बहुत कम और बहुत देर से उठाया गया कदम, विद्यार्थी अधूरे उपाय स्वीकार नहीं कर सकते: कांग्रेस

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बहुत कम और बहुत देर से उठाया गया कदम, विद्यार्थी अधूरे उपाय स्वीकार नहीं कर सकते: कांग्रेस

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  • Publish Date - July 23, 2026 / 12:06 PM IST,
    Updated On - July 23, 2026 / 12:06 PM IST

नयी दिल्ली, 23 जुलाई (भाषा) कांग्रेस ने प्रश्नपत्र लीक में शामिल लोगों को दंडित करने के लिए त्वरित अदालतें गठित करने की प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी की घोषणा को ‘‘बहुत कम और बहुत देर से उठाया गया कदम’’ करार देते हुए बृहस्पतिवार को कहा कि विद्यार्थी ऐसे ‘‘आधे-अधूरे उपाय’’ स्वीकार नहीं कर सकते।

कांग्रेस महासचिव जयराम रमेश ने कहा कि प्रश्नपत्र लीक रोकने में मोदी सरकार की विफलता, ऐसी घटनाएं होने पर उन्हें स्वीकार नहीं करने और उनकी निष्पक्ष जांच कराने में असमर्थता के लिए विद्यार्थी वास्तविक जवाबदेही चाहते हैं।

रमेश ने सोशल मीडिया मंच ‘एक्स’ पर कहा, ‘‘मांगें स्पष्ट हैं-पहली, शिक्षा मंत्री (धर्मेंद्र) प्रधान को बर्खास्त किया जाए। दूसरी, विद्यार्थियों से माफी मांगी जाए। तीसरी, उन पर हमला करने वालों के खिलाफ कार्रवाई की जाए।’’

उन्होंने कहा, ‘‘प्रश्नपत्र लीक में शामिल लोगों को दंडित करने के लिए त्वरित अदालतें गठित करने की प्रधानमंत्री की घोषणा बहुत कम, बहुत देर से की गई और बेहद भ्रामक है।’’

रमेश ने दावा किया कि प्रधानमंत्री को सबसे पहले इस सच्चाई का सामना करना चाहिए कि पिछले 12 वर्ष में उनकी सरकार ने प्रश्नपत्र लीक की घटनाओं को कैसे छिपाया और उन्हें होने दिया। उन्होंने कहा कि मोदी सरकार में इतनी हिम्मत भी नहीं है कि वह स्वीकार करे कि उसके कार्यकाल में प्रश्नपत्र लीक हुए हैं।

उन्होंने मोदी और शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान पर निशाना साधते हुए कहा, ‘‘शिक्षा मंत्रालय ने पहले संसद की शिक्षा संबंधी स्थायी समिति के समक्ष दावा किया था कि राष्ट्रीय परीक्षा एजेंसी (एनटीए) द्वारा आयोजित किसी भी परीक्षा का प्रश्नपत्र लीक नहीं हुआ। प्रधानमंत्री और मंत्री प्रधान सच्चाई स्वीकार करने के बजाय जनता और संसद से बेशर्मी से झूठ बोलते रहे हैं।’’

उन्होंने कहा कि मोदी सरकार ने राष्ट्रीय परीक्षा एजेंसी की परीक्षाओं के प्रश्नपत्र लीक से जुड़ी जांच को लगातार धुंधला रखा है।

रमेश ने कहा कि उदाहरण के लिए, 2024 के राष्ट्रीय पात्रता सह प्रवेश परीक्षा-स्नातक (नीट-यूजी) प्रश्नपत्र लीक मामले के आरोपियों के साथ आगे क्या हुआ, इसे लेकर कोई पारदर्शिता नहीं है।

उन्होंने कहा, ‘‘हमें केवल इतना पता है कि केंद्रीय अन्वेषण ब्यूरो (सीबीआई) मुख्य आरोपी संजीव मुखिया के खिलाफ समय पर आरोपपत्र दाखिल करने में विफल रहा, जिससे उसे जमानत पर रिहा होने का मौका मिल गया। हमें यह भी पता है कि सीबीआई ने यह कहते हुए मामला बंद करने की रिपोर्ट दाखिल की कि 2024 की विश्वविद्यालय अनुदान आयोग-राष्ट्रीय पात्रता परीक्षा (यूजीसी-नेट) में कोई अनियमितता नहीं हुई थी, जबकि राष्ट्रीय परीक्षा एजेंसी ने उस समय इस परीक्षा को रद्द कर दिया था। लेकिन सीबीआई ने यह रिपोर्ट क्यों दाखिल की, इसका कारण ज्ञात नहीं है।’’

रमेश ने कहा कि संसद ने 2024 की शुरुआत में सार्वजनिक परीक्षा (अनुचित साधनों की रोकथाम) अधिनियम पारित किया था, लेकिन कांग्रेस समेत विपक्ष ने तभी कहा था कि यह कानून प्रश्नपत्र लीक रोकने के लिए पर्याप्त नहीं है।

उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री ने उचित सलाह पर ध्यान देना उचित नहीं समझा।

रमेश ने कहा कि भारत के विद्यार्थी ऐसे आधे-अधूरे उपाय स्वीकार नहीं कर सकते।

भाषा

सिम्मी गोला

गोला