यक्तिगत रूप से पटकथा पर ध्यान दिया।
यह डॉक्यूमेंट्री अब टीएमसी के चुनावी अभियान के तहत मोहल्लों और गांवों में दिखाई जाएगी।
भाषा
राखी नरेश
नरेश